Indian Railway Mobile Speaker Fine Jail — ट्रेन में फोन स्पीकर पर रील्स देखना, गाने बजाना या जोर से बात करना अब भारी पड़ेगा। भारतीय रेलवे ने रेलवे एक्ट की धारा-145 और जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम के तहत ₹1000 ऑन-द-स्पॉट जुर्माना, ट्रेन से उतारने और ₹5000 जुर्माना/6 माह जेल तक का प्रावधान लागू कर दिया है।
🔍 यह भी पढ़ें- Gen Z Indians Are Fatter: भारत के 4.1 करोड़ बच्चे Overweight या Obese, पतले दिखने वाले बच्चों का भी निकला पेट, Visceral Fat का खतरा
रात 11 बजे स्लीपर कोच। कोई भोजपुरी गाना फुल वॉल्यूम पर बजा रहा है, कोई स्पीकर पर रील्स की हंसी सुना रहा है, कोई बिजनेस डील चिल्ला कर कर रहा है। रेल मदद पोर्टल पर सबसे ज्यादा शिकायतें इसी ‘को-पैसेंजर शोर’ की आ रही थीं। दक्षिण रेलवे के PCCM ने सर्कुलर निकाला, रेलवे बोर्ड को भेजा — अब पूरे भारत में जीरो टॉलरेंस।
कानून की 3 स्टेज: जेल पहली गलती पर नहीं, अड़ने पर मिलती है
यहां ध्यान देने वाली बात है: हेडलाइन में जेल लिखा है, मगर कानून प्रक्रिया तय करता है।
| स्टेज | स्थिति | कार्रवाई |
|---|---|---|
| पहली (Warning/Fine) | स्पीकर पर आवाज, शोर | TTE/वाणिज्य अधिकारी ₹1000 ऑन-द-स्पॉट जुर्माना ठोकेगा। |
| दूसरी (Ejection) | जुर्माने के बाद भी न माने, जारी रखे | अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार देंगे, टिकट जब्त। |
| तीसरी (Jail/Court) | अधिकारियों से बदतमीजी, हंगामा, बार-बार उल्लंघन | रेलवे मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस → ₹5000 तक जुर्माना या 6 माह जेल या दोनों। |
समझने वाली बात: पहली गलती पर जेल नहीं, लेकिन अड़ियल रवैया सीधे सलाखों के पीछे पहुंचाएगा।
TTE को मिली ‘असाधारण ताकत’
पहली बार TTE/कमर्शियल स्टाफ को किसी भी पैसेंजर को बीच सफर ट्रेन से उतारने का कानूनी अधिकार मिला है। यह बड़ी जिम्मेदारी भी है। चुनौती: ₹1000 की ताकत का दुरुपयोग न हो, सामान्य बातचीत को जबरन विवाद न बनाया जाए। रेलवे स्टाफ के लिए ट्रेनिंग जरूरी।
मेट्रो में पहले से नियम, अब रेलवे भी लाइन पर
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु मेट्रो में ये नियम बरसों से हैं। अब रेलवे+मेट्रो दोनों जगह ‘जीरो टॉलरेंस’। स्टेशनों पर PA सिस्टम से घोषणाएं, कोच में स्टीकर: “गाना सुनना है तो ईयरफोन लगाएं।”
राहत की बात: करोड़ों यात्री चैन की नींद सो सकेंगे। चिंता का विषय: अमल में एकरूपता रहेगी या नहीं?
मुख्य बातें (Key Points)
- कानूनी आधार: रेलवे एक्ट धारा-145 + जन विश्वास संशोधन अधिनियम।
- पहला अपराध: ₹1000 जुर्माना (TTE/अधिकारी मौके पर वसूलेंगे)।
- दूसरा अपराध: ट्रेन से उतारना (अगले स्टेशन पर) + टिकट जब्त।
- तीसरा अपराध (गंभीर): रेलवे मजिस्ट्रेट कोर्ट → ₹5000 जुर्माना / 6 माह जेल / दोनों।
- दायरा: सभी जोन, सभी ट्रेनें (लंबी दूरी/उपनगरीय) + स्टेशन परिसर।
- उपाय: ईयरफोन/हेडफोन का प्रयोग अनिवार्य।










