Southwest Monsoon 2026: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) ने 11 जून 2026 को दोपहर 1:30 बजे एक अहम प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए बताया कि मॉनसून कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के कुछ और हिस्सों, तमिलनाडु के बाकी इलाकों, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में दस्तक दे चुका है। देखा जाए तो यह खबर किसानों के लिए राहत की सांस लेकर आई है, लेकिन साथ ही मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लिए गंभीर चेतावनी भी जारी की है।
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के असर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR, उत्तराखंड और राजस्थान समेत पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में 11 से 13 जून के बीच तेज आंधी-तूफान, बिजली की कड़क और ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है। दिलचस्प बात यह है कि हवाओं की रफ्तार 60-70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो 80 किमी प्रति घंटे तक भी जा सकती है। ऐसे में आम जनजीवन पर इसका सीधा असर पड़ना तय है।
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मॉनसून की प्रगति: किन राज्यों में पहुंची बारिश का मोर्चा
मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के कुछ और हिस्सों में प्रवेश कर लिया है। तमिलनाडु और पुडुचेरी के बाकी बचे इलाकों में भी मॉनसून की बारिश शुरू हो चुकी है। साथ ही दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में भी मॉनसून फैल गया है। पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ इलाकों में भी बारिश ने दस्तक दे दी है।
अगर गौर करें तो मॉनसून की उत्तरी सीमा अब 18°N/60°E से शुरू होकर हरनई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राद्री कोठागुडेम, कलिंगपट्टनम, रायगंज और मधुबनी से होते हुए 28.5°N/83°E तक पहुंच चुकी है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 2-3 दिनों में मॉनसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बाकी इलाकों, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी फैल सकता है।
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उत्तर भारत में तूफान का कहर: 11-12 जून को सबसे खतरनाक दिन
जहां एक ओर मॉनसून दक्षिण और पूर्वी भारत में राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ ने मुसीबत खड़ी कर दी है। मौसम विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि 11 और 12 जून 2026 को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज आंधी-तूफान आ सकता है। हवाओं की रफ्तार 60-70 किमी प्रति घंटे से शुरू होकर 80 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
समझने वाली बात यह है कि यह कोई सामान्य हवा नहीं होगी। इसके साथ बिजली की कड़क, धूल भरी आंधी और कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11-12 जून को ओलावृष्टि का खतरा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 11 जून को ओलावृष्टि हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 जून को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
दिल्ली-NCR में मौसम का मिजाज: तापमान में आएगी बड़ी गिरावट
राजधानी दिल्ली और NCR के लोगों के लिए अगले तीन-चार दिन काफी अहम रहने वाले हैं। 11 जून 2026 को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, जो दोपहर बाद गहरे हो जाएंगे। दोपहर और शाम के समय हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज आंधी-तूफान, बिजली की कड़क और धूल भरी आंधी चल सकती है। हवाओं की रफ्तार 50-60 किमी प्रति घंटे से शुरू होकर 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 11 जून को दिल्ली में अधिकतम तापमान 38-40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा, जो सामान्य के करीब होगा। लेकिन 12 जून को तापमान में जबरदस्त गिरावट आएगी। 12 जून को अधिकतम तापमान 34-36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23-25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है।
13 जून को भी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और दोपहर-शाम में हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। 14 जून को बादल छाए रहेंगे और दोपहर-शाम में गरज के साथ बारिश की संभावना है।
