Parvinder Jhota Postmortem: चंडीगढ़ PGI में मानसा के नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा के शव का पोस्टमॉर्टम शुरू हो गया है। जांच के दौरान अस्पताल में भारी पुलिस फोर्स तैनात है। उनका शव गुरुवार रात 12 बजे मानसा से चंडीगढ़ भेजा गया था।
उधर मानसा में झोटा के पिता भीम सिंह ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी मांग है कि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के साथ हुई बातचीत के मुताबिक मानसा के SSP वैभव चौधरी को हटाया जाए।
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पिता की जिद: “चाहे मेरी मौत हो जाए”
भीम सिंह का कहना है कि अगर SSP ने नशे पर कार्रवाई की होती तो उनके बेटे की हत्या नहीं होती। उन्होंने साफ कहा कि जब तक SSP नहीं हटते, वे अन्न का एक दाना भी नहीं खाएंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिता ने अपनी बात कड़े शब्दों में रखी है: “चाहे मेरी मौत हो जाए।” यह किसी आम नाराजगी की भाषा नहीं है। यह एक टूटे हुए पिता का आखिरी दांव लगता है।
पोस्टमॉर्टम और संस्कार को लेकर भी उन्होंने समय बताया। उनके मुताबिक अगर जांच समय पर हो गई और शव मिल गया तो आज ही संस्कार होगा, वरना कल किया जाएगा।
PGI में जांच: 5 डॉक्टर, SDM की निगरानी
PGI में पांच डॉक्टरों की टीम पोस्टमॉर्टम कर रही है और SDM पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। इतनी कड़ी निगरानी बताती है कि मामला कितना संवेदनशील है।
6 वजहें, जिनसे पोस्टमॉर्टम जरूरी था
पहली वजह मौत का असली कारण साबित करना है। इससे पता चलता है कि गोली शरीर के किस हिस्से में लगी और किन अहम अंगों या खून की नलियों को नुकसान पहुंचा।
दूसरी वजह चोटों के सबूत जुटाना है। गोली के आने-जाने के निशान, उसका रास्ता, हड्डियों के फ्रैक्चर और अंदरूनी चोटें जांच से सामने आ सकती हैं।
तीसरी वजह दूरी और दिशा का अंदाजा है। घाव के आसपास बारूद के कण और जलने के निशान से पता चलता है कि गोली कितनी दूर से चली।
चौथी वजह गोली और हथियार की पहचान है। शरीर में गोली या उसका हिस्सा मिले तो उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है।
पांचवीं वजह अदालत में आरोप साबित करने की चुनौती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सीबीआई को चिकित्सकीय और वैज्ञानिक सबूत दे सकती थी, जिन्हें दूसरे साक्ष्यों के साथ अदालत में रखा जा सकता है।
छठी वजह चश्मदीदों के बयानों की पुष्टि है। रिपोर्ट के नतीजों का मिलान गवाहों के बयानों से किया जा सकता है। बयानों में विरोधाभास हो तो उसकी भी जांच हो सकती है।
समझौते में सरकार ने क्या-क्या माना
| क्र. | सरकार की सहमति |
|---|---|
| 1 | झोटा की पत्नी को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी और परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा |
| 2 | भीम सिंह और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों पर दर्ज मामले रद्द होंगे |
| 3 | पंजाब में फ्लेक्स फाड़ने पर दर्ज मामले वापस होंगे, मानसा में झोटा की प्रतिमा लगेगी |
| 4 | पैतृक गांव ख्याला में उनके नाम पर ट्रॉमा सेंटर, एक हफ्ते में मंजूरी |
| 5 | गोलीबारी में घायल 4 लोगों को 5-5 लाख रुपये और इलाज का पूरा खर्च |
| 6 | प्रिगाबालिन कैप्सूल की बिक्री और मिसयूज पर नियंत्रण के लिए एक सप्ताह में नोटिफिकेशन |
| 7 | लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले युवक के परिवार को भी मुआवजा |
| 8 | महिला कार्यकर्ता अरविंदर कौर से कथित दुर्व्यवहार पर स्पीकर संधवां ने माफी मांगी |
| 9 | भीम सिंह और साथियों के मामलों में अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करने का भरोसा |
विश्लेषण: मुआवजे के बाद भी सवाल क्यों बाकी है
देखा जाए तो सरकार ने नौकरी, मुआवजा, ट्रॉमा सेंटर और प्रतिमा जैसी कई मांगें मान ली हैं। फिर भी पिता की भूख हड़ताल जारी है। इसका मतलब है कि परिवार के लिए सबसे बड़ा मुद्दा जवाबदेही है, पैसा या नौकरी नहीं।
दिलचस्प बात यह है कि प्रिगाबालिन कैप्सूल पर नोटिफिकेशन की बात भी समझौते में है। यानी नशे के खिलाफ जिस लड़ाई में झोटा आगे थे, उसी का एक हिस्सा अब सरकारी कागजों में दर्ज हो रहा है। आम आदमी के लिए इसका असर तभी दिखेगा जब यह नोटिफिकेशन समय पर जारी होकर जमीन पर लागू हो।
क्या है पृष्ठभूमि
परविंदर झोटा मानसा के नशा विरोधी एक्टिविस्ट थे और उनकी हत्या के बाद मामला गरमा गया। इसके बाद मंत्री और स्पीकर के साथ बैठक हुई, जिसमें ऊपर बताई गई मांगों पर सहमति बनी। पिता का कहना है कि इसी बातचीत में SSP को हटाने की बात भी हुई थी, और अब वे उसी पर अड़े हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- चंडीगढ़ PGI में पांच डॉक्टरों की टीम परविंदर झोटा का पोस्टमॉर्टम कर रही है, SDM निगरानी में हैं।
- पिता भीम सिंह मानसा SSP वैभव चौधरी को हटाने तक भूख हड़ताल पर हैं।
- सरकार ने 2 करोड़ रुपये मुआवजा, पत्नी को नौकरी और ट्रॉमा सेंटर समेत 9 बिंदुओं पर सहमति दी।
- पोस्टमॉर्टम और संस्कार का समय जांच पूरी होने पर निर्भर है।













