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The News Air - Breaking News - RBI Repo Rate Unchanged: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, होम लोन EMI में राहत

RBI Repo Rate Unchanged: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, होम लोन EMI में राहत

भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, GDP का अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया गया।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
बुधवार, 5 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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RBI Repo Rate Unchanged
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RBI Monetary Policy Committee Meeting – आम आदमी के लिए राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को लगातार तीसरी बार अपनी मुख्य ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इसका सीधा मतलब है कि आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई इजाफा नहीं होगा।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मुद्रा नीति का ऐलान करते हुए आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मुद्रा नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर Neutral रुख के साथ स्थिर रखने का फैसला किया है।

देखा जाए तो यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिमी एशिया के संकट के कारण ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। लेकिन RBI ने संतुलित रुख अपनाते हुए स्थिरता को प्राथमिकता दी।

🔍 यह भी पढ़ें- NFHS-6 Report: हर तीसरा बच्चा कुपोषित! Anemia Data क्यों गायब?

रेपो रेट क्या है और आप पर क्या असर?

समझने वाली बात यह है कि रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर बढ़ती है, तो बैंक भी अपने ग्राहकों से ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। और जब घटती है, तो कर्ज सस्ता हो जाता है।

आपकी जेब पर असर:

लोन का प्रकारमौजूदा स्थितिEMI पर असर
होम लोनकोई बदलाव नहींEMI स्थिर रहेगी
कार/ऑटो लोनकोई बदलाव नहींEMI स्थिर रहेगी
पर्सनल लोनकोई बदलाव नहींEMI स्थिर रहेगी
बिजनेस लोनकोई बदलाव नहींEMI स्थिर रहेगी
सेविंग अकाउंटकोई बदलाव नहींब्याज दर स्थिर
FD/RDकोई बदलाव नहींरिटर्न स्थिर

अगर गौर करें तो अगर आपने हाल में घर, गाड़ी या कोई अन्य कर्ज लिया है, तो यह खबर आपके लिए राहत देने वाली है। आपकी मासिक किस्त में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

महंगाई के बावजूद दरें क्यों नहीं बढ़ाईं?

यहां ध्यान देने वाली बात है कि जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर RBI के 4 फीसदी के लक्ष्य को पार करके 4.38 फीसदी पर पहुंच गई थी।

तो फिर दरें क्यों नहीं बढ़ाईं?

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RBI का तर्क:

  • महंगाई अस्थायी कारणों से बढ़ी है
  • खाद्य पदार्थों की कीमतें मौसमी कारणों से बढ़ी हैं
  • कोर इन्फ्लेशन (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) नियंत्रण में है
  • अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए स्थिर दरें जरूरी हैं

दिलचस्प बात यह है कि RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर का अनुमान घटाकर 5.0 फीसदी कर दिया है। यानी आने वाले महीनों में महंगाई कम होने की उम्मीद है।

GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा

और बस यहीं से शुरू हुई असली अच्छी खबर। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है।

क्वार्टर-वाइज ग्रोथ का अनुमान:

तिमाहीGDP ग्रोथ अनुमान
Q1 (अप्रैल-जून 2026)6.8%
Q2 (जुलाई-सितंबर 2026)6.9%
Q3 (अक्टूबर-दिसंबर 2026)6.6%
Q4 (जनवरी-मार्च 2027)6.5%
पूरे साल का औसत6.7%

राहत की बात यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज गति से बढ़ रहा है।

महंगाई का अनुमान घटा

RBI ने FY27 के लिए महंगाई के अनुमान में भी राहत दी है:

महंगाई का तिमाही अनुमान:

तिमाहीपुराना अनुमाननया अनुमान
Q1 FY275.2%5.0%
Q2 FY275.3%5.1%
Q3 FY275.1%4.9%
Q4 FY275.0%4.8%
साल भर औसत5.15%5.0%

समझने वाली बात यह है कि महंगाई धीरे-धीरे घटने का रुझान है। यह आम आदमी की जेब के लिए अच्छी खबर है।

Neutral Stance का क्या मतलब?

पहले RBI का रुख “Accommodative” (ढीला) था, फिर “Withdrawal of Accommodation” (कसाव) रहा, और अब “Neutral” है।

Neutral Stance का मतलब:

  • RBI न तो दरें बढ़ाने की जल्दी में है
  • न ही दरें घटाने का दबाव है
  • हालात के अनुसार फैसले लिए जाएंगे
  • लचीलापन बना रहेगा

यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह बदलाव RBI की सोच में आए परिवर्तन को दर्शाता है। अब केंद्रीय बैंक “वेट एंड वॉच” (प्रतीक्षा और निगरानी) की नीति अपना रहा है।

बैंकों की दरों पर क्या असर?