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भारी बारिश का अलर्ट: इन राज्यों में जारी हुई चेतावनी
मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों में (10 जून सुबह 8:30 बजे से 11 जून सुबह 8:30 बजे तक) सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, तटीय आंध्र प्रदेश और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 12-20 सेमी तक भारी बारिश दर्ज की गई है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना में 7-11 सेमी बारिश हुई है।
आगे के दिनों में भी भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। देखिए किन राज्यों में कब भारी बारिश होगी:
| राज्य/क्षेत्र | तारीख | बारिश का प्रकार |
|---|---|---|
| उत्तराखंड | 11-12 जून | भारी बारिश |
| पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश | 11 जून | भारी बारिश |
| अंडमान-निकोबार | 11-12 जून | भारी बारिश |
| सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम | 11 जून, 12-17 जून | अत्यधिक भारी बारिश |
| बिहार | 11-13 जून | अत्यधिक भारी बारिश (11 जून) |
| झारखंड | 12-13 जून | भारी बारिश |
| ओडिशा | 12-15 जून | भारी बारिश |
| अरुणाचल प्रदेश | 11 जून, 12-13 जून, 14-17 जून | अत्यधिक भारी बारिश (12-13 जून) |
| असम और मेघालय | 11-13 जून, 14-17 जून | अत्यधिक भारी बारिश (11-13 जून) |
| तटीय आंध्र प्रदेश और यनम | 11-12 जून | भारी बारिश |
| तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल | 11-12 जून | भारी बारिश |
| तेलंगाना | 11-12 जून | भारी बारिश |
| केरल और माहे | 11-12 जून, 13-15 जून | अत्यधिक भारी बारिश (11-12 जून) |
| तटीय कर्नाटक | 11-12 जून, 13-15 जून | अत्यधिक भारी बारिश (12 जून) |
| उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक | 11-13 जून | भारी बारिश |
गर्मी की मार जारी: हीटवेव का अलर्ट इन इलाकों में
जहां कुछ इलाकों में बारिश और ठंडक का माहौल है, वहीं कुछ जगहों पर अभी भी गर्मी का कहर जारी है। मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 11-12 जून, तेलंगाना में 11-13 जून और विदर्भ में 11-12 जून को हीटवेव (लू) की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों में पूर्वी उत्तर प्रदेश और पंजाब में हीटवेव की स्थिति देखी गई है।
10 जून को पंजाब के भटिंडा में देश का सबसे ज्यादा तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में 40-46 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहा।
कोंकण और गोआ में 11-13 जून तक गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 11-12 जून को गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा।
तूफान से हुआ नुकसान: पेड़ गिरे, बिजली के तार टूटे
पिछले 24 घंटों में कई राज्यों में तेज हवाओं ने तबाही मचाई है। अंडमान-निकोबार के श्री विजयपुरम में 62 किमी प्रति घंटे, गंगीय पश्चिम बंगाल के उलूबेरिया में 61 किमी प्रति घंटे, अलीपुर में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। ओडिशा के मलकानगिरी में सबसे तेज हवा 85 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली। झारखंड के डुमका और बिहार के IIT पटना में 70 किमी प्रति घंटे की हवा चली।
पंजाब के मोहाली में 68 किमी प्रति घंटे, पटियाला में 63 किमी प्रति घंटे, संगरूर में 56 किमी प्रति घंटे की हवा चली। हरियाणा के कैथल में 72 किमी प्रति घंटे, कैथल (कौल) में 72 किमी प्रति घंटे, करनाल में 52 किमी प्रति घंटे की हवा चली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 83 किमी प्रति घंटे, बरेली में 76 किमी प्रति घंटे, शाहजहांपुर में 63 किमी प्रति घंटे की हवा चली।
इन तेज हवाओं से कई जगहों पर पेड़ गिर गए, बिजली के तार टूट गए और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा।
मछुआरों के लिए सख्त चेतावनी: समुद्र में न जाएं
मौसम विभाग ने मछुआरों को सलाह दी है कि वे 11 जून से 16 जून 2026 के बीच निम्नलिखित समुद्री क्षेत्रों में न जाएं:
बंगाल की खाड़ी:
- मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन, श्रीलंका तट, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर (11-16 जून)
- पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी (11-13 जून)
