Nitin Gadkari On Ethanol एक बड़ा बयान चर्चा में है। क्या आपकी गाड़ी E20 पेट्रोल से खराब हो सकती है? क्या वाकई इसकी वजह से माइलेज कम हो रही है? और अगर आपको एथेनॉल मिला पेट्रोल नहीं चाहिए, तो क्या कोई विकल्प है? इन सभी सवालों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने साफ कहा है कि अगर कोई व्यक्ति E20 पेट्रोल नहीं लेना चाहता, तो वह 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीद सकता है। लेकिन इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
🔍 यह भी पढ़ें- बड़ी खबर! BJP President Nitin Nabin का Punjab दौरा, 20-22 जून तक रहेंगे प्रदेश में
‘आखिर विवाद क्यों?’
देखा जाए तो पिछले कुछ समय से देश भर में E20 पेट्रोल को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। कई वाहन मालिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी की माइलेज पहले से कम हो गई है। कुछ लोगों ने इंजन की परफॉर्मेंस पर भी सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर कई तरह के दावे देखने को मिल रहे हैं। हालांकि सरकार इन आशंकाओं को खारिज करती रही है। और बस यहीं से शुरू हुआ असली विवाद।
🔍 यह भी पढ़ें- Kejriwal Nitin Nabin Row बढ़ी, BJP ने किया तीखा पलटवार
‘शुद्ध पेट्रोल का विकल्प, पर महंगा’
इसी विवाद के बीच गडकरी ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा कि अगर किसी को एथेनॉल मिला पेट्रोल पसंद नहीं है, तो वह पूरी तरह शुद्ध यानी 100% पेट्रोल खरीद सकता है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शुद्ध पेट्रोल की कीमत E20 पेट्रोल से अधिक होगी।
समझने वाली बात यह है कि विकल्प मौजूद हो सकता है, लेकिन उसकी कीमत भी ज्यादा होगी।
🔍 यह भी पढ़ें- 100% Ethanol Blending पर Nitin Gadkari का बड़ा ऐलान, गाड़ियों पर खतरा!
‘क्या E10 वापस आएगा?’
जब गडकरी से पूछा गया कि क्या सरकार दोबारा E10 यानी 10% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराएगी, तो उन्होंने कहा कि इसकी संभावना बेहद कम है। उनका कहना था कि देश पहले ही 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है। अब लगभग पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध है। ऐसे में पीछे लौटना व्यवहारिक नहीं होगा।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल उपलब्ध कराने का अंतिम फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि सड़क परिवहन मंत्रालय के।
‘क्या E20 वाहनों के लिए सुरक्षित है?’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि E20 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है: क्या यह वास्तव में वाहनों के लिए सुरक्षित है? इस पर गडकरी ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि E20 पेट्रोल को बाजार में उतारने से पहले व्यापक स्तर पर टेस्टिंग की गई।
उनके मुताबिक जिन वाहनों को E10 पर चलने के लिए तैयार किया गया है, वे E20 पर भी सुरक्षित तरीके से चल सकते हैं। गडकरी ने दावा किया कि अब तक ऐसा एक भी प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है जिसमें सिर्फ E20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन खराब हुआ हो।
‘गडकरी का राजनीतिक हमला’
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कहा कि इस विषय पर फैलाई जा रही कई बातें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उनका आरोप था कि E20 को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसमें राजनीतिक कारण भी शामिल हैं। सरकार को घेरने के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने भी E20 ईंधन के उपयोग पर सहमति दी है।
‘फ्लेक्स फ्यूल का भविष्य’
गडकरी ने भविष्य की ईंधन नीति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल (FFV) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। ये ऐसे वाहन होते हैं जो अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर E85 यानी 85% एथेनॉल मिश्रित ईंधन भी उपलब्ध कराया जाने लगा है।
‘निजी हितों के आरोपों पर सफाई’
अगर गौर करें तो गडकरी ने अपने ऊपर लगे निजी हितों के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे केवल एथेनॉल ही नहीं, बल्कि हर तरह के वैकल्पिक ईंधन के समर्थक हैं। चाहे वह इलेक्ट्रिक वाहन हो, हाइड्रोजन, मेथेनॉल हो या अन्य जैव ईंधन।
गडकरी ने अपने परिवार के व्यवसाय पर सफाई देते हुए कहा कि उनके परिवार के पास पहले से चीनी मिल है, लेकिन उसका संचालन उनके बेटे करते हैं। एथेनॉल से होने वाली आय कुल कारोबार का करीब 10% ही है। पूरे देश के एथेनॉल उद्योग में उनके परिवार की हिस्सेदारी आधे से भी कम है। उनके व्यवसाय पर करीब ₹1600 करोड़ का कर्ज है।
‘तेल आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य’
उम्मीद की किरण यह है कि गडकरी ने याद दिलाया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। हर साल भारी विदेशी मुद्रा तेल आयात पर खर्च होती है। अगर एथेनॉल, बायोफ्यूल और वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ता है, तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि एथेनॉल केवल गन्ने से नहीं बनता। देश में मक्के, धान, बांस और पराली से भी एथेनॉल उत्पादन हो रहा है। हरियाणा के पानीपत में पराली से एथेनॉल बनाया जा रहा है, जबकि असम में बांस से।
‘ब्राजील मॉडल का उदाहरण’
गडकरी ने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कई दशकों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग हो रहा है और वहां इस तरह की समस्याएं सामने नहीं आईं। भारत भी धीरे-धीरे उसी दिशा में बढ़ रहा है।
‘जानें पूरा मामला’
भारत सरकार ने 2025 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था, जिसे तय समय से पहले हासिल कर लिया गया। लेकिन इसके बाद वाहन मालिकों की तरफ से माइलेज कम होने और इंजन की परफॉर्मेंस बिगड़ने की शिकायतें आने लगीं। इसी विवाद के बीच गडकरी का यह बयान आया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- E20 नहीं चाहिए तो 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प मिलेगा, पर कीमत ज्यादा।
- E10 वापस लौटने की संभावना बेहद कम।
- गडकरी का दावा: E20 वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित।
- फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल भविष्य की दिशा।
- गडकरी ने निजी हितों के आरोपों को खारिज किया।