अगर गौर करें तो RBI के इस फैसले का सीधा असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ता है।

आने वाले दिनों में क्या होगा:

कर्ज लेने वालों के लिए:

  • MCLR (Marginal Cost of Funds based Lending Rate) में कोई बदलाव नहीं
  • मौजूदा EMI वैसी ही रहेगी
  • नए कर्ज भी मौजूदा दरों पर मिलेंगे
  • प्री-पेमेंट की योजना बना रहे हैं तो यही सही समय है

बचत करने वालों के लिए:

  • सेविंग अकाउंट की ब्याज दरें स्थिर
  • FD की दरों में तुरंत कोई बदलाव नहीं
  • हालांकि लंबी अवधि में दरें घट सकती हैं
  • इसलिए अभी लंबी अवधि की FD करना फायदेमंद हो सकता है
ग्लोबल कारकों का असर

दिलचस्प बात यह है कि RBI के फैसले पर सिर्फ घरेलू हालात का ही असर नहीं होता।

वैश्विक कारक जो RBI देख रहा है:

  1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति:
    • अमेरिका ने भी दरें स्थिर रखी हैं
    • डॉलर की मजबूती का रुझान
    • विदेशी निवेश पर असर
  2. पश्चिम एशिया संकट:
    • तेल की कीमतों में अनिश्चितता
    • भारत तेल का बड़ा आयातक है
    • कच्चे तेल के दाम बढ़े तो महंगाई बढ़ सकती है
  3. चीन की अर्थव्यवस्था:
    • चीन में सुस्ती का असर
    • भारतीय निर्यात पर दबाव
    • लेकिन घरेलू मांग मजबूत
  4. यूरोप में मंदी:
    • यूरोपीय देशों में विकास धीमा
    • लेकिन भारत पर सीधा असर सीमित
आम आदमी के लिए क्या मायने रखता है?

समझने वाली बात यह है कि RBI की मुद्रा नीति का सीधा असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

अच्छी खबर:
✅ आपकी EMI नहीं बढ़ेगी
✅ नया घर या गाड़ी खरीदने की योजना है? ब्याज दरें स्थिर हैं
✅ महंगाई घटने की उम्मीद, राहत मिल सकती है
✅ अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे

सावधानियां:
⚠️ FD की ब्याज दरें आगे घट सकती हैं
⚠️ खाद्य पदार्थों की कीमतें मौसम पर निर्भर
⚠️ तेल की कीमतें वैश्विक हालात से तय होंगी

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

राहत की बात यह है कि ज्यादातर अर्थशास्त्री RBI के फैसले से सहमत हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री का कहना है: “यह संतुलित फैसला है। विकास और महंगाई दोनों का ध्यान रखा गया है।”

आईसीआईसीआई बैंक के विश्लेषक: “Neutral stance से RBI को लचीलापन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर किसी भी दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।”

एक स्वतंत्र अर्थशास्त्री: “GDP का अनुमान बढ़ना सकारात्मक संकेत है। भारत की विकास गाथा जारी रहेगी।”

आगे क्या होगा?

यहां ध्यान देने वाली बात है कि RBI अगली MPC बैठक अक्टूबर 2026 में होगी।

तब तक क्या देखना है:

  1. मानसून का प्रदर्शन:
    • अच्छी बारिश = खाद्य उत्पादन बढ़ेगा = महंगाई घटेगी
    • खराब मानसून = खाद्य महंगाई का खतरा
  2. त्योहारी सीजन में मांग:
    • दिवाली-दशहरा के समय खर्च कैसा रहता है
    • उपभोक्ता भावना का संकेत मिलेगा
  3. वैश्विक तेल बाजार:
    • कच्चे तेल के दाम स्थिर रहे तो महंगाई काबू में
    • बढ़े तो RBI के लिए चुनौती
  4. सरकारी खर्च:
    • बजट के वादे कैसे पूरे होते हैं
    • राजकोषीय घाटा नियंत्रण में रहता है या नहीं
मुख्य बातें (Key Points)
  • RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा
  • होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन की EMI में कोई बदलाव नहीं
  • MPC ने सर्वसम्मति से Neutral रुख अपनाया
  • GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% किया गया
  • महंगाई का अनुमान घटाकर 5.0% किया गया
  • जून में खुदरा महंगाई 4.38% पर पहुंची थी
  • पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा कीमतों पर नजर
  • बैंक अपनी उधारी दरों में कोई बदलाव नहीं करेंगे
  • अगली MPC बैठक अक्टूबर 2026 में होगी

 

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: RBI ने रेपो रेट क्यों नहीं बदला?

उत्तर: RBI ने महंगाई और विकास दोनों को संतुलित करने के लिए रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा। हालांकि जून में महंगाई 4.38% थी, लेकिन यह अस्थायी कारणों से थी। RBI को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में महंगाई घटकर 5% पर आ जाएगी। साथ ही, अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए स्थिर दरें जरूरी हैं।

प्रश्न 2: मेरी EMI पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: अगर आपने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है, तो आपकी EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। रेपो रेट स्थिर रहने से बैंक भी अपनी उधारी दरें नहीं बदलेंगे। यह मौजूदा और नए दोनों तरह के कर्जदारों के लिए राहत की खबर है।

प्रश्न 3: RBI का Neutral Stance क्या है और इसका क्या मतलब है?

उत्तर: Neutral Stance का मतलब है कि RBI न तो दरें बढ़ाने की जल्दी में है और न ही घटाने का दबाव है। केंद्रीय बैंक हालात के अनुसार लचीले फैसले लेगा। पहले RBI का रुख “Accommodative” या “Withdrawal of Accommodation” था, लेकिन अब बीच का रास्ता अपनाया गया है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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