Amritsar Holy City Meat Ban: अमृतसर नगर निगम की सीमा में मछली और मांस का लाइसेंसधारी कारोबार करने वाले एक व्यापारी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। व्यापारी ने पंजाब सरकार के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है जिसके तहत अमृतसर के ‘चार दीवारी’ (वाल्ड सिटी) इलाके को “पवित्र शहर” (Holy City) घोषित किया गया है और वहां मीट, मछली तथा कच्चे मांस उत्पादों की बिक्री और व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
‘कुलदीप फिश कंपनी’ नामक फर्म, जो नगर निगम द्वारा जारी वैध लाइसेंस के तहत पिछले कई सालों से यह कारोबार कर रही है, ने 15 दिसंबर 2025 के सरकारी नोटिफिकेशन और उसके बाद जारी प्रतिबंध के आदेशों को कानूनी चुनौती दी है। देखा जाए तो यह मामला व्यापार की आजादी और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का सवाल उठाता है।
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बिना पुनर्वास के कारोबार बंद करने का आरोप
पिटीशनर का कहना है कि सरकार के इस कदम से उनके कानूनी और लाइसेंसधारी कारोबार पर बिना किसी पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy), वैकल्पिक जगह दिए या उचित समय दिए पूर्ण रोक लगा दी गई है। समझने वाली बात यह है कि ये व्यापारी सालों से नगर निगम को नियमित रूप से फीस और चार्ज जमा करवा रहे थे।
इसके बावजूद, बिना कोई ठोस कानूनी आधार दिखाए उनके कारोबारी स्थान को सील कर दिया गया और जबरदस्ती कार्रवाई शुरू कर दी गई। दिलचस्प बात यह है कि व्यापारी का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई एकतरफा है और इसमें प्रभावित लोगों की बात सुने बिना फैसला ले लिया गया।
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संविधान के अनुच्छेद 19, 21 और 14 का उल्लंघन
पिटीशन में संवैधानिक हकों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कारोबार करने की स्वतंत्रता, अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार और अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
वकील ने दलील दी कि किसी भी मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए। यहां ध्यान देने वाली बात है कि व्यापारी यह नहीं कह रहे कि उनका कारोबार गैरकानूनी था – उनके पास वैध लाइसेंस था और वे नियमित टैक्स चुका रहे थे।
‘पवित्र शहर’ की कोई कानूनी परिभाषा नहीं
व्यापारी द्वारा दायर पिटीशन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी उठाया गया है कि किसी भी कानून, नियम या एक्ट में “पवित्र शहर” (Holy City) या “चार दीवारी” (Walled City) शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
अगर गौर करें तो यह एक बड़ा कानूनी सवाल है। महज कार्यकारी नोटिफिकेशन के सिर पर कानूनी व्यापारिक गतिविधियों पर ऐसा पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। पिटीशनर ने आरोप लगाया कि यह फैसला बिना किसी तर्कसंगत आधार के सिर्फ खास क्षेत्र के व्यापारियों को निशाना बनाकर लिया गया है।
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हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
पिटीशन में मांग की गई है कि इस नोटिफिकेशन और सीलिंग की कार्रवाई को रद्द किया जाए, या फिर कार्रवाई करने से पहले प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास और उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए एक निष्पक्ष नीति बनाई जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की अगुवाई वाले डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को नोटिस ऑफ मोशन (स्टे के नोटिस समेत) जारी कर दिया है। इससे साफ होता है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
धार्मिक भावना बनाम आजीविका का अधिकार
यह मामला एक संवेदनशील मुद्दे को छूता है। एक तरफ अमृतसर में स्वर्ण मंदिर जैसी पवित्र धार्मिक स्थली है, जिसकी मर्यादा और पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। दूसरी तरफ, सैकड़ों परिवार इस व्यापार से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।
सवाल उठता है कि क्या बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के एकदम से कारोबार बंद करवाना उचित है? क्या सरकार को पहले प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए थी?
आगे क्या होगा?
इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 22 जून को होगी। तब तक पंजाब सरकार को अपना जवाब तैयार करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले में क्या तर्क देती है और अदालत इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या फैसला सुनाती है।
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मुख्य बातें (Key Points)
• अमृतसर के वाल्ड सिटी को ‘पवित्र शहर’ घोषित कर मांस-मछली बिक्री पर प्रतिबंध
• लाइसेंसधारी व्यापारी कुलदीप फिश कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी
• बिना पुनर्वास नीति के कारोबार बंद करने को बताया संविधान का उल्लंघन
• हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया, 22 जून को अगली सुनवाई













