Punjab Bhasha Vibhag Director Jaswant Zafar Show Cause Notice: पंजाब सरकार ने भाषा विभाग के डायरेक्टर जसवंत जफर को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। उच्च शिक्षा और भाषाओं की प्रशासनिक सचिव सुनाली गिरी ने यह नोटिस भेजा है। मामला भाषा विभाग में 42 शोध सहायकों की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। यह भर्ती काफी समय से विवादों में घिरी है और मामला अदालत तक पहुंच चुका था।
नोटिस जारी होने के बाद डायरेक्टर जसवंत जफर भड़क गए। उन्होंने खुद CM भगवंत मान को पत्र लिखकर प्रशासनिक सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर डाली।
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‘क्या है 42 पदों का पूरा विवाद?’
भाषा विभाग में 42 शोध सहायकों की भर्ती लंबे समय से विवादों का केंद्र बनी हुई है। पंजाब सरकार को मिली शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि भर्ती के दौरान योग्यता के मानदंडों में बदलाव किया गया और आरक्षण के नियमों का भी उल्लंघन हुआ। इन शिकायतों के बाद भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई और मामला अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है।
दिलचस्प बात यह है कि प्रशासनिक सचिव सुनाली गिरी ने पंजाबी ट्रिब्यून को बताया कि रोस्टर के नियमों की उल्लंघना हुई और आरक्षण सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
‘दस्तावेजों में भी गड़बड़ी का आरोप’
प्रशासनिक सचिव ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनुभव प्रमाण पत्र भी डायरेक्टर द्वारा वेरिफाई किए गए हैं, जबकि दस्तावेजों के साथ लगे लेख निर्धारित तारीख के बाद प्रकाशित हुए हैं। इसका सीधा मतलब है कि दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप लगाया गया है।
सुनाली गिरी ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया डायरेक्टर की नियुक्ति से पहले शुरू हुई थी, लेकिन उसे आगे मौजूदा डायरेक्टर ने बढ़ाया। उन्होंने यह भी कहा कि डायरेक्टर को बार-बार बुलाने के बाद भी वह बैठकों में नहीं आते।
‘डायरेक्टर बोले: मुझे फंसाया जा रहा है’
जसवंत जफर का कहना है कि जिस क्लेरिकल गलती के लिए उन्हें नोटिस दिया गया है, वह मामला उनकी नियुक्ति से पहले का है। उन्होंने CM को लिखे पत्र में यह भी कहा कि किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए CM ही सक्षम हैं, लेकिन प्रशासनिक सचिव ने तो शिक्षा मंत्री को भी इसकी सूचना नहीं दी।
उनका गिला यह है कि भाषा विभाग के कामों में जानबूझकर अड़ंगे लगाए जा रहे हैं।
‘AAP सरकार का अनोखा प्रयोग और उसकी चुनौतियां’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि AAP सरकार ने भाषा विभाग की जिम्मेदारी एक लेखक को दी है, जबकि परंपरागत रूप से विभाग के भीतर से ही डायरेक्टर बनते थे। यह प्रयोग अब विभाग के भीतर ही टकराव का कारण बन गया है। डायरेक्टर और प्रशासनिक सचिव के बीच की यह खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है।
इससे साफ होता है कि नीयत चाहे जो भी हो, बाहर से लाए गए नेतृत्व और नौकरशाही के बीच सामंजस्य बिठाना आसान नहीं होता।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- पंजाब भाषा विभाग के डायरेक्टर जसवंत जफर को कारण बताओ नोटिस जारी।
- 42 शोध सहायकों की भर्ती में आरक्षण नियमों और योग्यता मानदंडों की उल्लंघना का आरोप।
- प्रशासनिक सचिव सुनाली गिरी ने दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप लगाया।
- जसवंत जफर ने CM को पत्र लिख सचिव के खिलाफ कार्रवाई मांगी।
- मामला अदालत तक पहुंच चुका था और भर्ती अभी तक अधर में है।











