Parliament Monsoon Session 2026 : केंद्र सरकार ने 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून इजलास के लिए अपना विधायी एजेंडा पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। PTI के मुताबिक, सरकार इस बार लोकसभा में 7 महत्वपूर्ण बिल पेश करने जा रही है। इनमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को रोकने और विदेशी फंडिंग कानून में संशोधन से जुड़े अहम विधेयक शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार द्वारा जारी की गई बिलों की इस अस्थायी सूची में किसी भी संविधान संशोधन बिल, जैसे कि निर्वाचन क्षेत्रों की पुनर्सीमा या महिला आरक्षण संशोधन का कोई जिक्र नहीं किया गया, जिस कारण राजनीतिक हलकों में चर्चा छिड़ गई है।
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25 दिन का लंबा सत्र, 19 बैठकें होंगी
13 अगस्त तक चलने वाले इस 25 दिनों के लंबे मानसून इजलास के दौरान कुल 19 बैठकें होंगी, जिसके काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। मुख्य विरोधी दल कांग्रेस समेत समूचा ‘इंडिया’ गठजोड़ NEET-UG पेपर लीक मामले, सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद, E20 ईंधन नीति और मौजूदा विदेश नीति जैसे दहकते मुद्दों पर मोदी सरकार को संसद के दोनों सदनों में घेरने की बड़ी रणनीति तैयार कर रहा है।
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सरकार के 7 प्रमुख बिल: एक नजर में
1. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि विदेशी फंडों की वर्तौं पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। रजिस्ट्रेशन खत्म होने पर संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण का प्रबंध होगा। इसके लिए एक अलग प्राधिकरण बनाई जाएगी जो FCRA उल्लंघन के मामलों की निगरानी करेगी।
2. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026
देखा जाए तो यह बिल एक बड़ा कदम है। ‘जन गण मन’ (राष्ट्रगान) की तरह ‘वंदे मातरम’ को भी कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इसका अपमान करना, निरादर करना या इसके गायन में रुकावट डालना अपराध माना जाएगा। यह प्रावधान राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है।
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3. विकसित भारत उच्च शिक्षा संस्थान बिल, 2025
समझने वाली बात यह है कि UGC, AICTE और NCTE की जगह एक साझी रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई जाएगी। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (INI) भी इसके दायरे में आएंगे। इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एकरूपता और बेहतर नियमन की उम्मीद है।
4. आयकर (संशोधन) बिल, 2026
विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना इस बिल का मुख्य उद्देश्य है। सरकारी ऋण बाजार को मजबूत करने की तैयारी है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा।
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5. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी। इस संबंधी पहले जारी किए गए अध्यादेश को अब कानूनी रूप दिया जाएगा। मामलों के बढ़ते बोझ को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
6. जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) बिल, 2026
अगर गौर करें तो 2 साल बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु की रजिस्ट्रेशन सिर्फ न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेशों से ही हो सकेगी। इस प्रक्रिया में से DM/SDM की मंजूरी वाला प्रबंध खत्म कर दिया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी सख्ती आएगी।
7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन बिल, 2026
समय पर भुगतान न होने के झगड़ों का तेजी से निपटारा किया जाएगा। राज्यों में MSEFC (Micro and Small Enterprises Facilitation Council) की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। यह छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
पुराने और नए बिलों का मिश्रण
सत्र में रखे जाने वाले 7 बिलों में से 2 बिल पुराने हैं, जबकि 3 बिल पहली बार सदन में पेश किए जाएंगे। पुराने बिलों में ‘विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम’ (FCRA) और ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल’ शामिल हैं, जो पहले ही संसद के विचाराधीन थे।
इसके अलावा, आयकर संशोधन बिल-2026 और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी बिल पहले जारी किए गए सरकारी अध्यादेशों की जगह लेंगे। जबकि जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन, वंदे मातरम के निरादर पर रोक और MSME क्षेत्र से जुड़े तीन बिल नए सिरे से लाए जा रहे हैं।
NDA और विपक्ष दोनों तैयार
इस अहम इजलास की शुरुआत से पहले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ (NDA) की आज दिल्ली के कर्तव्य भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, शिवराज सिंह चौहान और लालन सिंह सहित NDA के कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की और सरकार पक्षीय रणनीति पर चर्चा की।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी कमर कस ली है और इजलास के पहले दिन यानी 20 जुलाई को लोकसभा और राज्यसभा में विरोधी नेताओं की साझी बैठक होगी, जहां सरकार के विधायी एजेंडे का मुकाबला करने के लिए साझा मोर्चा तैयार किया जाएगा।
क्या है मुद्दा
चिंता का विषय यह है कि जिन मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, वे बेहद संवेदनशील हैं। NEET-UG पेपर लीक मामले में लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है। सरकारी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की खबरें युवाओं में गुस्सा पैदा कर रही हैं। अयोध्या राम मंदिर दान विवाद ने धार्मिक भावनाओं को भी छुआ है।
| बिल का नाम | मुख्य उद्देश्य | श्रेणी |
|---|---|---|
| FCRA संशोधन बिल | विदेशी फंडिंग पर सख्त नियंत्रण | पुराना (संशोधित) |
| राष्ट्रीय सम्मान बिल | वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा | नया |
| उच्च शिक्षा बिल | UGC/AICTE का विलय | पुराना (लंबित) |
| आयकर संशोधन | विदेशी निवेश प्रोत्साहन | अध्यादेश का प्रतिस्थापन |
| SC न्यायाधीश बिल | 33 से 37 न्यायाधीश | अध्यादेश का प्रतिस्थापन |
| जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन | प्रक्रिया में कड़ाई | नया |
| MSME विकास बिल | भुगतान विवाद निपटान | नया |
क्या कहते हैं विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र सरकार की विधायी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। वंदे मातरम बिल के जरिए सरकार राष्ट्रवाद के एजेंडे को मजबूत करना चाहती है। वहीं, FCRA में संशोधन से NGOs पर सरकार की पकड़ और मजबूत होगी।
उच्च शिक्षा में सुधार और MSME सेक्टर को मजबूती देने के कदम सकारात्मक हैं, लेकिन विपक्ष का तर्क है कि असली मुद्दे – बेरोजगारी, महंगाई, परीक्षा घोटाले – से सरकार का ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा, कुल 19 बैठकें होंगी
- सरकार लोकसभा में 7 महत्वपूर्ण बिल पेश करेगी
- ‘वंदे मातरम’ के अपमान को अपराध घोषित करने वाला बिल आएगा
- FCRA में संशोधन से विदेशी फंडिंग पर सख्ती बढ़ेगी
- UGC, AICTE, NCTE का विलय कर एक नियामक बनाया जाएगा
- सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़कर 37 होगी
- विपक्ष NEET घोटाले, राम मंदिर दान विवाद, E20 ईंधन पर सरकार को घेरेगा













