Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर के दान में कथित गबन के मामले में बड़ी प्रगति हुई है। जांच प्रभारी ने केस के विभिन्न पहलुओं की जांच पूरी कर ली है और अगले महीने के अंत तक अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यह जानकारी अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव ग्रोवर ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
देखा जाए तो यह मामला देशभर में सुर्खियां बटोर चुका है क्योंकि यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि Supreme Court के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने तेजी से काम करते हुए 90 दिनों के भीतर जांच को लगभग पूरा कर लिया है।
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90 दिनों में पूरी होगी जांच, अगले महीने दाखिल होगी चार्जशीट
SSP गौरव ग्रोवर ने स्पष्ट किया कि जांच 90 दिनों में पूरी की जानी है और अगले महीने के अंत तक अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि Special Investigation Team (SIT) कोई अलग जांच नहीं कर रही है, बल्कि एक उच्च-स्तरीय जांच सलाहकार की भूमिका में पुलिस जांच के साथ तालमेल कर रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि SIT के chairman लखनऊ IGP किरण एस हैं, जिनके पास CBI में पांच साल का अनुभव है। उन्होंने आगे कहा कि वे स्थानीय स्तर पर लगातार जांच पर नजर रख रहे हैं और सलाह भी दे रहे हैं।
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अब तक किसी प्रमुख व्यक्ति पर नहीं हुई कानूनी कार्रवाई
मंदिर के सूत्रों ने बताया कि राम मंदिर में दान के कथित गबन में अब तक कोई भी प्रमुख व्यक्ति कानूनी कार्रवाई के घेरे में नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों ने आगे कहा कि इससे पहले SIT ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
अगर गौर करें तो यह मामला काफी संवेदनशील है क्योंकि यह सिर्फ गबन का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान से जुड़ा है।
25 जून को दर्ज हुई थी FIR, आठ आरोपियों को भेजा गया जेल
राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन अयोध्या में 25 जून को दर्ज की गई दान चोरी के केस की FIR के अनुसार, पुलिस ने आठ दोषियों को जेल भेज दिया था। इनमें मंदिर ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय के करीबी सहयोगी टीनू यादव, गिनती प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प और अविनाश शुक्ला शामिल थे।
समझने वाली बात यह है कि पुलिस ने सभी आठ दोषियों को रिमांड पर लिया और उनसे पूछताछ की। यह पूछताछ जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
Supreme Court को दी गई जानकारी: चार सदस्यीय SIT का गठन
Supreme Court को 27 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सूचित किया गया था कि इसने अयोध्या में राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच के लिए IGP किरण एस की अगुवाई में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
देखा जाए तो शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को SIT के पांचवें सदस्य के रूप में एक forensic auditor को शामिल करने के लिए कहा था, जो दो हफ्तों के अंदर अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी।
जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है। यह करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ा मामला है जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा से दान दिया था। इसलिए जांच में पूरी पारदर्शिता और तेजी बरती जा रही है।
SIT की नियुक्ति और Supreme Court की निगरानी यह सुनिश्चित करती है कि जांच निष्पक्ष और गहन हो। अगले महीने चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही साफ होगा कि वास्तव में किन-किन लोगों की भूमिका संदिग्ध है और कितना दान गबन हुआ था।
ट्रस्ट की छवि और भविष्य की चुनौतियां
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस मामले से प्रभावित हो सकती है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस संस्था को देशभर के श्रद्धालुओं का विश्वास हासिल था, उसी में आर्थिक अनियमितता के आरोप लगे।
अब यह देखना होगा कि चार्जशीट में क्या खुलासे होते हैं और क्या ट्रस्ट के किसी बड़े पदाधिकारी का नाम सामने आता है या नहीं।
मुख्य बातें (Key Points)
- अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले की जांच लगभग पूरी, अगले महीने चार्जशीट दाखिल होगी
- SSP गौरव ग्रोवर ने बताया कि 90 दिनों में जांच पूरी करने का लक्ष्य
- IGP किरण एस की अगुवाई में चार सदस्यीय SIT कर रही है जांच
- 25 जून को FIR दर्ज, आठ आरोपियों को भेजा गया जेल—टीनू यादव, सुभाष श्रीवास्तव आदि शामिल
- Supreme Court के निर्देश पर forensic auditor को भी SIT में शामिल किया गया