अरब सागर:
- कर्नाटक और केरल तट, लक्षद्वीप क्षेत्र, मालदीव क्षेत्र और पूर्व-मध्य अरब सागर (11-13 जून)
- पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्व अरब सागर (13-16 जून)
- सोमालिया तट और ओमान तट (11-16 जून)
किसानों के लिए सलाह: फसलों को बचाने के लिए करें ये काम
मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सलाह जारी की है। ओलावृष्टि के खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों को सलाह दी गई है कि वे फलों के बगीचों और सब्जियों के पौधों पर ओलावृष्टि रोधी जाल या कैप का इस्तेमाल करें। खेतों में पानी भरने से बचाने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। पके हुए फलों को जल्द से जल्द तोड़ लें और सुरक्षित जगह पर रखें।
मध्य प्रदेश के किसानों को सलाह दी गई है कि पकी हुई मूंग, आम और सब्जियों की जल्द से जल्द कटाई करें और कटी हुई फसल को सुरक्षित जगह पर रखें।
भारी बारिश वाले इलाकों में किसानों को सलाह दी गई है कि धान की नर्सरी, अदरक, सब्जियों, केला और पपीता के खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। टमाटर के पौधों को सहारा दें ताकि वे गिरें नहीं। धान की नर्सरी को पतली पॉलीथीन शीट से ढकें।
गर्मी और लू वाले इलाकों में सब्जियों की नर्सरी और बागों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। टमाटर में मल्चिंग करें और कैल्शियम नाइट्रेट का पर्णीय छिड़काव करें।
जनता के लिए सुरक्षा सलाह: इन बातों का रखें ध्यान
मौसम विभाग ने आम जनता को निम्नलिखित सुरक्षा सलाह दी है:
तूफान और बिजली के लिए:
- मौसम की जानकारी पर नजर रखें और स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित जगह पर चले जाएं
- घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें
- अनावश्यक यात्रा से बचें
- पेड़ों के नीचे शरण न लें
- बिजली की गतिविधि के दौरान कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों के सहारे न खड़े हों
- बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें
- पानी के स्रोतों से तुरंत बाहर निकलें
- बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं से दूर रहें
भारी बारिश के लिए:
- अपने गंतव्य के लिए निकलने से पहले यातायात की स्थिति की जांच करें
- जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
- कमजोर संरचनाओं में रहने से बचें
- यातायात सलाहों का पालन करें
गर्मी और लू के लिए:
- गर्मी के संपर्क से बचें, ठंडे रहें
- निर्जलीकरण से बचें
- पर्याप्त पानी पिएं, भले ही प्यास न लगी हो
- ORS, घर के बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें
तापमान में बदलाव: कहां बढ़ेगी गर्मी, कहां मिलेगी राहत
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में 12 जून तक अधिकतम तापमान में 5-7 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट आएगी और उसके बाद 13-17 जून के दौरान 3-5 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होगी।
मध्य भारत में 12 जून तक अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होगी।
महाराष्ट्र में 13 जून तक अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होगी और उसके बाद 14-17 जून के दौरान कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा।
देश के बाकी हिस्सों में 17 जून 2026 तक अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होगा।
मॉनसून की प्रगति का क्या होगा असर
दिलचस्प बात यह है कि इस साल मॉनसून समय पर आ गया है। इससे किसानों को खरीफ की बुवाई में मदद मिलेगी। धान, मूंग, उड़द, मक्का, बाजरा, ज्वार, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई के लिए मॉनसून की बारिश बेहद जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मॉनसून की बारिश अच्छी रही तो इस साल खरीफ की फसल अच्छी होगी, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
लेकिन साथ ही भारी बारिश और बाढ़ की आशंका भी बनी हुई है। सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम, अरुणाचल प्रदेश, केरल और कर्नाटक में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ की स्थिति बन सकती है। नदियों में पानी का स्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है।
पिछले 24 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश कहां हुई
