Chandigarh Heritage Furniture Auction एक बार फिर सुर्खियों में है। और इस बार खबर बेहद चिंताजनक है। चंडीगढ़ के कैपिटल प्रोजेक्ट की शान माने जाने वाले पिएर जेनेरे के डिजाइन किए विरासती फर्नीचर को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामले में इस फर्नीचर के 13 लॉट्स में से 7 टुकड़े 18 जून को ब्रसेल्स में हुई नीलामी के दौरान 1,60,938 यूरो (करीब 1.6 करोड़ रुपये) में बिक गए।
देखा जाए तो यह सिर्फ फर्नीचर की बिक्री नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की पहचान का सौदा है।
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पहले चेतावनी, फिर भी नीलामी जारी
हैरान करने वाली बात यह है कि यह नीलामी उस समय हुई जब विरासत कार्यकर्ता अजय जग्गा ने नीलामी से दो दिन पहले ही केंद्रीय विदेश मंत्रालय और सांस्कृतिक मंत्रालय को इस बारे में लिखित रूप में पूरी जानकारी दे दी थी।
उन्होंने दखल की मांग की थी। लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से इसे रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
समझने वाली बात यह है कि चेतावनी देने के बावजूद कोई कार्रवाई न होना खुद में एक बड़ा सवाल है।
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विदेश मंत्री और संस्कृति मंत्री को लिखा था पत्र
चंडीगढ़ के हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य जग्गा ने 18 जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को नीलामी घर ‘पियासा’ (PIASA) द्वारा होने वाली नीलामी के बारे में सचेत किया था।
उन्होंने तत्काल कूटनीतिक दखल की मांग की थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अगले दिन एक और पत्र भेजकर उन्होंने निराशा जताई।
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ब्रसेल्स में क्या-क्या बिका?
| लॉट नं. | वस्तु | विक्रय कीमत (€) | भारतीय रुपये में |
|---|---|---|---|
| 278 | लाइब्रेरी टेबल | 52,484 | 52.48 लाख |
| 280 | सोफा | 18,404 | 18.40 लाख |
| 283 | बेंच | 10,517 | 10.52 लाख |
| 347 | डिजाइन पीस (जेनेरे और ले कोर्बूजिए) | 26,292 | 26.29 लाख |
| 349 | तीन ऊंचे स्टूल का सेट | 32,865 | 32.87 लाख |
| 352 | परफॉर्मेंस हॉल आर्मचेयरों की जोड़ी | 7,230 | 7.23 लाख |
| 353 | छात्र की डेस्क और लाइब्रेरी कुर्सी | 13,146 | 13.15 लाख |
| कुल | 1,60,938 | लगभग 1.61 करोड़ रुपये |
पंजाब यूनिवर्सिटी और हाई कोर्ट से जुड़ा फर्नीचर
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि नीलामी घर ने बेची गई वस्तुओं के मूल स्थान के रूप में प्रशासनिक इमारतों, पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़ का जिक्र किया है।
जग्गा ने स्पष्ट किया है कि “प्रशासनिक इमारतें” सिर्फ चंडीगढ़ प्रशासन तक सीमित नहीं हैं। बल्कि इसमें पंजाब, हरियाणा, यूटी, पंजाब यूनिवर्सिटी, पीईसी, हाई कोर्ट और पीजीआईएमईआर की इमारतें भी शामिल हैं।
‘सालों से जारी है लूट’
जग्गा ने अपनी चिंता जताते हुए कहा कि सालों से चंडीगढ़ का विरासती फर्नीचर सार्वजनिक संस्थानों से गायब हो रहा है।
दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय नीलामी घरों और निजी संग्रहों में पहुंच रहा है। और लूट अब भी जारी है।
सवाल उठता है: आखिर कौन है जो सरकारी इमारतों से यह फर्नीचर निकाल रहा है?
‘कला खजाना’ घोषित करने की मांग
जग्गा ने मांग की है कि नीलाम हुई इन वस्तुओं की मालिकाना हक और इतिहास की औपचारिक जांच करवाई जाए। ताकि पता चल सके कि यह फर्नीचर सरकारी संस्थानों से बाहर कैसे निकला।
साथ ही उन्होंने चंडीगढ़ के बचे हुए जेनेरे-ले कोर्बूजिए फर्नीचर को ‘एंटीक्विटीज एंड आर्ट ट्रेजर्स एक्ट, 1972’ के तहत “कला खजाना” घोषित करने की जोरदार वकालत की है।
पंजाब विधानसभा स्पीकर भी जता चुके हैं चिंता
राहत की बात है कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भी चंडीगढ़ प्रशासन से हिरासत रिपोर्ट मांगी है।
दिलचस्प बात यह है कि 4 जून को शिकागो में सेक्टर 4 स्थित पंजाब एमएलए हॉस्टल की विरासती कुर्सियों और चार नीचे स्टूलों का एक सेट 59 लाख रुपये से ज्यादा में नीलाम हुआ था।
उन कुर्सियों पर “MLA (H) PB/1/B-11” की इन्वेंटरी मार्किंग मौजूद थी। यानी सीधे सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ा सबूत।
6 लॉट्स अभी भी अनबिके
मूल 13 पीस सेट में से 6 लॉट्स घोषित नतीजों में शामिल नहीं थे। इनमें दफ्तरी कुर्सियों की एक जोड़ी (282), कमेटी कुर्सियों की एक जोड़ी (345), पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए मॉडल की गई एक मेज (346), राइटिंग टैबलेट वाली एक कुर्सी (348), दराज (350) और एक बेंच (351) शामिल हैं।
आम चंडीगढ़ निवासी पर असर
चंडीगढ़ के निवासियों के लिए यह सिर्फ फर्नीचर नहीं, बल्कि उनके शहर की आत्मा है। ले कोर्बूजिए और पिएर जेनेरे ने जो शहर डिजाइन किया, उसकी हर एक चीज विरासत है।
चिंता का विषय यह है कि अगर यही रफ्तार रही, तो अगले कुछ सालों में चंडीगढ़ की पहचान विदेशी संग्राहकों के घरों में सिमट जाएगी।
जानें पूरा मामला
चंडीगढ़ को 1950 के दशक में स्विस-फ्रेंच आर्किटेक्ट ले कोर्बूजिए और उनके चचेरे भाई पिएर जेनेरे ने डिजाइन किया था। शहर की सरकारी इमारतों के लिए विशेष फर्नीचर भी इन्हीं ने डिजाइन किया था। यह फर्नीचर आज दुनिया भर के संग्राहकों के बीच बेहद कीमती माना जाता है। पिछले कई वर्षों से यह फर्नीचर सरकारी इमारतों से रहस्यमय तरीके से गायब हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय नीलामी घरों में पहुंच रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ब्रसेल्स में चंडीगढ़ के 7 विरासती फर्नीचर टुकड़े 1.6 करोड़ रुपये में बिके
- विरासत कार्यकर्ता अजय जग्गा ने पहले ही केंद्रीय मंत्रियों को चेताया था
- लाइब्रेरी टेबल अकेले 52.48 लाख रुपये में बिकी
- पंजाब यूनिवर्सिटी, हाई कोर्ट और प्रशासनिक इमारतों से जुड़ा था फर्नीचर
- ‘कला खजाना’ घोषित करने की उठी मांग













