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The News Air - Breaking News - ₹7,100 करोड़ का Semiconductor Masterstroke: क्या India बनेगा अगला Taiwan?

₹7,100 करोड़ का Semiconductor Masterstroke: क्या India बनेगा अगला Taiwan?

भारत सरकार ने 2027 में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए ₹7,100 करोड़ के प्रोत्साहन का ऐलान किया, लक्ष्य है ₹15,000 करोड़ का निवेश और 4,700 रोजगार

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 25 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, बिज़नेस
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Semiconductor Masterstroke
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India Semiconductor Mission 2.0 के तहत भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए वित्त वर्ष 2027 में सेमीकंडक्टर सेक्टर के विकास के लिए ₹7,100 करोड़ के प्रोत्साहन की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य कुल ₹15,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना और लगभग 4,700 लोगों को रोजगार देना है। देखा जाए तो यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है।

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पूरी दुनिया एक छोटी सी चिप के पीछे क्यों भाग रही है?

आज की डिजिटल दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप्स किसी भी देश की तकनीकी संप्रभुता की रीढ़ हैं। स्मार्टफोन से लेकर मिसाइल सिस्टम तक, एयर कंडीशनर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक – हर जगह इन छोटी चिप्स की जरूरत है। और दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे साइकिल में कोई भी देश पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है।

हर देश किसी न किसी चरण में एक-दूसरे पर निर्भर है। कोई डिजाइन में माहिर है, तो कोई मैन्युफैक्चरिंग में। कोई उपकरण बनाता है, तो कोई पैकेजिंग करता है। यही वजह है कि जब कोविड के दौरान Taiwan में उत्पादन थमा, तो पूरी दुनिया में चिप की कमी हो गई। कारों की बिक्री रुक गई, इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम आसमान छू गए।

भारत ने इस वैश्विक निर्भरता को समझा है। और अब देश इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।

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भारत के सेमीकंडक्टर सपने का सफर – पहले असफल, अब सफल

अगर गौर करें तो भारत का सेमीकंडक्टर सफर कोई नया नहीं है। दशकों पहले भी भारत ने इस दिशा में कोशिश की थी। एक फैक्ट्री भी स्थापित की गई। लेकिन उसमें रहस्यमय तरीके से आग लग गई और वह प्रयास विफल हो गया। उसके बाद के प्रयास भी उलझे रहे।

लेकिन 2021 में India Semiconductor Mission की शुरुआत के बाद स्थितियां बदल गईं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ एक व्यापक योजना बनाई। और अब 2025-26 में India Semiconductor Mission 2.0 लॉन्च किया गया है।

समझने वाली बात यह है कि इस बार भारत अकेले नहीं चल रहा। Taiwan की तीसरी सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) गुजरात में भारत का पहला फ्रंट-एंड फैब प्लांट स्थापित कर रही है। नीदरलैंड की ASML – जो EUV लिथोग्राफी मशीनों में दुनिया की एकमात्र कंपनी है – ने Tata Electronics के साथ साझेदारी की है।

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₹7,100 करोड़ का प्रोत्साहन किस तरह बंटेगा?

सरकार की योजना बेहद स्पष्ट है। कुल ₹7,100 करोड़ के प्रोत्साहन को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:

सेक्टरसरकारी प्रोत्साहनअपेक्षित निवेशरोजगार सृजनमुख्य फोकस
सेमीकंडक्टर फैब यूनिट₹3,000 करोड़₹4,000 करोड़1,500 लोगवेफर निर्माण, चिप फैब्रिकेशन
अन्य सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाएं₹4,100 करोड़₹11,000 करोड़3,200 लोगयोगिक अर्धचालक, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर्स, ATMP
कुल योग₹7,100 करोड़₹15,000 करोड़4,700 लोगसंपूर्ण इकोसिस्टम

ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार सिर्फ ₹7,100 करोड़ दे रही है, लेकिन उम्मीद है कि प्राइवेट सेक्टर मिलकर कुल निवेश को ₹15,000 करोड़ तक पहुंचाएगा। यह रणनीति बेहद समझदारी भरी है – सरकार प्रोत्साहन दे, लेकिन असली काम निजी क्षेत्र करे।

कौन-कौन से क्षेत्रों पर होगा फोकस?

