Chandumajra SAD Return: पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा और उनके बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा आज दोबारा शिरोमणि अकाली दल जॉइन करेंगे। सुखबीर सिंह बादल उन्हें पार्टी में शामिल करेंगे। इसके लिए सुखबीर शाम को पटियाला में चंदूमाजरा की रिहायश पर पहुंचेंगे।
चंदूमाजरा के मुताबिक शाम 4 बजे सुखबीर बादल उनके घर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय के हालात, लोगों की नब्ज और पंजाब की स्थिति ऐसी है कि अकाली दल को इकट्ठा होना चाहिए।
🔍 यह भी पढ़ें- Prem Singh Chandumajra का यू-टर्न: चुनाव से पहले अकाली सियासत में हलचल
चुनाव कौन लड़ेगा: पिता नहीं, बेटा
चंदूमाजरा ने साफ किया कि वे खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। चुनाव उनका बेटा लड़ेगा और वह सनौर से ही मैदान में उतरेगा। यानी जिस सीट पर पिता की पहचान रही है, वहां अब बेटा चेहरा बनेगा।
हुकमनामे और गठबंधन पर उन्होंने भी अपनी राय रखी। उनके अनुसार 2 दिसंबर का हुकमनामा भी अकाली दल को तोड़ने के लिए नहीं, जोड़ने के लिए था।
अमित शाह के बयान से ज्ञानी हरप्रीत सिंह की नाराजगी तक
चंदूमाजरा ने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह ने जब एनडीए की सरकार की बात कही थी, तो उन्होंने पहले बयान दिया था कि पंजाब को बचाने के लिए इकट्ठा होने की जरूरत है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस बयान का बुरा माना।
जब उनसे पूछा गया कि अब ज्ञानी जी क्या करेंगे, तो उनका जवाब था कि वे कथा कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह जवाब चंदूमाजरा की नाराजगी और दूरी, दोनों को एक वाक्य में दिखा देता है।
पूरा मामला 4 पॉइंट में
1. लोकसभा चुनाव की हार से शुरू हुआ विवाद: 2024 के लोकसभा चुनाव में अकाली दल के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी में कलह बढ़ी। पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी। चंदूमाजरा समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने तत्कालीन अध्यक्ष सुखबीर बादल के नेतृत्व पर सवाल उठाए और बागी गुट बना लिया।
2. नाराजगी के दो बड़े कारण: आरोप था कि 2007 से 2017 तक अकाली सरकार के दौरान हुई कुछ गलतियों से सिख समुदाय में पार्टी की छवि खराब हुई। दूसरा, चंदूमाजरा 2019 में गठबंधन टूटने के बाद दोबारा भाजपा के साथ गठबंधन के पक्ष में थे, जबकि पार्टी का एक धड़ा इसके खिलाफ था।
3. पार्टी से निष्कासन: अकाली दल बादल ने बागी नेताओं पर कार्रवाई करते हुए चंदूमाजरा और साथियों को निकाल दिया। इसके बाद बागियों ने ‘शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सृजित)’ नाम का नया धड़ा बनाया, जिसकी कमान पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सौंपी गई।
4. नए धड़े में भी मतभेद: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस धड़े में भी मतभेद उभरे। 4 नवंबर 2026 को प्रो. चंदूमाजरा ने इस्तीफा दे दिया और अगले दिन 5 नवंबर को उनके बेटे व पूर्व विधायक हरिंदरपाल ने भी समर्थकों के साथ धड़ा छोड़ दिया।
विश्लेषण: बगावत का चक्र पूरा
देखा जाए तो चंदूमाजरा ने सुखबीर बादल के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी और अब उन्हीं के हाथों पार्टी में लौट रहे हैं। यह एक पूरा चक्र है। जिस नए धड़े में उन्हें जगह मिली थी, उसी से अलग होने में उन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगा।
समझने वाली बात है कि यह वापसी सिर्फ दो नेताओं की नहीं है। यह उस संदेश का हिस्सा है कि अकाली खेमे के लोग इकट्ठा होना चाहते हैं। आम अकाली कार्यकर्ता के लिए यह पार्टी में एकजुटता का संकेत हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा और बेटा हरिंदरपाल आज शाम 4 बजे पटियाला में अकाली दल जॉइन करेंगे।
- चंदूमाजरा विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, उनका बेटा सनौर से लड़ेगा।
- 4 नवंबर 2026 को चंदूमाजरा ने और 5 नवंबर को उनके बेटे ने अकाली दल (पुनर्सृजित) छोड़ा।
- 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई बगावत से यह पूरा घटनाक्रम जुड़ा है।












