Parvinder Jhota Murder Case में अब भी इंसाफ की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही। मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के 14 दिन बाद भी उनके अंतिम संस्कार को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका है। परिवार और एक्शन कमेटी मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
चिंता का विषय यह है कि परिवार ने साफ कर दिया है कि जब तक दोनों प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक न पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा और न ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। एक्शन कमेटी ने प्रदर्शन की अगली रणनीति तय करने के लिए झोटा के परिवार के साथ बैठक करने का फैसला किया है।
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‘शिरोमणि कमेटी ने दिया शहीद का दर्जा’
दूसरी तरफ सरकार की ओर से गठित कमेटी के साथ अभी कोई बैठक तय नहीं हुई है। लेकिन माना जा रहा है कि अगर प्रशासन बैठक करता है, तो अन्य मांगों के साथ-साथ झोटा को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग फिर से उठाई जाएगी।
इससे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी झोटा को सिख कौम का शहीद का दर्जा देने का ऐलान कर चुकी है। कमेटी ने उनकी फोटो अमृतसर के अजायबघर में लगाने का भी फैसला किया है। उधर, प्रशासन का दावा है कि संघर्ष कमेटी की 14 में से 11 मांगें मान ली गई हैं।
‘केमिस्टों ने बंद की तीन दवाओं की बिक्री’
हैरान करने वाली बात यह है कि पंजाब के सभी होलसेलर और रिटेलर केमिस्टों ने तीन तरह की दवाओं की बिक्री बंद करने का ऐलान कर दिया है। इनमें ट्रामाडोल, प्रेगाबालिन और सभी तरह की साइकोट्रोपिक व नारकोटिक दवाएं शामिल हैं।
यह फैसला दिखाता है कि झोटा की हत्या के बाद नशे के खिलाफ माहौल कितना गंभीर हो गया है। समझने वाली बात है कि यह कदम सीधे तौर पर नशे की दवाओं के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में उठाया गया है।
‘पत्नी मनप्रीत की भावुक अपील’
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने एक भावुक अपील करते हुए कहा कि संघर्ष को केवल झोटा के मामले में दोषियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे पंजाब में नशे के बढ़ते प्रचलन के खिलाफ साझा लड़ाई बनाना होगा, ताकि दूसरे परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने अपने प्रियजन को खोने का जो दुख झेला है, वह किसी और परिवार को न झेलना पड़े। किसी बच्चे के सिर से पिता का साया न उठे और किसी दूसरे घर के सपने नशे की भेंट न चढ़ें। मनप्रीत कौर ने किसानों, मजदूरों, युवाओं और तमाम संगठनों से साझा मंच पर आने की अपील की।
‘सुखबीर बादल ने की परिवार से मुलाकात’
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल रविवार देर शाम परविंदर सिंह झोटा के मानसा स्थित घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर अपना दुख साझा किया। उन्होंने झोटा के माता-पिता, पत्नी और दोनों छोटे बच्चों के हौसले को नमन करते हुए कहा कि परिवार अपने गहरे दुख के बावजूद इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिरोमणि अकाली दल की ओर से और व्यक्तिगत तौर पर भी वे हर समय इस संघर्ष में परिवार के साथ खड़े रहेंगे।
नीचे टेबल में पूरे मामले का सार देखा जा सकता है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पीड़ित | परविंदर सिंह झोटा (एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट) |
| बीते दिन | 14 दिन |
| परिवार की मांग | सीएम और डीजीपी का इस्तीफा |
| प्रशासन का दावा | 14 में से 11 मांगें मानीं |
| शिरोमणि कमेटी का ऐलान | शहीद का दर्जा |
| केमिस्टों का फैसला | ट्रामाडोल, प्रेगाबालिन सहित 3 दवाओं की बिक्री बंद |
‘जानें पूरा मामला’
झोटा का मामला अब सिर्फ एक हत्याकांड नहीं रह गया, बल्कि यह पंजाब में नशे के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। परिवार की जिद और प्रशासन की ओर से मांगें मानने के दावों के बीच यह टकराव अब भी सुलझता नजर नहीं आ रहा। आम जनता के लिए यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को इंसाफ के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- परविंदर झोटा की हत्या के 14 दिन बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हुआ
- परिवार सीएम और डीजीपी के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है
- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने झोटा को शहीद का दर्जा दिया
- पंजाब के केमिस्टों ने तीन नशीली दवाओं की बिक्री बंद करने का ऐलान किया













