Punjab DA Strike: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर चुका है। महंगाई भत्ते (DA) की बकाया किश्तें न मिलने पर आज पूरे प्रदेश में जिला कार्यालयों के कर्मचारी कलम छोड़ हड़ताल पर चले गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने जो 15 दिन की डेडलाइन दी थी, वो आज 17 अगस्त को खत्म हो रही है, लेकिन पंजाब सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन ने राज्य स्तर पर आज से दो दिवसीय कलम छोड़ और कंप्यूटर बंद हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल का असर पूरे प्रदेश में जिला स्तर से लेकर सब-तहसीलों तक के सरकारी दफ्तरों में साफ दिख रहा है। आम लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी…
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हाई कोर्ट की डेडलाइन आज खत्म, सरकार चुप क्यों?
देखा जाए तो यह हड़ताल कोई अचानक फैसला नहीं है। तीन अगस्त को हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों को महंगाई भत्ता जारी करने का सीधा आदेश दिया था। आज 17 अगस्त है। वो 15 दिन की समय सीमा खत्म हो रही है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि सरकार ने अब तक कोई कागजी कार्रवाई तक नहीं की। न DA जारी हुआ, न कोई स्पष्ट जवाब।
यूनियन के नेताओं का सीधा सवाल है – जब अदालत ने 15 दिन का वक्त दिया था, तो मीटिंग भी उसी अवधि में होनी चाहिए थी। लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय ने 27 अगस्त की मीटिंग तय की है – यानी कोर्ट की डेडलाइन से भी 10 दिन बाद! कर्मचारी इसे सरकार की मंशा पर सवाल मानते हुए सीधे विरोध कर रहे हैं।
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चंडीगढ़ महारैली में पानी की बौछारें, फिर भी नहीं पिघला दिल
समझने वाली बात यह है कि सात अगस्त को चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित दाना मंडी में एक विशाल महारैली हुई थी। इस रैली में पंजाब भर से हजारों सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और मानभत्ता कार्यकर्ता इकट्ठा हुए थे। जब ये लोग विधानसभा की ओर शांतिपूर्वक मार्च कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की तेज बौछारें मारीं। इस दौरान कई कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनर्स की पगड़ियां तक उतर गईं।
हैरान करने वाली बात यह है कि इतने बड़े विरोध और पुलिसिया कार्रवाई के बाद भी सरकार चुप रही। इस घटना के बाद यूनियन ने 27 अगस्त को समूचे पंजाब के कर्मचारियों द्वारा सामूहिक छुट्टी लेकर ‘महाबंद’ का ऐलान कर दिया है। अगर सरकार ने इससे पहले मांगें नहीं मानीं, तो पूरे प्रदेश में प्रशासनिक कामकाज ठप हो सकता है।
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खजाना मंत्री के ‘एंटी स्टेट’ बयान पर भड़के कर्मचारी
अगर गौर करें, तो कर्मचारियों की नाराजगी सिर्फ DA की देरी तक सीमित नहीं है। दरअसल, सात अगस्त को ही खजाना मंत्री हरपाल चीमा ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि “जो लोग प्रदर्शन और रैलियां कर रहे हैं, दरअसल वे एंटी स्टेट ऑर्गेनाइजेशन हैं।”
यह बयान अपने ही कर्मचारियों के लिए! सरकार के लिए काम करने वाले लोगों को ‘राज्य विरोधी’ कहना… यह कर्मचारियों को बेहद अपमानजनक लगा। 13 अगस्त को इस मुद्दे को लेकर पुतला फूंक प्रदर्शन किया गया और खजाना मंत्री के पुतले सार्वजनिक रूप से जलाए गए।
कर्मचारी यूनियन लगातार मांग कर रही है कि या तो मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें या अपना बयान वापस लें। लेकिन अब तक खजाना मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे कर्मचारियों में गुस्सा और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
कौन-कौन से काम हो रहे ठप्प? जानें पूरी लिस्ट
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आज की ‘पेन डाउन’ और ‘कंप्यूटर शटडाउन’ हड़ताल का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
जमीन-जायदाद से जुड़े सभी काम आज पूरी तरह ठप हैं। रजिस्ट्री, इंतकाल, फर्द, जमाबंदी, जमीन के रिकॉर्ड में नाम या विवरण में बदलाव – किसी भी तरह के रेवेन्यू विभाग के काम नहीं हो रहे हैं। फाइलों की प्रोसेसिंग पूरी तरह बंद है।
इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों से मिलने वाले विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। RTO से जुड़े काम, पेंशन से संबंधित कार्य, DC और SDM कार्यालय के सभी काम, राशन से जुड़े मामले और यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग का कामकाज भी प्रभावित हो सकता है, क्योंकि कई विभागों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है।
दिलचस्प यह है कि कर्मचारी दफ्तर में बैठे जरूर नजर आएंगे, सब कुछ सामान्य दिखेगा, लेकिन कलम छोड़ हड़ताल का मतलब होता है – कोई काम नहीं। कंप्यूटर भी बंद रहेंगे।
