MBBS Fee Policy Assam के इस नए नियम ने मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों में एक नई उम्मीद जगाई है। असम के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की बात सामने आई है। राज्य सरकार ने फीस ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए MBBS और BDS की फीस को सीधे तौर पर परिवार की सालाना आय से जोड़ दिया है। इस नई नीति का मकसद साफ है कि गरीब और बीपीएल परिवारों के मेधावी छात्र बिना आर्थिक बोझ के डॉक्टर बन सकें।
देखा जाए तो 2022 के बाद से असम के मेडिकल कॉलेजों की फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ था और सभी से एक समान फीस ली जाती थी। दिलचस्प बात यह है कि नई व्यवस्था के तहत ज्यादा आय वाले परिवारों के बच्चों को अब पहले के मुकाबले छह गुना तक ज्यादा फीस चुकानी होगी। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी: सरकार ने फीस का ऐसा संतुलन बनाया है कि जो परिवार सक्षम हैं, वे शिक्षा की वास्तविक लागत उठाएंगे, और कमजोर वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी।
अगर गौर करें, तो इस नीति से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा के समान अवसर (Equal Opportunity) जैसे बड़े मुद्दों पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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‘नई सरकारी सालाना फीस का गणित’
समझने वाली बात यह है कि फीस का नया ढांचा पूरी तरह से आय वर्गों पर निर्भर है। नीचे दी गई टेबल से आप आसानी से समझ सकते हैं कि किस आय वर्ग को कितनी फीस देनी होगी:
| परिवार की सालाना आय (Annual Income) | MBBS की नई सालाना फीस | BDS की नई सालाना फीस |
| ₹9 लाख या उससे ज्यादा (उच्च आय) | ₹1,00,000 | ₹75,000 |
| ₹4 लाख से ₹9 लाख (मध्यम आय) | ₹50,000 | ₹37,500 |
| बीपीएल और कम आय वर्ग | ₹5,000 | ₹3,750 |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकारी फीस के अलावा छात्रों को नॉन-गवर्नमेंट फीस (हॉस्टल, यूनियन, स्टूडेंट वेलफेयर) भी देनी होगी। एमबीबीएस में हॉस्टल वाले छात्रों को ₹21,500 और बिना हॉस्टल वालों को ₹15,000 जमा करने होंगे। वहीं बीडीएस में यह राशि क्रमशः ₹13,000 और ₹11,000 है। साथ ही, प्रवेश के समय ₹2,400 की एकमुश्त सरकारी फीस भी लगेगी। दूसरे साल से एमबीबीएस छात्रों को ₹8,000 और बीडीएस को ₹4,000 सालाना नॉन-गवर्नमेंट फीस देनी होगी।
‘प्रिंसिपलों को मिला 50% छूट का विशेष अधिकार’
हैरान करने वाली बात नहीं, बल्कि यह एक बड़ी राहत है कि मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने प्रिंसिपलों को विशेष अधिकार (Veto Power) दिए हैं। इसका मतलब है कि अगर किसी छात्र पर गंभीर आर्थिक संकट आता है और उसकी पढ़ाई छूटने का खतरा होता है, तो कॉलेज प्रिंसिपल अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके लागू फीस में 50% तक की भारी छूट दे सकते हैं।
‘आम पाठक और छात्रों पर असर’
इस फैसले का सीधा असर मध्यम और गरीब वर्ग के उन परिवारों पर पड़ेगा, जिनके बच्चे मेधावी तो हैं लेकिन पैसे की कमी के कारण डॉक्टर बनने का सपना छोड़ देते थे। उच्च आय वाले परिवारों पर थोड़ा आर्थिक बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन इससे गरीब छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे।
‘जानें पूरा मामला’
असम सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के लिए एक नई ‘इनकम-बेस्ड फीस पॉलिसी’ लागू की है। इससे पहले सभी छात्रों से एक समान फीस ली जाती थी, लेकिन अब परिवार की सालाना आय के आधार पर 3 स्लैब (₹9 लाख से अधिक, ₹4 से 9 लाख, और बीपीएल) बनाए गए हैं। यह नया नियम असम में चल रहे मौजूदा एकेडमिक सेशन के उन सभी नए छात्रों पर लागू होगा, जिन्होंने पहले और दूसरे राउंड में एडमिशन लिया है या तीसरे राउंड में लेंगे। अधिकारियों के अनुसार कॉलेजों के संचालन का खर्च बढ़ने के कारण यह मॉडल अपनाया गया है, ताकि सक्षम लोग पूरा खर्च उठाएं और गरीबों को सब्सिडी मिले।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
असम में MBBS और BDS की सरकारी फीस अब परिवार की सालाना आय के आधार पर तय होगी।
₹9 लाख से अधिक आय वालों को MBBS के लिए ₹1 लाख और बीपीएल छात्रों को सिर्फ ₹5,000 सालाना देने होंगे।
कॉलेज प्रिंसिपलों को गंभीर आर्थिक तंगी वाले छात्रों की फीस 50% तक माफ करने का विशेष अधिकार दिया गया है।
यह नया फीस स्ट्रक्चर इसी एकेडमिक सेशन (तीसरे राउंड सहित) से सभी नए छात्रों पर लागू कर दिया गया है।













