Bathinda Thermal Plant : बठिंडा। पंजाब के बठिंडा जिले के पिंड लहिरा मुहब्बत स्थित 920 मेगावाट की क्षमता वाले गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट (GHTP) में राहत की खबर आई है। सभी चार यूनिट पूरी तरह बंद होने के एक दिन बाद, सोमवार सुबह प्लांट के एक यूनिट को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है। मौजूदा भयंकर गर्मी और गेहूं की कटाई के पीक सीजन के दौरान प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच इस यूनिट के दोबारा चालू होने से प्रशासन और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
देखा जाए तो यह संकट पंजाब की बिजली व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती थी। रविवार को चारों यूनिट बंद होने से प्रदेश में बिजली उत्पादन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं। प्लांट के तीन यूनिट पहले ही तकनीकी खराबी के कारण बंद थे, जबकि चौथा यूनिट रविवार को फ्लाई ऐश (राख) के भारी जमाव के कारण बंद करना पड़ा था।
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1800 ठेका कर्मचारियों की हड़ताल ने पैदा किया संकट
Bathinda Thermal Plant में पैदा हुए इस बड़े संकट का मुख्य कारण लगभग 1800 कॉन्ट्रैक्ट (ठेका) कर्मचारियों की चल रही अनिश्चित काल की हड़ताल है। ये कर्मचारी ठेकेदारी प्रथा खत्म करके सीधे PSPCL (पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) में नियमित होने की मांग कर रहे हैं। इन्हीं ठेका कर्मचारियों के काम बंद करने से प्लांट में फ्लाई ऐश की सफाई नहीं हो पाई और धीरे-धीरे एक-एक करके सभी यूनिट बंद हो गए।
समझने वाली बात यह है कि थर्मल प्लांट में कोयले से बिजली बनाने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में राख (फ्लाई ऐश) निकलती है। इस राख को लगातार साफ करना और उसे निर्धारित जगह पर डालना जरूरी होता है। अगर यह काम रुक जाए तो राख जमा होते-होते पूरे सिस्टम को बंद कर देती है।
प्लांट के सूत्रों के अनुसार यहां करीब 500 स्थायी कर्मचारी हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा क्लर्कीकल (दफ्तरी) कामों में लगे हुए हैं। फील्ड के तकनीकी कामों के लिए भारी कमी थी। इसी कारण ठेका कर्मचारियों पर निर्भरता ज्यादा है।
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प्रबंधकों ने जुटाई वाधू लेबर, एक यूनिट चालू
प्लांट पूरी तरह बंद होने के बाद प्रबंधकों ने राख साफ करने और कामकाज को दोबारा शुरू करने के लिए वाधू लेबर (मानव शक्ति) का प्रबंध किया। रात भर मेहनत के बाद सोमवार सुबह 5 बजे 210 मेगावाट क्षमता वाले एक यूनिट को फिर से चालू कर दिया गया।
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यूनिट बंद होने का क्रम:
| तारीख | यूनिट | बंद होने का कारण |
|---|---|---|
| 17 जून | यूनिट 1 | तकनीकी खराबी |
| 19 जून | यूनिट 2 और 3 | तकनीकी खराबी |
| 22 जून (रविवार) | यूनिट 4 | फ्लाई ऐश का भारी जमाव |
| 23 जून (सोमवार) | यूनिट 1 | फिर से चालू (सुबह 5 बजे) |
“अगले दो दिनों में बाकी यूनिट भी चालू होंगे”: चीफ इंजीनियर
‘ट्रिब्यून’ से बातचीत करते हुए GHTP के चीफ इंजीनियर तेज बंसल ने पुष्टि की कि 210 मेगावाट क्षमता वाले एक यूनिट को आज सुबह 5 बजे पूरी तरह चालू कर दिया गया है। उन्होंने बताया, “बाकी तीन यूनिट पर भी काम बड़ी तेजी से चल रहा है और हमारी पूरी कोशिश है कि अगले दो दिनों के अंदर बाकी यूनिटों से भी बिजली उत्पादन फिर से शुरू करवा दिया जाए।”
चीफ इंजीनियर ने पहले बताया था कि यह सारी समस्या ठेका कर्मचारियों की हड़ताल के कारण खड़ी हुई है, जो ठेकेदारी सिस्टम खत्म करके पावरकॉम (PSPCL) में सीधे नियमित होने की मांग कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन कर्मचारियों का संघर्ष 9 जून को शुरू हुआ था, जो 16 जून से पूर्ण हड़ताल में बदल गया। करीब दो हफ्ते से ये कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं।
चंडीगढ़ में वित्त मंत्री हरपाल चीमा से आज अहम मीटिंग
