Abhishek Banerjee Attack: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले पर गहरा दुख जताया है। शनिवार रात पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षा प्रबंधों और उसके बाद अस्पताल में अभिषेक के हुए इलाज के हालात पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि पर जानलेवा हमला किया गया और बाद में उन्हें डॉक्टरी सहायता के लिए भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।
ममता बनर्जी का यह बयान राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा गया है। देखा जाए तो एक सांसद पर इस तरह का हमला न सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा हमला है।
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अस्पताल प्रशासन पर सीधे सवाल
ममता बनर्जी ने अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर अभिषेक को अस्पताल में भर्ती करने की सच में कोई जरूरत नहीं थी, तो उन्हें पहले ITU (Intensive Treatment Unit) में क्यों ले जाया गया? वहां उन्हें करीब दो घंटे निगरानी के तहत रखा गया और कई मेडिकल टेस्ट तथा स्कैन करवाने की सलाह क्यों दी गई?”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी ने बताया कि अभिषेक रात 8.15 बजे से लेकर करीब 11 बजे तक डॉक्टरों की निगरानी में रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर डॉक्टरों ने इलाज और निगरानी को जरूरी समझा था, तो किसी भी बाहरी अथॉरिटी को उस फैसले में दखल नहीं देना चाहिए था।
यह बयान संकेत करता है कि शायद किसी बाहरी दबाव में अभिषेक का इलाज प्रभावित हुआ या फिर उन्हें जल्दी अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। अगर गौर करें तो यह चिकित्सा नैतिकता का मामला भी बनता है।
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चेहरे, पीठ और छाती पर गंभीर चोटें
मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए TMC सुप्रीमो ने कहा कि डॉक्टरों ने अभिषेक के शरीर पर कई चोटों के निशान देखे थे और तुरंत जांच की सिफारिश की थी। उनके चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर कई गंभीर चोटें लगी हैं।
डॉक्टरों ने फ्रैक्चर, आंतरिक खून बहने (Internal Bleeding) और आंतरिक अंगों को होने वाले नुकसान का पता लगाने के लिए एक्स-रे और स्कैन करवाने की सलाह दी थी। समझने वाली बात यह है कि ऐसी चोटें कितनी गंभीर हो सकती हैं।
ममता बनर्जी ने चिंता जताई कि इस हमले के नतीजे बहुत भयानक हो सकते थे। उन्होंने कहा, “मुझे बताया गया है कि अगर मौके पर अभिषेक के सिर पर हेलमेट नहीं रखा गया होता, तो यह हमला जानलेवा साबित हो सकता था।”
पत्थरबाजी और शारीरिक हमले के कारण अभिषेक की छाती और पसलियों के हिस्से पर काफी चोटें लगी हैं। दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट हेलमेट ने उनकी जान बचाई, जो उनके सुरक्षा कर्मियों ने मौके पर ही पहनाया था।
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पुलिस प्रशासन और सुरक्षा पर तीखे हमले
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस के पास अभिषेक के इस दौरे की पहले से पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद सुरक्षा प्रबंध नाकाम रहे, जिससे साफ है कि हिंसा भड़काने के लिए बाहर से लोग लाए गए थे।
उन्होंने कहा, “सियासी लड़ाई सियासी तौर पर ही लड़ी जानी चाहिए। सियासी मतभेदों का जवाब हिंसा, धमकी, हथियारों या खौफ से नहीं दिया जा सकता। लोकतंत्र जनता के समर्थन और बहस से चलता है, न कि गुंडागर्दी से।”
यह बयान उस राजनीतिक संस्कृति पर सीधा प्रहार है जहां विरोधियों को डराने-धमकाने और हिंसा का सहारा लिया जाता है। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का लंबा इतिहास रहा है।
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डॉक्टरों पर राजनीतिक दबाव का आरोप
ममता बनर्जी ने सबसे बड़ी चिंता इस बात पर जताई कि जख्मी मरीज के इलाज को लेकर डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर सियासी दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि अब पार्टी ने फैसला किया है कि अभिषेक का इलाज उनके भरोसेमंद और पारिवारिक डॉक्टरों की देखरेख में जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि अभिषेक को आंखों की पुरानी तकलीफ भी है, जिसके कारण इन चोटों की बारीकी से जांच होनी लाजमी है। यह खुलासा चिंताजनक है क्योंकि आंखों के मरीज को सिर और चेहरे पर चोट बेहद खतरनाक हो सकती है।
राष्ट्रीय नेताओं ने जताई चिंता
ममता बनर्जी ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल समेत देश के कई प्रमुख सियासी नेताओं ने फोन करके इस घटना पर चिंता जाहिर की है।
यह दिखाता है कि यह हमला केवल पश्चिम बंगाल का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। विपक्षी एकता के संदर्भ में भी यह घटना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि TMC ऐसी धमकियों से डरने वाली नहीं है और अपने सारे तयशुदा सियासी कार्यक्रमों और जन संपर्क मुहिमों को जारी रखेगी। इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।
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मुख्य बातें (Key Points)
- ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद सुरक्षा प्रबंध और अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए
- अभिषेक के चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर गंभीर चोटें, हेलमेट ने बचाई जान
- ममता ने कहा कि डॉक्टरों पर सियासी दबाव डाला गया, इलाज में दखलंदाजी हुई
- राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित राष्ट्रीय नेताओं ने जताई चिंता
- TMC ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से देंगे जवाब, धमकियों से नहीं डरेंगे













