Punjab Govt Employees Protest: पंजाब के सरकारी कर्मचारी फिर से सड़कों पर हैं, लेकिन इस बार यह सिर्फ वेतन की कहानी नहीं है। बल्कि अधूरे वादे, लंबित महंगाई भत्ता (DA) बकाया, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली की मांग और राज्य सरकार एवं कर्मचारियों के बीच बढ़ती कानूनी लड़ाई।
मोहाली में हजारों कर्मचारी “पुराने स्केल, पुरानी पेंशन अते भत्ते बहाली मोर्चा” के बैनर तले इकट्ठा हुए और मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का प्रयास किया। प्रदर्शन तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस से झड़प हुई और प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन छोड़े गए। कर्मचारी संघों का दावा है कि 9 लोग घायल हुए (जिनमें एक महिला भी शामिल है) और तीन को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
देखा जाए तो यह मुद्दा अब केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि अदालत में भी लड़ा जा रहा है। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने लंबित DA और DR भुगतान के संबंध में कड़ी टिप्पणियां की हैं, जो इस सवाल को उठाती हैं कि राज्य ने कर्मचारी बकाया को कैसे संभाला है। इसी बीच, पंजाब पर कथित तौर पर हजारों करोड़ का भारी वित्तीय बोझ है, जो एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है कि क्या सरकार वास्तव में सभी कर्मचारी मांगों को पूरा कर सकती है।
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कौन कर रहा है प्रोटेस्ट?
मई महीने के आखिरी हफ्ते में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए:
- शिक्षक (Teachers)
- बिजली विभाग के कर्मचारी (Electricity Department Employees)
- सेवा केंद्र के कर्मचारी (Citizen Service Centers Employees)
सेवा केंद्र क्या होते हैं? यह वे सिटीजन सर्विस सेंटर हैं जहां जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मिलते हैं, विवाह पंजीकरण होता है, आर्म्स लाइसेंस बनते हैं।
प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा अंब साहिब के बाहर जमा हुए और CM हाउस तक मार्च करना चाहते थे। समझने वाली बात यह है कि सेवा केंद्र के लगभग 1,850 कर्मचारी पहले से ही 26 मई से हड़ताल पर थे। 3 जून को पंजाब में जॉब फेयर हो रहा था, वे उसके खिलाफ भी प्रोटेस्ट कर रहे थे और उसका बॉयकॉट कर रहे थे।
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प्रोटेस्ट की असली मांगें क्या हैं?
प्रोटेस्ट का नाम है: “पुराने स्केल, पुरानी पेंशन अते भत्ते बहाली मोर्चा”
इसका मतलब:
- पुराने स्केल = ओल्ड पे स्केल्स
- पुरानी पेंशन = ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS)
- भत्ते बहाली = भत्तों (Allowances) की बहाली/पुनर्स्थापना
- मोर्चा = आंदोलन
यह तीन प्रमुख मुद्दों का संयुक्त आंदोलन है। आइए इन्हें एक-एक करके समझें।
पे स्केल का मामला – 2016 से 2021 के बकाये
साल 2021 में छठा पंजाब पे कमीशन की सिफारिशें लागू हुईं। इसमें कहा गया कि जो भर्तियां हो रही हैं, उनका पे स्केल केंद्र सरकार के स्केल के बराबर हो। इस संशोधन में DA में बदलाव किए गए और लगभग 37 अन्य भत्तों की या तो समाप्ति हुई या युक्तिकरण (Rationalization) हुआ।
बेसिकली साल 2021 में यह पे स्केल एक तरह से रिवाइज हुए। लेकिन ये लागू हुए साल 2016 से। इसलिए कर्मचारियों को अब बकाया (Arrears) मिलने थे। यानी साल 2021 में तो नई सैलरी मिलनी शुरू हो गई, लेकिन 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक के वेतन संशोधन का बकाया क्या होगा?
| मुद्दा | अवधि | स्थिति |
|---|---|---|
| वेतन संशोधन बकाया | 1 जनवरी 2016 – 30 जून 2021 | लंबित |
| DA/DR बकाया | 1 जुलाई 2021 – 31 मार्च 2024 | लंबित |
| कुल अनुमानित राशि | – | ₹15,000 करोड़ |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि DA (Dearness Allowance) या DR (Dearness Relief) के भी बकाये लंबित हैं।
DA और DR क्या होते हैं?
Dearness Allowance (DA): यह अतिरिक्त राशि सरकारी कर्मचारियों को दी जाती है ताकि महंगाई (Inflation) या बढ़ती जीवन लागत को संतुलित किया जा सके।
Dearness Relief (DR): यह पेंशनधारकों को मिलता है। यह उनका DA का संस्करण है।
तो समझ गए? दो चीजें हैं:
- सैलरी रिवीजन का बकाया
- DA का बकाया
ये दोनों कर्मचारियों के लिए लंबित हैं। अगर गौर करें तो कुल मिलाकर ₹15,000 करोड़ की देनदारी राज्य सरकार पर है केवल DA बकाये के लिए।
ओल्ड पेंशन स्कीम का पंगा
दूसरा बड़ा मुद्दा है ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS)। साल 2004 में OPS को न्यू पेंशन स्कीम (NPS) से बदल दिया गया था।
OPS की विशेषताएं:
- रिटायरमेंट के बाद आखिरी सैलरी का 50% गारंटीड पेंशन
- कोई योगदान (Contribution) नहीं – पूरी तरह सरकार द्वारा वित्त पोषित
- महंगाई के अनुसार पेंशन में वृद्धि (DA लिंक्ड)
NPS की विशेषताएं:
- रिटायरमेंट लाभ वित्तीय बाजारों (Stock Market) से जुड़े
- कर्मचारी को अपनी सैलरी से योगदान देना होता है
- पेंशन राशि गारंटीड नहीं – मार्केट परफॉर्मेंस पर निर्भर
पंजाब ने भी 2004 में NPS को अपनाया था। लेकिन उसके बाद से लगातार प्रोटेस्ट रहे हैं और कर्मचारियों की मांग रही है कि OPS वापस लाई जाए।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार की आम आदमी पार्टी सरकार ने वादा भी किया था कि वे OPS को लागू करेंगे। और इस सरकार ने 18 नवंबर 2022 को एक नोटिफिकेशन भी जारी किया था कि OPS को लागू किया जाए।
लेकिन सितंबर 2025 तक कोई SOP ही नहीं आए। मतलब Standard Operating Procedures नहीं बने। यानी सिर्फ नोटिफिकेशन आया, यह लागू नहीं हुए बेसिकली।
UPS – बीच का रास्ता?
इस सबके बीच में UPS (Unified Pension Scheme) आ गई। इसमें थोड़े-थोड़े दोनों के तत्व थे – एक assured amount भी थी और एक NPS वाला एलिमेंट भी था जो मार्केट से जुड़ा था।
लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पंजाब सरकार के पास वित्तीय लचीलापन (Financial Flexibility) ही नहीं है कि वो OPS को बहाल कर सके। सरकार पर कर्ज है, देनदारियां हैं और राजस्व घाटा (Revenue Deficit) भी है।
समझने वाली बात यह है कि OPS बहुत महंगी है। अगर लागू की जाती है तो राज्य का वित्तीय बोझ और बढ़ जाएगा।
AAP सरकार पर कर्मचारियों के आरोप
मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के मन में कई शिकायतें हैं:
1. साढ़े चार साल में कोई सुनवाई नहीं: कर्मचारियों का कहना है कि पिछले साढ़े चार सालों में उनकी कोई शिकायत (Grievance) सुनी नहीं गई।
2. चंडीगढ़ से भी कम वेतन: चंडीगढ़ के कर्मचारियों को केंद्र सरकार ने जो नया पे पैटर्न दिया था, उसका विरोध AAP ने किया था। लेकिन अब वह अपने पंजाब के कर्मचारियों को उससे भी लगभग 40% कम सैलरी दे रही है।
3. सेवा केंद्र कर्मचारियों को ₹12,000 प्रति माह: कई सेवा केंद्र कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ ₹12,000 मासिक वेतन मिलता है। 2026 में सरकारी नौकरी में ₹12,000 प्रति माह क्या सैलरी है?
चिंता का विषय यह है कि जिस पार्टी ने “आम आदमी” के नाम पर राजनीति की, उसी की सरकार में सरकारी कर्मचारी इतनी कम सैलरी पर काम कर रहे हैं।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
कर्मचारी क्या चाहते हैं? उनकी मांगों की सूची:
- ओल्ड पे स्केल बहाल हो
- ओल्ड पेंशन स्कीम वापस लाई जाए
- लंबित भत्ते दिए जाएं
- 18% का DA रिलीज हो
- ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्र के भत्ते पुनः लागू हों
- कई शिक्षकों के खिलाफ जारी टर्मिनेशन नोटिस वापस लिए जाएं
- सेवा केंद्र कर्मचारियों की मासिक सैलरी ₹40,000 की जाए
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी मांगें बुनियादी हैं – वेतन, भत्ते, पेंशन। यह विलासिता की मांगें नहीं हैं।
हाई कोर्ट में पहुंचा मामला
चूंकि DA और DR नहीं मिल रहा था, इसलिए कई याचिकाकर्ताओं ने इस मुद्दे को कोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं ने यह पॉइंट किया कि राज्य कर्मचारियों और पेंशनधारकों को तो अपडेटेड DA और DR नहीं मिला, जबकि All India Services यानी IAS, IPS, IFS को वही फंड्स से लाभ मिल रहे हैं।
8 अप्रैल को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वो DA को बकाये सहित रिलीज करे।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
कोर्ट ने बड़ी महत्वपूर्ण बातें कहीं:
“वित्तीय कठिनाइयां बहाना नहीं हो सकतीं”: कोर्ट ने कहा कि आपका कारण यह नहीं हो सकता कि हम कर्मचारियों को उनके भत्ते नहीं दे सकते क्योंकि वित्तीय दबाव है।
“पे कमीशन स्वीकार करने के बाद बजट प्रावधान करना चाहिए था”: कोर्ट ने कहा कि राज्य को पे कमीशन की सिफारिशें स्वीकार करने के बाद बजट में प्रावधान कर लेना चाहिए था।
“DA महंगाई से लड़ता है”: कोर्ट ने कहा कि DA असल में महंगाई से लड़ने के लिए है। लेकिन अगर आप उस DA को भी रोककर बैठ जाओगे तो क्या फायदा होगा कर्मचारी को?
इससे साफ होता है कि न्यायपालय ने सरकार के रुख को स्वीकार नहीं किया और कर्मचारियों के पक्ष में खड़ी हुई।
₹15,000 करोड़ की देनदारी – वित्तीय संकट
अगर वित्तीय तनाव की बात करें, तो पंजाब सरकार पर ₹15,000 करोड़ की देनदारी है केवल लंबित DA बकाये के लिए। यह कोई छोटी रकम नहीं है।
कोर्ट थोड़ी राहत पंजाब सरकार को दे सकती है कि किस्तों (Installments) में इस बकाये को दिया जाए, क्योंकि एकमुश्त देना वाकई मुश्किल है।
आप खुद सोचिए – ₹15,000 करोड़ सिर्फ बकाये के ऊपर! और यह प्रोटेस्ट नए नहीं हैं। मार्च 2026 में भी शिक्षक यूनियन, पंजाब SCCF, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन, आंगनवाड़ी वर्कर्स ने मोहाली में प्रोटेस्ट किया था।
मांग वही थी – उनमें से काफी लोग कॉन्ट्रैक्ट पर हैं और वे रेगुलर एम्प्लॉयमेंट चाहते हैं। फिर 7 मई को मोहाली के म्युनिसिपल कर्मचारियों ने भी प्रोटेस्ट किया था। बड़ी मांग थी कि सैनिटेशन वर्कर्स का रेगुलराइजेशन हो।
और मुख्य समस्या वेतन की – बहुत सारे सैनिटेशन वर्कर ₹10,000 प्रति माह पर काम करते हैं, जबकि यह ₹26,000 प्रति माह होना चाहिए।
चुनावी राजनीति का कोण
चुनाव बहुत ज्यादा दूर नहीं हैं। अगले साल लगभग फरवरी के महीने में विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में कांग्रेस के राजा वरिंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को अटैक किया। फिर BJP के तरुण जुग ने भी बयान दिया।
लेकिन दिलचस्प एंगल है लोकल बॉडी के चुनाव। इन्हें अक्सर “सेमीफाइनल” कह दिया जाता है क्योंकि राज्य चुनावों से पहले म्युनिसिपालिटी के चुनावों में जो होता है, उससे बहुत कुछ पता लग जाता है।
इस बार आम आदमी पार्टी की जीत हुई। उन्होंने 1,977 वार्डों में से 958 वार्ड जीते (यानी 48%)। दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस 397 वार्डों के साथ। चौथे नंबर पर इंडिपेंडेंट 251 पर। और इंडिपेंडेंट से भी नीचे आए शिरोमणि अकाली दल 192 के साथ।
BJP पांचवें स्थान पर रही। लेकिन उनका टैली पिछली बार 49 था, इस बार 172 है। तो उन्होंने अपना फुटप्रिंट बढ़ाया है।
इतिहास का पैटर्न – लोकल चुनाव ≠ राज्य चुनाव
जबकि इन चुनावों को सेमीफाइनल माना जाता है, पिछले दो बार का पैटर्न यह है कि मुख्य चुनावों (यानी विधानसभा चुनाव) से पहले जो लोकल बॉडी के चुनाव होते हैं, उसमें जो जीतता है, उसकी सरकार नहीं आती।
यह पिछले दो बार का पैटर्न है। हो सकता है पैटर्न रिपीट हो, या हो सकता है AAP सरप्राइज करे और लोकल बॉडी चुनाव भी जीते और राज्य विधानसभा चुनाव भी।
उम्मीद की किरण यह है कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है। अगर AAP सरकार ने कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया, तो चुनाव में इसका असर दिखेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब सरकारी कर्मचारियों ने “पुराने स्केल, पुरानी पेंशन अते भत्ते बहाली मोर्चा” के तहत मोहाली में प्रोटेस्ट किया; CM हाउस तक मार्च करने पर पुलिस ने वाटर कैनन छोड़े, 9 घायल (1 महिला सहित), 3 अस्पताल में भर्ती
• मुख्य मांगें: 2016-2021 के पे स्केल बकाये, जुलाई 2021-मार्च 2024 के DA/DR बकाये (कुल ₹15,000 करोड़), ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली जिसका AAP ने 18 नवंबर 2022 को नोटिफिकेशन जारी किया था लेकिन अभी तक SOP नहीं बने
• पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 8 अप्रैल को सख्त टिप्पणी की – “वित्तीय कठिनाइयां बहाना नहीं”, “पे कमीशन के बाद बजट प्रावधान करना चाहिए था”, IAS/IPS को तो लाभ मिल रहे हैं जबकि राज्य कर्मचारियों को नहीं
• फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव, AAP ने हाल के लोकल बॉडी चुनाव में 48% वार्ड जीते लेकिन पिछले दो बार का पैटर्न: लोकल बॉडी जीतने वाली पार्टी राज्य चुनाव नहीं जीती
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