Ethanol Scam Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के बालाघाट और शिवनी जिले में एथेनॉल के नाम पर चावल की हेराफेरी का मामला सामने आया है। इस मामले में आठ राइस मिलरों को नोटिस थमाया गया है। देखा जाए तो 13 मिल संचालकों पर FIR दर्ज कराने की तैयारी है। जांच अधिकारियों ने आशंका जताई है कि 17 जिलों के 22 एथेनॉल प्लांट्स का करीब 1100 करोड़ रुपये का चावल खपाया गया है।
बालाघाट में एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी चावल की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। समझने वाली बात है कि बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने FCI भोपाल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक को पत्र लिखकर पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही एथेनॉल नीति के तहत FCI के अन्य गोदामों से जारी किए गए चावल का भी भौतिक सत्यापन कराने को कहा गया है।
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FCI ने भी शुरू की जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए FCI ने भी आंतरिक स्तर पर एथेनॉल प्लांट्स को आवंटित चावल के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि सूत्रों के अनुसार छिंदवाड़ा के बारे स्थित ABJ Agrico Private Limited के एथेनॉल प्लांट और पारसिनी की संचेती राइस मिल के साथ होने वाले सभी लेनदेन फिलहाल रोक दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य शासन को हुए आर्थिक नुकसान की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
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13 लोगों पर FIR की तैयारी
इस मामले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक 13 संदिग्ध लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि जांच की आंच बड़े नामों तक पहुंचने की आशंका के बीच कुछ प्रभावशाली लोग कार्रवाई से बचने के लिए भोपाल और दिल्ली में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
नीति में किया गया संशोधन
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने 8 मई को एथेनॉल नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया था। माना जा रहा है कि चावल की संभावित हेराफेरी रोकने के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया। अगर गौर करें तो पहले एथेनॉल प्लांट संचालक FCI के किसी भी डिपो से चावल उठा सकते थे।
लेकिन अब उन्हें निर्धारित संभाग के चयनित डिपो से ही चावल मिलेगा। FCI संबंधित संभाग में उपलब्धता के आधार पर गोदाम तय करेगा, जिससे अवैध गठजोड़ और हेराफेरी की संभावनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
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कैसे खुला पूरा रैकेट
गौर करने वाली बात है कि 3 जून को बालाघाट में 242 क्विंटल सरकारी चावल से भरा ट्रक पकड़े जाने के बाद पूरे रैकेट का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया कि एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए सरकारी चावल को बीच रास्ते राइस मिल में उतारकर नई पैकिंग के साथ दोबारा सरकारी खरीद प्रणाली में बेचा जा रहा था।
दिलचस्प बात यह है कि इस प्रक्रिया में कीमत के अंतर और कस्टम मिलिंग के खर्च का फायदा उठाकर यह हेराफेरी की जा रही थी।
मुख्य आरोपी अभी भी फरार
पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़कर आगे बढ़ रही है। पिछले 40 दिनों से फरार राइस मिलर सौरभ संचेती और उसके पिता गंभीर संचेती का अब तक सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस का मानना है कि उनकी गिरफ्तारी से कई परतें खुलेंगी।
SIT ने इस मामले में ट्रक चालक दुर्गेश शेंड, एथेनॉल प्लांट के एजेंट राहुल प्रताप, सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव और शिवनी के ट्रांसपोर्टर उबेद खान को गिरफ्तार किया है।
कैसे हो रही थी हेराफेरी
एथेनॉल प्लांट संचालक सरकार से ₹2320 प्रति क्विंटल की दर से फोर्टिफाइड चावल प्राप्त करते हैं। लेकिन इस चावल से एथेनॉल बनाने की बजाय वे इसे ₹2380 प्रति क्विंटल की दर से राइस मिलों को बेच देते हैं।
राइस मिलर इसी चावल को नई पैकिंग में कस्टम मिलिंग के चावल के रूप में सरकारी गोदामों में जमा करा देते हैं। इससे राइस मिलरों को धान से चावल तैयार करने का खर्चा बच जाता है।
50 से अधिक लोगों से पूछताछ
SIT इस हेराफेरी के तह तक जाने के लिए 50 से अधिक ट्रक मालिक, ट्रक चालक, राइस मिलर और प्लांट प्रबंधन के लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में साक्ष्य मिले हैं कि संचेती राइस मिल के अलावा बालाघाट और शिवनी की अन्य राइस मिलों में भी सरकारी चावल खाली कराया गया था। इसमें ट्रांसपोर्टर की मिलीभगत भी सामने आई है।
फिलहाल इसमें जांच जारी है। यह अपने आप में चौंकाने वाली खबर है कि किस तरह सरकारी योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था।
मुख्य बातें (Key Points)
- बालाघाट-शिवनी में एथेनॉल घोटाला सामने आया
- 17 जिलों के 22 प्लांट्स में 1100 करोड़ का चावल खपाया गया
- 8 राइस मिलरों को नोटिस, 13 पर FIR की तैयारी
- 242 क्विंटल चावल से भरा ट्रक पकड़ा गया
- मुख्य आरोपी सौरभ और गंभीर संचेती फरार
- FCI ने एथेनॉल प्लांट्स के साथ लेनदेन रोके













