Paddy Transplantation Punjab: पंजाब में 1 जून से झोने (धान) की बुआई शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने इस लुआई को कुल तीन चरणों में पूरा करने का फैसला किया है। पहले चरण में गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर और मोहाली जिले शामिल हैं। इसी बीच, लुआई को लेकर बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर मानसा और बठिंडा के रेलवे स्टेशनों पर रात में आने वाली ट्रेनों के जरिए पहुंचने लगे हैं।
धान की फसल पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हर साल मई के अंत और जून की शुरुआत में राज्य भर में झोने की रोपाई का काम शुरू होता है। देखा जाए तो यह सीजन न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए भी रोजगार का बड़ा जरिया बनता है।
🔍 यह भी पढ़ें- Sanitation Workers Strike Withdrawn: पंजाब सरकार से सफल वार्ता के बाद हड़ताल वापस, एक महीने में बनेगी समिति
तीन चरणों में बंटी है लुआई की योजना
पंजाब सरकार ने झोने की लुआई को व्यवस्थित तरीके से करने के लिए तीन चरणों में बांटा है। पहले चरण में 1 जून से गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर और मोहाली जिलों में लुआई शुरू होगी। ये जिले मुख्य रूप से माझा और दोआबा क्षेत्र में आते हैं।
दूसरे चरण के तहत मालवा क्षेत्र में यह लुआई 5 जून से शुरू होगी। इसमें बठिंडा, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फिरोजपुर और फाजिल्का जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र पंजाब के कपास बेल्ट के रूप में भी जाना जाता है, लेकिन यहां धान की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है।
तीसरे चरण में 9 जून से मानसा, बरनाला, मोगा, संगरूर, जालंधर, पटियाला, मलेरकोटला, लुधियाना, कपूरथला और नवांशहर जिलों में झोने की लुआई शुरू होगी। यह सबसे बड़ा चरण है जिसमें सबसे ज्यादा जिले शामिल हैं।
समझने वाली बात यह है कि यह चरणबद्ध तरीका इसलिए अपनाया जाता है ताकि मजदूरों की कमी न हो और पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित रहे।
🔍 यह भी पढ़ें- ED Raid Royale Estate Group: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंडीगढ़-पंजाब में छापेमारी
रेलवे स्टेशनों पर शुरू हुई मजदूरों की आवक
झोने की लुआई को लेकर बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर मानसा और बठिंडा के रेलवे स्टेशनों पर रात में आने वाली ट्रेनों (जैसे पंजाब मेल और आभा एक्सप्रेस) के जरिए पहुंचने लगे हैं। ये मजदूर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन प्रवासी मजदूरों को सुबह होते ही पिंडों से आए किसान अपने-अपने साधनों के जरिए अपने खेतों पर ले जा रहे हैं। यह प्रक्रिया हर साल दोहराई जाती है और एक तरह का अनौपचारिक लेबर मार्केट बन जाता है।
प्रवासी मजदूरों ने झोने की लुआई के लिए पूरी तैयारी कर ली है। जबकि दूसरी ओर, पिंडों के स्थानीय मजदूरों ने भी झोना लगाने के लिए किसानों के साथ हर तरह की साझेदारी कायम की हुई है।
🔍 यह भी पढ़ें- 47 डिग्री पर पहुंचा पंजाब: Severe Heatwave Alert जारी, बुजुर्गों-बच्चों को खतरा
सीधी बिजाई का रुझान घटा, हाथ से लुआई की मांग बढ़ी
पिंडों से हासिल किए गए विवरणों से पता चला है कि इस बार किसानों में झोने की सीधी बिजाई (Direct Seeding of Rice – DSR) का रुझान पहले की तुलना में काफी घटा है। अभी भी अनेक पिंडों में किसानों द्वारा स्थानीय पंजाबी मजदूरों और प्रवासी मजदूरों के साथ झोने की इस लुआई के लिए लगातार संपर्क कायम किया जा रहा है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि DSR तकनीक में पानी की कम खपत होती है और लागत भी कम आती है। लेकिन इसमें खरपतवार की समस्या ज्यादा होती है और उत्पादन भी थोड़ा कम मिलता है। इसलिए कई किसान अभी भी पारंपरिक तरीके से पनीरी लगाना पसंद करते हैं।
मजदूरों की कमी नहीं होगी: किसान यूनियन
पंजाब किसान यूनियन के सूबा सीनियर उपप्रधान गोरा सिंह भैणीबाघा ने कहा कि इस बार किसानों को हाथ से झोना लगाने वाली लेबर की कोई बड़ी कमी नहीं होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में जब लुआई का जोर बढ़ेगा तो और प्रवासी मजदूरों के पहुंचने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि झोने के लिए किसानों की पनीरी बिल्कुल तैयार है। पिछले दो दिनों से पड़ रही हल्की बारिश ने ठंडक के कारण पनीरी को और निरोई (मजबूत) कर दिया है। यह अच्छी खबर है क्योंकि निरोई पनीरी की रोपाई आसानी से होती है और उसकी जड़ें जल्दी पकड़ती हैं।
देखा जाए तो मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए यह राहत भरी बारिश साबित हुई है।
🔍 यह भी पढ़ें- 47 डिग्री पर पहुंचा पंजाब: Severe Heatwave Alert जारी, बुजुर्गों-बच्चों को खतरा
बणांवाला ताप घर से बिजली सप्लाई का भरोसा
इसी दौरान वेदांता पावर द्वारा मानसा नजदीक पिंड बणांवाला में निजी भागीदारी के तहत लगे उत्तरी भारत के सबसे बड़े ताप घर के प्रबंधकों का कहना है कि झोने के सीजन को मुख्य रखते हुए लगातार बिजली सप्लाई जारी रखी जाएगी। इसके लिए पहले से प्रबंध पूरे किए हुए हैं।
1980 मेगावाट का यह ताप घर पंजाब में बिजली सप्लाई का इस वक्त सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। समझने वाली बात यह है कि धान की लुआई के दौरान बिजली की मांग बहुत बढ़ जाती है क्योंकि ट्यूबवेल लगातार चलते रहते हैं। अगर बिजली की सप्लाई बाधित हो तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।
इसलिए सरकार और बिजली कंपनियां इस दौरान विशेष तैयारी करती हैं ताकि किसानों को निर्बाध बिजली मिलती रहे।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब में 1 जून से तीन चरणों में झोने की लुआई शुरू होगी
- पहले चरण में गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर और मोहाली शामिल
- मानसा और बठिंडा रेलवे स्टेशनों पर प्रवासी मजदूरों की आवक शुरू हो गई है
- किसानों में सीधी बिजाई का रुझान घटा है, हाथ से लुआई की मांग बढ़ी
- बणांवाला ताप घर से निर्बाध बिजली सप्लाई का भरोसा













