Ishroop Narang Judo Player : चंडीगढ़। हाथों की 12 उंगलियां और पैरों की 12 उंगलियां होना आमतौर पर एक शारीरिक विलक्षणता माना जाता है। लेकिन चंडीगढ़ की होनहार जूडो खिलाड़ी Ishroop Narang के लिए यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि मैदान फतह करने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।
देखा जाए तो इश्रूप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि हौसले और दृढ़ संकल्प की अद्भुत मिसाल है। इसी खास शारीरिक बनावट के दम पर उन्होंने 15 जुलाई से शुरू हो रही Glasgow Commonwealth Games 2026 के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है।
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विशेष शरीर संरचना: कमजोरी से ताकत तक का सफर
इश्रूप नारंग इस वक्त जूनियर महिलाओं के -78 किलोग्राम भार वर्ग में विश्व की नंबर 3 खिलाड़ी हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस शारीरिक विशेषता को दुनिया अक्सर अलग नजरिए से देखती है, उसी ने इश्रूप को जूडो में बेजोड़ बना दिया।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इश्रूप की वाधू उंगलियां उन्हें जूडो मुकाबले के दौरान विरोधी पर मजबूत ग्रिप बनाने में मदद करती हैं। समझने वाली बात यह है कि जूडो में विरोधी की पोशाक (गी) को पकड़ना और नियंत्रण बनाना सबसे अहम है। और यहीं इश्रूप को प्राकृतिक बढ़त मिलती है।
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ताशकंद में जीता कांस्य पदक
इश्रूप नारंग ने हाल ही में उजबेकिस्तान के ताशकंद में हुए ‘Junior Asian Cup 2026’ में शानदार प्रदर्शन करते हुए -78 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। यह जीत उनके करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।
दिलचस्प बात यह है कि उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए पिछले साल Inspire Institute of Sports (IIS) ने उन्हें लंबे समय की हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग के लिए चुना था। वहां वह जॉर्जिया के अखमेता में मुख्य कोच मामूका किजीलाश्विली की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुर सीख रही हैं।
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चंडीगढ़ से शुरू हुआ सफर, राष्ट्रीय खेलों में सोना
स्थानीय सेक्टर 34 के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोच विवेक ठाकुर की देख-रेख में शिक्षालाई शुरू करने वाली इश्रूप ने चंडीगढ़ और पंजाब के लिए कई बड़े मेडल जीते हैं। हाल ही में हुए 38वीं उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों (National Games) में उन्होंने स्वर्ण पदक फतह किया था।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण जीतना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इससे इश्रूप का आत्मविश्वास और बढ़ा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरने की प्रेरणा मिली।
वालसाल में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक
इससे पहले, पंजाब की प्रतिनिधित्व करते हुए इश्रूप ने ग्रेट ब्रिटेन के वालसाल में हुई Commonwealth Judo Championship के +70 किलोग्राम प्री-कैडिट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मेडल हासिल किया था। यह उनके करियर का टर्निंग पॉइंट था।
अगर गौर करें तो इश्रूप की यात्रा एक छोटे शहर से शुरू होकर विश्व मंच तक पहुंची है। और अब वह राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं।
प्राकृतिक लाभ: विशेषज्ञों की राय
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इश्रूप की वाधू उंगलियां उन्हें जूडो की खेल में विरोधी खिलाड़ी की पोशाक (गी) को अधिक शक्तिशाली तरीके से पकड़ने में मदद करती हैं। जूडो में यह क्षमता निर्णायक साबित हो सकती है।
इससे साफ होता है कि जिसे समाज अक्सर एक शारीरिक असामान्यता मानता है, वही इश्रूप के लिए प्रकृति का वरदान बन गई। यह दर्शाता है कि अलग होना हमेशा कमजोरी नहीं, कभी-कभी ताकत भी होती है।
Glasgow 2026: सोने की उम्मीद
ग्लासगो खेलों के लिए क्वालीफाई करने के बाद अब खेल प्रेमियों को उनसे देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की बड़ी उम्मीदें हैं। विश्व रैंकिंग में नंबर 3 की स्थिति को देखते हुए इश्रूप पोडियम की प्रबल दावेदार हैं।
राहत की बात यह है कि इश्रूप को सरकारी संस्थानों और कोचों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। Inspire Institute of Sports में मिल रही विश्व स्तरीय ट्रेनिंग उन्हें और निखार रही है।
प्रेरणा की कहानी
इश्रूप नारंग की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपनी शारीरिक या अन्य विशेषताओं को लेकर हीन भावना से ग्रस्त है। उन्होंने साबित किया है कि अगर हौसला बुलंद हो तो हर चुनौती अवसर में बदल सकती है।
कहने का मतलब साफ है कि इश्रूप ने सिर्फ मेडल नहीं जीते, बल्कि लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई है। वह आज भारतीय खेलों का उभरता हुआ सितारा हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• चंडीगढ़ की इश्रूप नारंग के हाथों और पैरों में 12-12 उंगलियां हैं
• -78 किलोग्राम भार वर्ग में विश्व रैंकिंग नंबर 3 पर काबिज
• Glasgow Commonwealth Games 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन
• Junior Asian Cup 2026 में कांस्य पदक विजेता
• 38वीं राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीता













