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The News Air - Breaking News - Gold Import India 2026: 70% गिरा सोने का आयात! लोगों का मोहभंग या सरकारी रणनीति?

Gold Import India 2026: 70% गिरा सोने का आयात! लोगों का मोहभंग या सरकारी रणनीति?

सीमा शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% करने के बाद सोने का आयात 75-100 टन से घटकर 25-30 टन रह गया, विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 19 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Gold Import India
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Gold Investment 2026: सोने पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। सरकार द्वारा सीमा शुल्क 6% बढ़ाकर 15% किए जाने के बाद देश में सोने का आयात करीब 70% तक घट गया है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, जहां पहले हर महीने 75 से 100 टन सोना आयात होता था, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 25 से 30 टन के बीच रह गया है। देखा जाए तो यह नया शुल्क 13 मई 2025 से लागू किया गया था, जिसके बाद से आयात में तेज गिरावट दर्ज की गई है। सवाल उठता है कि क्या लोगों का सोने से मोहभंग हो गया है या यह सरकार की रणनीति का हिस्सा है?

🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा फैसला: Silver Import पर भारत सरकार का सख्त प्रतिबंध, Gold पर भी नई सीमा

मात्रा में गिरावट, कीमत में बढ़ोतरी

अगर बात करें तो मात्रा में गिरावट के बावजूद कीमत के लिहाज से तस्वीर अलग नजर आती है। मई महीने में सोने का आयात मूल्य सालाना आधार पर 34% बढ़कर $3.41 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की ऊंची कीमतें रही। दिलचस्प बात यह है कि इसी तरह अप्रैल और मई के दौरान कुल आयात 60.14% बढ़कर 9.04 बिलियन डॉलर हो गया।

वहीं पूरे वित्त वर्ष की अगर बात करें तो सोने का आयात 24% बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन मात्रा के लिहाज से इसमें 4.76% की गिरावट आई है और यह 721.03 टन रहा।

अवधिमात्रा (टन)मूल्य (बिलियन $)बदलाव
पहले (प्रति माह)75-100–आधार
अब (प्रति माह)25-30–70% गिरावट
मई 2025–3.41+34% (सालाना)
पूरा वित्त वर्ष721.0371.98मात्रा -4.76%, मूल्य +24%

इससे यह साफ है कि कीमतें बढ़ने के कारण कम मात्रा में भी ज्यादा मूल्य का आयात हो रहा है।

🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा खुलासा: RBI Gold Reserve विवाद की पूरी सच्चाई

भारत क्यों है सोने का दीवाना?

भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। यहां सोने की मांग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग से आती है।

समझने वाली बात है कि भारतीय संस्कृति में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि शादी-ब्याह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न हिस्सा है। अक्षय तृतीया, धनतेरस, दीवाली जैसे मौकों पर सोने की खरीदारी चरम पर होती है।

लेकिन बड़े पैमाने पर सोने का आयात देश से विदेशी मुद्रा के भारी आउटफ्लो का कारण बनता है। यही वजह है कि सरकार इस पर नियंत्रण चाहती है।

पीएम मोदी की सादगी की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले सोने की अनावश्यक खरीद को लेकर सादगी अपनाने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि अगर लोग सोने की जगह अन्य निवेश विकल्पों को चुनें, तो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

फिलहाल देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी 5% से ज्यादा है, जो अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाती है। अगर गौर करें तो यह कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात मद है।

वहीं पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितताओं के चलते आयात लागत और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता अब जरूरी वस्तुएं जैसे कच्चा तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल और पूंजीगत सामान के आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च करना है ताकि आर्थिक गतिविधियों और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिल सके।

🔍 यह भी पढ़ें- RBI Gold Reserve Controversy: Bloomberg की फर्जी खबर, भारत के सोने पर झूठा दावा

सरकार की रणनीति: विदेशी मुद्रा बचाना

विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क बढ़ाकर सरकार दो उद्देश्य साधना चाहती है:

1. विदेशी मुद्रा का संरक्षण: हर साल $70 बिलियन से अधिक का सोना आयात होता है। इस पैसे को अगर जरूरी वस्तुओं पर खर्च किया जाए तो अर्थव्यवस्था को ज्यादा फायदा होगा।

2. घरेलू निवेश को बढ़ावा: सरकार चाहती है कि लोग सोने की जगह शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, सरकारी बॉन्ड जैसे उत्पादक निवेशों में पैसा लगाएं।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि सोने में निवेश से देश को कोई उत्पादक लाभ नहीं मिलता, जबकि शेयर बाजार में निवेश से कंपनियों को पूंजी मिलती है और रोजगार सृजन होता है।

आम आदमी पर क्या असर?

आयात शुल्क बढ़ने से सोने की कीमतें और बढ़ गई हैं। जो लोग शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उन्हें अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

वर्तमान में सोने की कीमत:

  • 24 कैरेट सोना: लगभग ₹75,000-78,000 प्रति 10 ग्राम (शहर के अनुसार)
  • 22 कैरेट सोना: लगभग ₹68,000-71,000 प्रति 10 ग्राम

ज्वैलर्स का कहना है कि शुल्क बढ़ने के बाद से खरीदारी में कमी आई है। खासकर मध्यम वर्ग के लोग अब सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं।

राहत की बात यह है कि डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं, जो फिजिकल सोने से सस्ते और सुरक्षित हैं।

ज्वैलर्स इंडस्ट्री की चिंता

आभूषण उद्योग इस शुल्क वृद्धि से परेशान है। All India Gems and Jewellery Domestic Council ने सरकार से शुल्क कम करने की अपील की है।

उनका कहना है कि:

  • ऊंची कीमतों से बिक्री घट रही है
  • छोटे कारीगरों और दुकानदारों पर असर पड़ रहा है
  • शादी के सीजन में मांग कम हो रही है
  • अवैध तस्करी बढ़ने का खतरा है

दिलचस्प बात यह है कि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे शुल्क से सोने की तस्करी बढ़ सकती है, जो सरकार के लिए नई चुनौती बन सकती है।

निवेश के बेहतर विकल्प

अगर आप निवेश के लिए सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये विकल्प बेहतर हो सकते हैं:

1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): सरकार द्वारा जारी, सुरक्षित और 2.5% सालाना ब्याज भी मिलता है।

2. गोल्ड ETF: शेयर बाजार में ट्रेड होता है, कोई मेकिंग चार्ज नहीं।

3. डिजिटल गोल्ड: छोटी रकम से शुरू कर सकते हैं, चोरी का डर नहीं।

4. म्यूचुअल फंड या शेयर: लंबी अवधि में सोने से बेहतर रिटर्न की संभावना।

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वैश्विक कीमतों का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। अमेरिका में मंदी की आशंका, यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $2,300-2,400 प्रति औंस के आसपास है। अगर यह और बढ़ता है तो भारत में भी कीमतें बढ़ सकती हैं।


मुख्य बातें (Key Points)
  • सोने का आयात 70% घटकर 25-30 टन प्रति माह रह गया
  • सीमा शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किया गया (13 मई से लागू)
  • मात्रा घटी लेकिन ऊंची कीमतों के कारण मूल्य में 24% वृद्धि
  • सरकार की प्राथमिकता विदेशी मुद्रा बचाना और उत्पादक निवेश को बढ़ावा
  • SGB, गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड बेहतर निवेश विकल्प
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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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