Bathinda Thermal Plant संकट को सुलझाने और गतिरोध खत्म करने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हड़ताली ठेका कर्मचारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज चंडीगढ़ में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से मुलाकात करने जा रहा है।
इस बैठक में कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किए जाने और थर्मल प्लांट के संकट को स्थायी तौर पर हल करने के लिए कोई रास्ता निकाले जाने की उम्मीद है। यह जरूरी है ताकि प्रदेश के किसानों और आम लोगों को गर्मी के इस मौसम में बिजली कटौती का सामना न करना पड़े।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में गर्मियों में बिजली की मांग 14,000 से 16,000 मेगावाट तक पहुंच जाती है। ऐसे में 920 मेगावाट के प्लांट का बंद होना बड़ा झटका है। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली चाहिए और शहरों में घरेलू उपयोग के लिए।
ठेका कर्मचारियों की मुख्य मांगें
हड़ताली कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
ठेकेदारी प्रथा खत्म करना: वे चाहते हैं कि उन्हें सीधे PSPCL में नियमित किया जाए
समान वेतन: स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते
सामाजिक सुरक्षा: पेंशन, चिकित्सा सुविधाएं और अन्य लाभ
नौकरी की सुरक्षा: ठेकेदार की मर्जी पर नौकरी जाने का डर खत्म हो
समझने वाली बात यह है कि ये मांगें अनुचित नहीं हैं। कई राज्यों में ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन सरकार के सामने वित्तीय बोझ का सवाल है। 1800 कर्मचारियों को नियमित करने से सालाना करोड़ों रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
पंजाब की बिजली व्यवस्था पर असर
Bathinda Thermal Plant का यह संकट पंजाब की पूरी बिजली व्यवस्था के लिए चुनौती है। प्रदेश में बिजली उत्पादन के मुख्य स्रोत हैं:
थर्मल पावर प्लांट: रोपड़, लीलवान, GH थर्मल प्लांट बठिंडा
हाइड्रो पावर: भाखड़ा, पोंग, रणजीत सागर बांध से हिस्सेदारी
निजी उत्पादक: कुछ निजी कंपनियों से खरीद
बाहरी राज्यों से: जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से बिजली खरीदी जाती है
जब किसी बड़े प्लांट में समस्या आती है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। बिजली कटौती शुरू हो जाती है। किसान परेशान होते हैं। उद्योग प्रभावित होते हैं।
राजनीतिक निहितार्थ
यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने सत्ता में आने के बाद 24 घंटे मुफ्त बिजली का वादा किया था। अगर बिजली कटौती होती है तो विपक्ष इस पर सवाल उठाएगा।
दूसरी तरफ, ठेका कर्मचारियों की मांग भी न्यायसंगत है। AAP जो खुद को मजदूरों और गरीबों की पार्टी बताती है, उसे इस मुद्दे को संवेदनशीलता से संभालना होगा।
अगर गौर करें तो यह एक जटिल स्थिति है। एक तरफ बिजली उत्पादन जरूरी है, दूसरी तरफ कर्मचारियों के हक भी महत्वपूर्ण हैं। सरकार को दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा।
दीर्घकालिक समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ठेका प्रथा पर निर्भरता कम करनी होगी। महत्वपूर्ण पदों पर नियमित कर्मचारी होने चाहिए। साथ ही, मौजूदा ठेका कर्मचारियों के लिए भी उचित सम्मान और सुविधाएं जरूरी हैं।
कुछ सुझाव:
चरणबद्ध नियमितीकरण: धीरे-धीरे योग्य ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए
बेहतर ठेका शर्तें: जब तक नियमितीकरण नहीं होता, बेहतर वेतन और सुविधाएं दी जाएं
कौशल विकास: कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर और सक्षम बनाया जाए
पारदर्शी भर्ती: भविष्य में नियमित पदों पर पारदर्शी भर्ती हो
मुख्य बातें (Key Points)
- Bathinda Thermal Plant के चारों यूनिट बंद होने के बाद एक यूनिट सोमवार सुबह फिर चालू
- 1800 ठेका कर्मचारियों की हड़ताल से पैदा हुआ संकट, नियमितीकरण की मांग
- फ्लाई ऐश जमाव के कारण यूनिट बंद हुए, प्रबंधकों ने वाधू लेबर जुटाई
- चीफ इंजीनियर ने कहा अगले दो दिनों में बाकी यूनिट भी चालू होंगे
- आज चंडीगढ़ में वित्त मंत्री हरपाल चीमा से कर्मचारियों की अहम बैठक
- 920 मेगावाट का प्लांट बंद होने से पंजाब की बिजली व्यवस्था पर असर
- गर्मी और गेहूं कटाई सीजन में बिजली की मांग चरम पर