अन्य सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाओं में निवेश किए जाने वाले ₹4,100 करोड़ का इस्तेमाल कुछ बेहद खास और जरूरी क्षेत्रों में होगा:

योगिक अर्धचालक (Compound Semiconductors): ये विशेष चिप्स हैं जो गैलियम नाइट्राइड (GaN) और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) जैसी सामग्रियों से बनती हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, 5G नेटवर्क और रक्षा उपकरणों में होता है।

सिलिकॉन फोटोनिक्स: यह भविष्य की तकनीक है जहां डेटा को इलेक्ट्रिकल सिग्नल के बजाय प्रकाश के जरिए ट्रांसफर किया जाता है। तेज इंटरनेट और डेटा सेंटर्स के लिए यह क्रांतिकारी है।

सेंसर्स और असतत अर्धचालक: हर आधुनिक डिवाइस में सेंसर चाहिए – कैमरा से लेकर फिंगरप्रिंट स्कैनर तक।

ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging): चिप बनने के बाद उसे असेंबल करना, टेस्ट करना और पैक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test): यह बाहरी कंपनियों को परीक्षण और पैकेजिंग की सुविधा देता है।

और यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत सिर्फ एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में मजबूती चाहता है।

दुनिया में सेमीकंडक्टर का राज कौन चलाता है?

अगर हम वैश्विक परिदृश्य देखें तो तस्वीर बेहद दिलचस्प है:

Taiwan – निर्विवाद चैंपियन: TSMC (Taiwan Semiconductor Manufacturing Company) दुनिया की 60-65% फाउंड्री मार्केट शेयर पर काबिज है। यानी दुनिया में जितनी चिप्स बनती हैं, उनमें से आधे से ज्यादा ताइवान में बनती हैं। यही वजह है कि जब चीन ताइवान को लेकर आक्रामक होता है, तो पूरी दुनिया चिंतित हो जाती है।

South Korea – मेमोरी का बादशाह: Samsung और SK Hynix मेमोरी चिप्स और एडवांस लॉजिक में अग्रणी हैं। आपके फोन की RAM और स्टोरेज शायद यहीं से आई हो।

United States – डिजाइन का गुरु: Intel, Global Foundries, Micron जैसी कंपनियां चिप डिजाइन और EDA सॉफ्टवेयर में सबसे आगे हैं। दुनिया की ज्यादातर चिप्स की डिजाइन अमेरिका में होती है।

China – बड़ी क्षमता, लेकिन सीमित तकनीक: SMIC और Huawei तेजी से उभर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों ने उन्हें एडवांस चिप्स बनाने से रोक दिया है।

Netherlands – मशीनों का राजा: ASML दुनिया की एकमात्र कंपनी है जो EUV (Extreme Ultraviolet) लिथोग्राफी मशीन बनाती है। इसके बिना एडवांस चिप बनाना असंभव है।

Japan – उपकरण और सामग्री: Tokyo Electron, Shin-Etsu Chemical जैसी कंपनियां सेमीकंडक्टर उपकरण और वेफर बनाती हैं।

देशविशेषज्ञताप्रमुख कंपनियांबाजार हिस्सेदारी
Taiwanमैन्युफैक्चरिंगTSMC, UMC60-65% (फाउंड्री)
South Koreaमेमोरी चिप्सSamsung, SK Hynix10-12%
USAचिप डिजाइनIntel, Qualcommडिजाइन में 80%+
Chinaबड़े पैमाने पर उत्पादनSMIC, Huawei5-6%
NetherlandsEUV मशीनेंASML100% (EUV में)
Japanउपकरण, सामग्रीTokyo Electronउपकरणों में 30%+
5nm, 3nm, 2nm – क्या होती हैं ये एडवांस चिप्स?

जब हम 5 नैनोमीटर या 3 नैनोमीटर की बात करते हैं, तो यह चिप के अंदर ट्रांजिस्टर की साइज को दर्शाता है। जितनी छोटी साइज, उतना ज्यादा पावरफुल और एनर्जी एफिशिएंट चिप।

अभी केवल Taiwan और South Korea ही 5nm, 3nm और 2nm की चिप्स बना पा रहे हैं। इन चिप्स की डिमांड आसमान छू रही है क्योंकि इनका इस्तेमाल होता है:

  • AI सिस्टम्स में (ChatGPT जैसे मॉडल्स चलाने के लिए)
  • डेटा सेंटर्स में
  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में
  • एडवांस स्मार्टफोन्स में (iPhone, Samsung फ्लैगशिप)
  • मिलिट्री और एयरोस्पेस सिस्टम्स में

और समझने वाली बात यह है कि भारत अभी इस लेवल पर नहीं है। हमारा फोकस फिलहाल 28nm और 40nm जैसे मैच्योर नोड्स पर है, जो ऑटोमोटिव, IoT और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन्स के लिए पर्याप्त हैं।

India Semiconductor Mission 1.0 से 2.0 तक का सफर

2021 में जब पहली बार India Semiconductor Mission लॉन्च किया गया, तो उद्देश्य था एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना। ₹76,000 करोड़ का बजट रखा गया।

लेकिन 2025-26 में India Semiconductor Mission 2.0 ने उद्देश्यों को और व्यापक बना दिया:

✓ सेमीकंडक्टर उपकरणों का घरेलू निर्माण
✓ सेमीकंडक्टर ग्रेड रसायन एवं गैसों का उत्पादन
✓ भारतीय चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा को बढ़ावा
✓ रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्रोत्साहन
✓ कुशल मानव संसाधन का विकास
✓ आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना

देखा जाए तो यह सिर्फ चिप बनाने की योजना नहीं है। यह एक संपूर्ण इकोसिस्टम खड़ा करने की योजना है – जहां डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग से लेकर पैकेजिंग तक सब कुछ भारत में हो।

क्या America भारत को अगला Taiwan बनाना चाहता है?

