Mohali Flat Possession Case में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला एक आम खरीदार के लिए राहत की खबर लेकर आया है। मुल्लांपुर स्थित ‘द लेक’ प्रोजेक्ट में फ्लैट का कब्जा तय समय पर नहीं देना ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को महंगा पड़ गया। आयोग ने बिल्डर को शिकायतकर्ता सुनील चौधरी को मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए 75 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि इसके अलावा बिल्डर को 35 हजार रुपए मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर भी देने होंगे। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा सौंपना अनिवार्य होगा।
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’58 लाख देकर भी नहीं मिला फ्लैट’
शिकायतकर्ता सुनील चौधरी ने 2018 में मुल्लांपुर स्थित ‘द लेक’ प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। इसके लिए उन्होंने करीब 58.07 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया था। बिल्डर ने 31 जुलाई 2021 तक फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया था।
कोविड-19 महामारी के कारण समय सीमा में छूट मिलने के बावजूद फ्लैट नहीं सौंपा गया। और बस यहीं से शुरू हुई चौधरी की लंबी कानूनी लड़ाई।
‘बिल्डर की दलील हुई खारिज’
बिल्डर ने आयोग के सामने दलील दी कि शिकायतकर्ता के पास पहले से ही अन्य संपत्तियां हैं और उन्होंने यह फ्लैट निवेश के मकसद से खरीदा था। इसलिए उन्हें उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। बिल्डर ने शिकायत की सुनवाई पर भी आपत्ति जताई।
हालांकि आयोग ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने साफ कहा कि लंबे समय तक बिना उचित कारण फ्लैट का कब्जा न देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
‘9% ब्याज के साथ चुकानी होगी रकम’
इसका मतलब है कि अब बिल्डर को सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि भारी ब्याज भी चुकाना पड़ेगा। आयोग ने बिल्डर को 30 अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2026 तक प्राप्त पूरी बिक्री राशि पर 9% सालाना की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है। यह भुगतान 30 दिनों के भीतर करना होगा।
देरी होने पर संचित ब्याज की रकम पर भुगतान की तारीख से 12% सालाना की दर से ब्याज देना होगा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बिल्डर को फ्लैट का कब्जा देने से पहले अधिभोग और निर्माण प्रमाणपत्र भी लेने होंगे।
नीचे टेबल में पूरे मामले का सार देखा जा सकता है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रोजेक्ट | द लेक, मुल्लांपुर |
| बिल्डर | ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ डेवलपर्स |
| भुगतान राशि | 58.07 लाख रुपए |
| वादा की गई कब्जा तारीख | 31 जुलाई 2021 |
| मुआवजा | 75 हजार रुपए |
| मुकदमेबाजी खर्च | 35 हजार रुपए |
| ब्याज दर | 9% सालाना (देरी पर 12%) |
‘जानें पूरा मामला’
शिकायतकर्ता को समझौते के अनुसार बची हुई रकम देनी होगी, लेकिन बिल्डर उनसे देरी का जुर्माना नहीं वसूल सकेगा। यह दर्शाता है कि आयोग ने दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला सुनाया है।
आम आदमी के लिए यह फैसला एक मिसाल की तरह है। देखा जाए तो रियल एस्टेट सेक्टर में ऐसे मामले आम हैं, जहां खरीदार सालों तक अपने घर का इंतजार करते रह जाते हैं। यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो बिल्डरों की देरी से परेशान हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को 75 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया
- शिकायतकर्ता ने 2018 में 58.07 लाख रुपए देकर फ्लैट बुक किया था
- बिल्डर को 9% सालाना ब्याज के साथ पूरी राशि चुकानी होगी
- दो महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा देना अनिवार्य किया गया