कल पूरे पंजाब में पुतला दहन, संघर्ष होगा और तेज
राहत की बात तो नहीं, बल्कि चिंता का विषय यह है कि संघर्ष अब और तेज होता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, कल यानी 18 अगस्त को पूरे पंजाब में पुतला फूंक प्रदर्शन और मुजाहरे किए जाएंगे।
सिर्फ मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन ही नहीं, बल्कि साझा मुलाजम मंच (संयुक्त कर्मचारी मंच) का भी इन्हें पूरा समर्थन हासिल है। लुधियाना में मीटिंग करके यह फैसला पहले ही लिया जा चुका है।
यूनियन के नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया या उनकी मांगें नहीं मानीं, तो हड़ताल को और भी विस्तार दिया जा सकता है। इससे साफ होता है कि आने वाले दिनों में आम लोगों को और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें? जानें विस्तार से
यूनियन के जिला अध्यक्ष हरजिंदर सिंह सिद्धू और सतनाम सिंहने बताया कि उनकी मांगें कोई नई नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से लंबित हैं:
प्रमुख मांगें:
- बकाया DA की सभी किश्तें तुरंत जारी करना
- पुरानी पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) को फिर से बहाल करना
- पेंशनर्स के लिए 2.59 का गुणांक लागू करना
- कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी करना
- 17720 नंबर के पत्र को रद्द करना (जो वेतन ढांचे से जुड़ा है)
- सेवा संरचना में पुनर्गठन (Restructuring)
इन मांगों को लेकर कर्मचारी कई बार सरकार से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार वादे होते हैं और अमल नहीं होता।
9 अगस्त की मीटिंग भी रही बेनतीजा
यूनियन की प्रदेश स्तरीय लीडरशिप के अनुसार, 9 अगस्त को सरकार के साथ एक विस्तृत मीटिंग हुई थी। उम्मीद थी कि इस बार कुछ ठोस फैसला होगा। लेकिन वो मीटिंग पूरी तरह बेनतीजा रही – कोई समाधान नहीं, कोई वादा नहीं, कोई टाइमलाइन नहीं।
इसी निराशा के बाद यूनियन ने 17 और 18 अगस्त को कलम छोड़ और कंप्यूटर बंद हड़ताल का फैसला किया। यह संघर्ष कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को लेकर चंडीगढ़ में हुई महारैली के बाद रणनीति के तहत शुरू किया गया है।
सवाल उठता है – सरकार आखिर क्यों टाल रही है? क्या वित्तीय संकट है? या फिर राजनीतिक कारण हैं?
जानें पूरा मामला: DA विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का DA फ्रीज कर दिया था। सरकार का तर्क था कि देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है और खर्च कम करना जरूरी है। इसी तर्ज पर पंजाब सरकार ने भी राज्य कर्मचारियों का DA रोक दिया था।
महामारी खत्म होने के बाद धीरे-धीरे DA जारी होना शुरू हुआ। कुछ किश्तें मिलीं भी, लेकिन कई किश्तें अभी भी बकाया हैं। और यही बकाया किश्तें अब विवाद का कारण बन गई हैं।
कर्मचारियों का सीधा कहना है – महंगाई तो लगातार बढ़ रही है। डीजल, पेट्रोल, राशन, बिजली… सब महंगे हो रहे हैं। लेकिन सैलरी में DA के बिना कोई वृद्धि नहीं हो रही। ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, सम्मान की बात भी है।
हाई कोर्ट ने भी इस मामले में सरकार को साफ आदेश दिया था, लेकिन अमल नहीं हो रहा। यही कर्मचारियों की सबसे बड़ी नाराजगी है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती, जनता परेशान
हैरान करने वाली बात यह है कि जब हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दे दिया है, तो भी सरकार चुप क्यों है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य सरकार के पास शायद वित्तीय संकट हो, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह उनकी समस्या नहीं है। उन्हें उनका हक समय पर मिलना ही चाहिए।
दूसरी ओर, आम जनता परेशान है। जिन्हें जमीन की रजिस्ट्री करानी है, वे अटके हैं। जिन्हें सर्टिफिकेट चाहिए, वे भटक रहे हैं। पेंशन के काम रुके हैं। सरकारी मशीनरी ठप है।
अब देखना यह है कि आज की डेडलाइन खत्म होने के बाद सरकार क्या कदम उठाती है। क्या 27 अगस्त से पहले कोई बड़ा फैसला आएगा? या फिर हड़ताल और तेज होगी और महाबंद हो जाएगा?
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब में DC दफ्तरों के कर्मचारी 17-18 अगस्त को कलम छोड़ और कंप्यूटर शटडाउन हड़ताल पर
• पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की 15 दिन की DA जारी करने की डेडलाइन आज 17 अगस्त को समाप्त
• 7 अगस्त को चंडीगढ़ में हजारों कर्मचारियों की महारैली, पुलिस ने पानी की बौछारें मारीं
• खजाना मंत्री हरपाल चीमा के ‘एंटी स्टेट ऑर्गेनाइजेशन’ बयान पर कर्मचारी नाराज, 13 अगस्त को पुतले फूंके
• 27 अगस्त को पूरे पंजाब में ‘महाबंद’ का ऐलान, प्रशासनिक काम पूरी तरह ठप होने की आशंका
• जमीन रजिस्ट्री, सर्टिफिकेट, RTO, पेंशन, राशन आदि के काम प्रभावित
• मुख्य मांगें: बकाया DA, पुरानी पेंशन स्कीम, 2.59 गुणांक, कच्चे कर्मचारियों का स्थायीकरण