यह सवाल बेहद दिलचस्प है और जियोपॉलिटिक्स की समझ के लिए जरूरी भी। हां, अमेरिका चाहता है कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर में मजबूत बने। लेकिन इसके पीछे का कारण समझना जरूरी है।

China Plus One Strategy: कोविड के बाद दुनिया ने समझा कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक है। अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियां अब एक वैकल्पिक विनिर्माण हब ढूंढ रही हैं। और भारत उस रोल के लिए सबसे उपयुक्त है।

Taiwan Tension: ताइवान पर चीन का लगातार दबाव है। अगर कल चीन ताइवान पर हमला करता है, तो दुनिया की 60% चिप सप्लाई रुक जाएगी। इसलिए अमेरिका चाहता है कि सप्लाई चेन में विविधता आए।

IPEF and Quad: अमेरिका ने भारत को Indo-Pacific Economic Framework और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन वाले समूहों में शामिल किया है। यह भारत को साझेदार के रूप में देखने का संकेत है, प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं।

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लेकिन ध्यान रखिए – भारत अमेरिका का गुलाम नहीं बन रहा। भारत अपने राष्ट्रीय हित में यह कदम उठा रहा है। आत्मनिर्भरता का मतलब यह नहीं कि दुनिया से कट जाओ। इसका मतलब है कि किसी एक देश पर निर्भर न रहो।

भारत की चुनौतियां क्या हैं?

हकीकत यह है कि भारत अभी शैशवावस्था में है। हम अभी उन देशों में नहीं गिने जाते जो वैश्विक सेमीकंडक्टर चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चुनौतियां:

  • तकनीकी अंतर: हम अभी 5nm, 3nm चिप्स नहीं बना सकते
  • विशेषज्ञता की कमी: भारत में सेमीकंडक्टर इंजीनियर्स की संख्या कम है
  • भारी निवेश: एक फैब प्लांट में हजारों करोड़ का निवेश चाहिए
  • समय: पहली फैक्ट्री को चालू होने में 3-5 साल लगेंगे
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: TSMC और Samsung से मुकाबला आसान नहीं

लेकिन भारत ने फैसला कर लिया है। और जब भारत कोई फैसला कर लेता है, तो उसे पूरा करके दिखाता है – चाहे वह मंगलयान हो, UPI हो या डिजिटल इंडिया।


मुख्य बातें (Key Points)

• भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए ₹7,100 करोड़ के प्रोत्साहन की घोषणा की

• लक्ष्य है कुल ₹15,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना और 4,700 लोगों को रोजगार देना

• Taiwan की PSMC गुजरात में भारत का पहला फ्रंट-एंड फैब प्लांट स्थापित कर रही है

• Netherlands की ASML ने Tata Electronics के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की है

• India Semiconductor Mission 2.0 पूरी वैल्यू चेन को कवर करता है – डिजाइन से लेकर पैकेजिंग तक

• China Plus One Strategy के तहत भारत वैकल्पिक विनिर्माण हब बन रहा है


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत को सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर बनने में कितना समय लगेगा?

पूर्ण आत्मनिर्भरता में 10-15 साल लग सकते हैं। पहली फैब यूनिट 2027-28 तक चालू होने की उम्मीद है। लेकिन एडवांस चिप्स (5nm, 3nm) बनाने की क्षमता विकसित करने में और समय लगेगा। फिलहाल फोकस 28nm और 40nm नोड्स पर है।

प्रश्न 2: क्या भारत वाकई Taiwan जैसा सेमीकंडक्टर हब बन सकता है?

संभावना है, लेकिन चुनौतियां बड़ी हैं। Taiwan ने यह स्थिति 40 सालों में हासिल की है। भारत के पास जनसंख्या, इंजीनियरिंग टैलेंट और बाजार का फायदा है। अगर सरकार लगातार सपोर्ट करे और प्राइवेट सेक्टर निवेश करे, तो अगले 15 सालों में भारत टॉप 5 में आ सकता है।

प्रश्न 3: आम नागरिक को इस सेमीकंडक्टर मिशन से क्या फायदा होगा?

प्रत्यक्ष रूप से 4,700+ नौकरियां। अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार (सप्लाई चेन, सर्विसेज में)। इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होंगे क्योंकि आयात निर्भरता कम होगी। भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सुरक्षित होगा।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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