Supreme Court Biometric Attendance PIL: देश भर के स्कूलों में ‘डमी’ शैक्षिक संस्थानों की समस्या को खत्म करने के लिए विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक आधारित हाजिरी सिस्टम अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। Justice P Narasimha और Justice Alok Aradhe की पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट में जाने का निर्देश दिया है।
देखा जाए तो यह फैसला उन हजारों छात्रों और अभिभावकों के लिए निराशाजनक हो सकता है जो मानते हैं कि बायोमेट्रिक हाजिरी से नकली स्कूलों पर अंकुश लगेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह संविधान की धारा 32 के तहत दायर इस याचिका पर विचार करने को तैयार नहीं है।
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क्या थी याचिका की मांग? डमी स्कूलों पर लगाम की जरूरत
एडवोकेट N.K. Goswami ने यह जनहित याचिका दायर की थी। उनकी मांग थी कि केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि सभी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम अनिवार्य किया जाए।
समझने वाली बात यह है कि भारत में ‘डमी स्कूल’ की समस्या काफी गंभीर है। कई छात्र स्कूल में केवल नाम के लिए एडमिशन लेते हैं और पूरे साल कोचिंग संस्थानों में पढ़ते हैं। परीक्षा के समय स्कूल से प्रमाण पत्र ले लेते हैं। यह व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि अगर बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य हो, तो हर छात्र को रोज स्कूल आना होगा। इससे डमी एडमिशन पर रोक लगेगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
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कोचिंग सेंटरों पर भी लगाम की मांग
याचिका में केवल बायोमेट्रिक हाजिरी तक बात सीमित नहीं थी। एडवोकेट गोस्वामी ने स्कूली बच्चों के लिए कोचिंग के घंटों की कानूनी सीमा तय करने की भी मांग की थी। साथ ही कोचिंग सेंटरों के लिए एक अनिवार्य Code of Conduct बनाने की भी अपील की गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि याचिका में कोचिंग संस्थानों द्वारा सफलता के आंकड़ों में हेरफेर करने और भ्रामक विज्ञापनों में टॉपर्स की तस्वीरों का दुरुपयोग करने पर रोक लगाने की मांग भी शामिल थी।
यह मुद्दा हाल के वर्षों में काफी चर्चा में रहा है। कई कोचिंग संस्थान एक ही छात्र की तस्वीर कई जगह इस्तेमाल करते हैं और झूठे दावे करते हैं। इससे माता-पिता भ्रमित होते हैं और गलत संस्थानों में मोटी रकम खर्च कर देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की सुनवाई से इनकार?
बेंच ने याचिकाकर्ता से स्पष्ट कहा, “हम आपको हाईकोर्ट तक पहुंचने की आजादी देते हैं।” इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला अपने पास रखना उचित नहीं समझा।
आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में सुनवाई से इनकार करता है जो:
- पहले हाईकोर्ट में नहीं गए हों
- राज्य-स्तरीय मुद्दे हों
- जिनमें तथ्यों की जांच की जरूरत हो
चूंकि शिक्षा राज्य सूची और समवर्ती सूची दोनों में आता है, इसलिए कोर्ट ने माना कि पहले राज्य स्तर पर इसकी सुनवाई होनी चाहिए।
डमी स्कूल की समस्या: कितनी गंभीर है यह मुद्दा?
भारत में, विशेष रूप से दिल्ली, कोटा, पटना जैसे कोचिंग हब शहरों में डमी स्कूल की संस्कृति काफी फैली हुई है। छात्र केवल परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं, लेकिन पूरे साल कोचिंग में पढ़ते हैं।
इसके कई नुकसान हैं:
- छात्रों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता
- स्कूली शिक्षा की अहमियत खत्म होती है
- खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों से वंचित रह जाते हैं
- सामाजिक कौशल विकसित नहीं होता
हालांकि कई लोग यह भी मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव के कारण छात्रों के पास कोई विकल्प नहीं रहता।
बायोमेट्रिक सिस्टम: क्या यही है समाधान?
बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम में छात्रों की उपस्थिति फिंगरप्रिंट, रेटिना स्कैन या चेहरे की पहचान से दर्ज की जाती है। इसके कई फायदे हो सकते हैं:
- प्रॉक्सी हाजिरी असंभव हो जाएगी
- रियल-टाइम डेटा अभिभावकों को मिलेगा
- स्कूल प्रशासन में पारदर्शिता आएगी
- डमी एडमिशन पर अंकुश लगेगा
लेकिन इसमें चुनौतियां भी हैं:
- लागत बहुत अधिक है
- ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक की कमी
- डेटा प्राइवेसी की चिंता
- छोटे बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की नैतिकता
अब क्या होगा? हाईकोर्ट का रास्ता खुला
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट में जाना होगा। वे दिल्ली हाईकोर्ट या किसी अन्य राज्य की हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर कर सकते हैं।
अगर हाईकोर्ट इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाता है और कोई निर्देश जारी करता है, तभी यह मामला आगे बढ़ेगा। वरना यह याचिका यहीं समाप्त हो सकती है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है: क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुधार की जरूरत है?
डमी स्कूल की समस्या केवल कानून या तकनीक से नहीं सुलझेगी। इसके लिए:
- प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव
- स्कूली शिक्षा को प्रासंगिक बनाना
- कोचिंग संस्कृति पर अंकुश
- शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार
जरूरी है कि सरकार, शिक्षाविद और अभिभावक मिलकर इस समस्या का समाधान खोजें।
मुख्य बातें (Key Points)
- सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की PIL पर सुनवाई से इनकार किया
- Justice P Narasimha और Justice Alok Aradhe की पीठ ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की छूट दी
- एडवोकेट N.K. Goswami ने डमी स्कूलों की समस्या को खत्म करने के लिए याचिका दायर की थी
- याचिका में कोचिंग सेंटरों के लिए Code of Conduct और घंटों की सीमा तय करने की मांग भी थी
- कोचिंग संस्थानों द्वारा भ्रामक विज्ञापनों पर रोक की अपील शामिल थी
- भारत में डमी स्कूल की समस्या खासकर कोचिंग हब शहरों में गंभीर है
- बायोमेट्रिक सिस्टम के फायदे हैं लेकिन लागत और प्राइवेसी की चिंताएं भी हैं