पिछले 24 घंटों (10 जून सुबह 8:30 बजे से 11 जून सुबह 8:30 बजे तक) में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई:
- सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल: मथाभांगा 16 सेमी
- अंडमान-निकोबार: मायाबंदर 13 सेमी
- तटीय आंध्र प्रदेश: बापतला 13 सेमी
- तेलंगाना: चंद्रुगोंडा (भद्राद्री कोठागुडेम जिला) 11 सेमी, जुलुरपाड (भद्राद्री कोठागुडेम जिला) 10 सेमी
- असम: धुबुरी 10 सेमी
- बिहार: सुपौल 10 सेमी
- अरुणाचल प्रदेश: ईटानगर 9 सेमी
- तमिलनाडु: नेय्योर (कन्याकुमारी जिला) 9 सेमी
- पूर्वी उत्तर प्रदेश: बांसगांव (गोरखपुर) 8 सेमी
मौसम विज्ञान के नजरिए से समझें यह स्थिति
अगर गौर करें तो इस बार मौसम में बदलाव के पीछे कई मौसम प्रणालियां काम कर रही हैं। पहली है पश्चिमी विक्षोभ, जो मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर लगभग 70°E देशांतर पर 30°N अक्षांश के उत्तर में एक गर्त (trough) के रूप में है। दूसरी है निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर हरियाणा और आसपास के इलाकों में एक ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण।
इसके अलावा, पश्चिमी-मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। एक गर्त पूर्व-मध्य अरब सागर से पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक दक्षिण कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना से होकर गुजर रहा है।
मौसमी गर्त समुद्र तल पर दक्षिण पंजाब से दक्षिण बांग्लादेश तक हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल से होकर गुजर रहा है।
इन सभी मौसम प्रणालियों के मिले-जुले प्रभाव से उत्तर भारत में तेज आंधी-तूफान, बिजली की कड़क और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है, जबकि दक्षिण और पूर्वी भारत में मॉनसून की बारिश हो रही है।
क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ
हालांकि मौसम विभाग की इस रिपोर्ट में मौसम विशेषज्ञों की सीधी टिप्पणी नहीं है, लेकिन पिछले सालों के अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि जून के दूसरे हफ्ते में पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना असामान्य नहीं है। लेकिन इस बार इसकी तीव्रता ज्यादा है, जिसकी वजह से तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है।
समझने वाली बात यह है कि पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर सर्दियों में सक्रिय होता है, लेकिन मॉनसून के शुरुआती दिनों में भी यह सक्रिय हो सकता है। जब पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून की नमी आपस में मिलती है, तो तेज बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति बनती है।
आने वाले दिनों में क्या रहेगी स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2-3 दिनों में मॉनसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों में फैल जाएगा। इसका मतलब है कि देश के एक बड़े हिस्से में बारिश शुरू हो जाएगी।
उत्तर भारत में 11-12 जून को तेज आंधी-तूफान रहने के बाद 13 जून से स्थिति में सुधार होने लगेगा। लेकिन फिर भी 13-17 जून तक छिटपुट बारिश और हल्की आंधी-तूफान की संभावना बनी रहेगी।
दक्षिण और पूर्वी भारत में अगले 7 दिनों तक (17 जून तक) मॉनसून की बारिश जारी रहेगी। केरल, कर्नाटक, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Points):
• Southwest Monsoon 2026 ने 11 जून को कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी है
• पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 11-13 जून तक उत्तर-पश्चिम भारत में तेज आंधी-तूफान (60-80 किमी/घंटा), बिजली की कड़क और ओलावृष्टि की चेतावनी
• दिल्ली-NCR में 11-12 जून को तेज तूफान और बारिश, तापमान में 5-7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट
• सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, केरल और कर्नाटक में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी
• तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और विदर्भ में 11-13 जून तक हीटवेव (लू) जारी रहेगी
• मछुआरों को 11-16 जून तक बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों में न जाने की सलाह
• किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह, पके फलों की तुरंत कटाई करें












