Punjab Drug Free Campaign 2026 को और मजबूत बनाने के लिए आज मालेरकोटला में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रहे “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विलेज डिफेंस कमेटियों (VDC), ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों, पुलिस और सिविल प्रशासन के साथ जिला स्तरीय बैठक की। देखा जाए तो यह बैठक नशा मुक्ति अभियान को ग्राउंड लेवल तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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“नशा तस्करों के लिए Punjab में कोई जगह नहीं” – बरिंदर गोयल
पंजाब उर्दू अकादमी, मालेरकोटला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने साफ शब्दों में कहा:
“नशा तस्करी और नशों के अवैध कारोबार से जुड़े समाज विरोधी तत्वों के लिए पंजाब में कोई स्थान नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार समाज से नशे के अभिशाप को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह बयान सिर्फ राजनीतिक घोषणा नहीं है। पिछले दो वर्षों में पंजाब पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ हजारों मामले दर्ज किए हैं और सैकड़ों अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को तोड़ा है।
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यह केवल सरकार की लड़ाई नहीं – समाज की साझा जिम्मेदारी
मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि नशों के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार या पुलिस की नहीं है:
“यह समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। विलेज डिफेंस कमेटियां, पंचायतें, युवा, अभिभावक और सामाजिक संस्थाएं – सभी को इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।”
समाज के विभिन्न वर्गों की भूमिका:
विलेज डिफेंस कमेटियां (VDC):
- गांव में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना
- युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान
- पुलिस को सूचना देना
पंचायतें:
- गांव स्तर पर नशा विरोधी बैठकें
- पीड़ित परिवारों को सहायता
- नशा मुक्त गांव के लिए प्रतिज्ञा
युवा:
- Peer pressure का सामना करना
- खेल और सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेना
- नशे को ‘cool’ न मानना
अभिभावक:
- बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना
- खुली बातचीत
- संदेह होने पर तुरंत मदद लेना
समझने वाली बात यह है कि पुलिस अकेले इस लड़ाई को नहीं जीत सकती। समाज का सहयोग अनिवार्य है।
सरकार की बहुआयामी रणनीति
श्री गोयल ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी:
1. ग्रामीण रक्षा समितियों (VDC) का गठन:
- प्रत्येक गांव में VDC का गठन
- गांव के जिम्मेदार नागरिकों को शामिल किया गया
- नियमित बैठकें और monitoring
2. नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना:
- सरकारी और NGO द्वारा संचालित
- मुफ्त इलाज
- Counselling और rehabilitation
3. नशा मुक्ति टीमों की तैनाती:
- District-wise teams
- गांव-गांव जाकर जागरूकता
- Mobile de-addiction units
4. युवाओं के लिए सकारात्मक वातावरण:
- गांवों में खेल सुविधाएं
- खेल स्टेडियम
- पुस्तकालय
- स्किल ट्रेनिंग सेंटर
दिलचस्प बात यह है कि सरकार केवल दंड पर नहीं बल्कि पुनर्वास (rehabilitation) पर भी जोर दे रही है। नशेड़ियों को अपराधी नहीं बल्कि मरीज माना जा रहा है।
पुलिस को सख्त निर्देश – VDC के साथ समन्वय जरूरी
मंत्री गोयल ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए:
- विलेज डिफेंस कमेटियों के साथ निरंतर समन्वय
- नशों संबंधी सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई
- Informers की पहचान गुप्त रखना
- Zero tolerance policy
SSP गुरमीत सिंह ने आश्वासन दिया कि जिला पुलिस नशा तस्करों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई जारी रखेगी।
उन्होंने लोगों से अपील की:
“नशा तस्करी या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पंजाब सरकार की नशा विरोधी हेल्पलाइन तथा WhatsApp Chatbot नंबर 97791-00200 पर साझा करें। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।”
विधायकों ने भी दिया जोरदार समर्थन
मालेरकोटला के विधायक डॉ. जमील-उर-रहमान ने कहा:
“नशों और समाज विरोधी तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए जनता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। हमें एकजुट होकर लड़ना होगा।”
अमरगढ़ के विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा ने कहा:
“नशा मुक्त पंजाब के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। यह केवल पुलिस का काम नहीं है।”
समझने वाली बात यह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर एकमत हैं। नशा मुक्ति एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि पंजाब के भविष्य का सवाल है।
जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता
डिप्टी कमिश्नर विराज एस. तिड़के ने कहा:
“जिला प्रशासन विलेज डिफेंस कमेटियों को पूरा सहयोग दे रहा है। नशों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों को पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।”
मुख्य अतिथि और उपस्थित गणमान्य:
- अतिरिक्त उपायुक्त राजदीप सिंह बराड़
- SDM मालेरकोटला कनु गर्ग
- SDM अहमदगढ़ राजेश कुमार
- SP गुरशरणजीत सिंह
- सहायक आयुक्त मनदीप कौर
- DSP मानवजीत सिंह
- जिला प्रभारी नशा मुक्ति मोर्चा निसार अहमद
- हज कमेटी चेयरमैन मुहम्मद हाशिम
बड़ी संख्या में VDC सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।
Punjab का नशा संकट – पृष्ठभूमि
पंजाब में नशे की समस्या दशकों पुरानी है। 1980-90 के दशक में आतंकवाद के दौर में यह समस्या शुरू हुई और धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया।
मुख्य कारण:
- पाकिस्तान बॉर्डर से हेरोइन की तस्करी
- बेरोजगारी और निराशा
- आसान उपलब्धता
- Peer pressure
प्रभाव:
- युवाओं की पूरी पीढ़ी प्रभावित
- परिवारों का विघटन
- अपराध दर में वृद्धि
- Economic productivity में कमी
ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब सरकार ने इस समस्या को प्राथमिकता दी है। CM भगवंत मान की सरकार बनने के बाद से “युद्ध नशों के विरुद्ध” प्रमुख अभियान रहा है।
क्या कर सकते हैं आप?
अगर आप किसी को नशा करते देखें:
- 97791-00200 पर सूचना दें
- उनके परिवार को बताएं
- नशा मुक्ति केंद्र का पता दें
अगर परिवार में कोई नशेड़ी है:
- घबराएं नहीं, शर्माएं नहीं
- तुरंत मदद लें
- Nearest de-addiction center से संपर्क करें
- परिवार के रूप में support दें
युवाओं के लिए:
- नशे को ‘No’ कहें
- खेल और सकारात्मक गतिविधियों में भाग लें
- अपने लक्ष्यों पर ध्यान दें
- अच्छे दोस्त चुनें
मुख्य बातें (Key Points)
• मालेरकोटला में VDC, पुलिस और सिविल प्रशासन की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक
• मंत्री बरिंदर गोयल: नशा तस्करों के लिए पंजाब में कोई जगह नहीं
• पुलिस को निर्देश: VDC के साथ निरंतर समन्वय और तुरंत कार्रवाई
• नशा विरोधी हेल्पलाइन: 97791-00200 (पहचान गुप्त रखी जाएगी)
• युवाओं के लिए खेल सुविधाएं, स्टेडियम और पुस्तकालय विकसित किए जा रहे
• विधायकों और प्रशासन ने दिया पूर्ण समर्थन
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