Summer Vacation Courts Punjab: गर्मियों की छुट्टियों की शुरुआत होते ही पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सभी सेशन कोर्ट (जिला अदालतें) और निचली अदालतों का रोजाना का आम कामकाज 1 जून से लेकर 30 जून तक पूरी तरह बंद रहेगा। समझने वाली बात यह है कि इस दौरान दीवानी मामलों की रोजाना सुनवाई नहीं होगी, जबकि फौजदारी (क्रिमिनल) अदालतें 15 जून तक नियमित रूप से काम करती रहेंगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सेशन जज हरप्रीत कौर रंधावा ने बताया कि 16 जून से 30 जून तक फौजदारी मामलों में भी नियमित सुनवाई स्थगित रहेगी। हालांकि जरूरी मामलों को छोड़कर अदालतें पूरी तरह से बंद रहेंगी। देखा जाए तो यह व्यवस्था हर साल की तरह इस बार भी लागू की गई है, लेकिन इस बार जमानत और हंगामी मामलों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
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दीवानी और फौजदारी मामलों में अलग-अलग व्यवस्था
छुट्टियों के इस पूरे महीने के दौरान अदालती कामकाज का एक खास पैटर्न तय किया गया है। दीवानी मामलों की सुनवाई पूरे जून महीने यानी 1 से 30 जून तक पूरी तरह बंद रहेगी। वहीं फौजदारी अदालतों के लिए दो चरणों में व्यवस्था की गई है।
पहले चरण में 1 जून से 15 जून तक क्रिमिनल कोर्ट नियमित रूप से चलती रहेंगी और रोजाना के मामलों की सुनवाई होती रहेगी। लेकिन 16 जून के बाद से 30 जून तक फौजदारी मामलों में भी रेगुलर सुनवाई मुलतवी कर दी जाएगी।
अगर गौर करें तो यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि जजों और अदालती कर्मचारियों को भी गर्मियों की छुट्टी मिल सके, जबकि जरूरी मामले भी प्रभावित न हों।
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जमानत और हंगामी मामलों के लिए विशेष रोस्टर तैयार
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि छुट्टियों के दौरान भी न्याय व्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं होगी। जमानत की अर्जियां, स्टे (रोक के मामले) और अन्य हंगामी मामलों समेत जरूरी केसों की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न अदालतों के न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) की ड्यूटी रोस्टर तैयार की गई है।
एक विस्तृत सूची भी जारी की गई है, जिसके अनुसार नामित किए गए जज निर्धारित तिथियों पर जरूरी मामलों की सुनवाई करेंगे। इससे साफ होता है कि अदालती छुट्टियों के दौरान मुकदमेबाजों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विशेष रूप से ऐसे मामले जहां किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल हो, या कोई तत्काल राहत की जरूरत हो, वहां वेकेशन कोर्ट (छुट्टियों वाली अदालतें) काम करेंगी। दिलचस्प बात यह है कि इन विशेष अदालतों के लिए अलग से जजों और स्टाफ की तैनाती की गई है।
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सरकारी पक्ष के लिए भी तैयार है व्यवस्था
जिला अटॉर्नी दिनेश कुमार वर्मा ने बताया कि छुट्टियों के इन दिनों में वेकेशन कोर्ट के सामने सरकार का पक्ष पेश करने के लिए प्रॉसिक्यूशन विभाग (इस्तगासा विभाग) की ओर से सरकारी वकीलों की ड्यूटियां भी लगाई गई हैं।
यह व्यवस्था इसलिए जरूरी है ताकि सरकार से जुड़े हुए जरूरी मामलों को बिना किसी रुकावट के सही तरीके से निपटाया जा सके। जैसे कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मामला हो, या किसी सरकारी जमीन से जुड़ा विवाद हो, तो उसमें सरकारी पक्ष की मौजूदगी जरूरी होती है।
समझने वाली बात है कि इस पूरी व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि न्याय में देरी न हो, भले ही अदालतों की नियमित छुट्टियां हों।
किन मामलों की होगी सुनवाई?
वेकेशन कोर्ट में मुख्य रूप से निम्न प्रकार के मामलों की सुनवाई होगी:
जमानत की अर्जियां: जेल में बंद व्यक्तियों की जमानत याचिकाएं प्राथमिकता से सुनी जाएंगी।
स्टे ऑर्डर: किसी फैसले या कार्रवाई को रोकने से संबंधित तत्काल मामले।
हंगामी राहत: ऐसे मामले जहां देरी से किसी पक्ष को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
रिमांड मामले: पुलिस हिरासत या न्यायिक हिरासत से जुड़े मामले।
हैबियस कॉर्पस: अवैध हिरासत से संबंधित याचिकाएं।
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क्या है पूरा मामला?
भारत की न्याय व्यवस्था में हर साल गर्मियों में अदालतों की छुट्टियां होती हैं। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब गर्मियों के दौरान अधिकतर न्यायिक कार्य धीमे कर दिए जाते थे। हालांकि आज के दौर में इस व्यवस्था पर कई बार सवाल भी उठे हैं कि जब सामान्य नागरिकों को छुट्टी नहीं मिलती, तो अदालतें क्यों बंद रहें।
लेकिन न्यायपालिका का तर्क है कि जजों और अदालती स्टाफ को भी आराम की जरूरत होती है, और इसी दौरान वे लंबित फैसलों को लिखने और केस की तैयारी में समय लगाते हैं। साथ ही, वेकेशन कोर्ट की व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाता है कि जरूरी मामलों में देरी न हो।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट भी इसी अवधि में समर वेकेशन लेता है, लेकिन वहां भी हंगामी मामलों के लिए वेकेशन बेंच काम करती रहती है।
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सभी सेशन कोर्ट और निचली अदालतें 1 से 30 जून तक बंद रहेंगी
• दीवानी मामलों की सुनवाई पूरे महीने बंद, जबकि फौजदारी मामले 15 जून तक चलेंगे
• वेकेशन कोर्ट में जमानत, स्टे और हंगामी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रोस्टर तैयार
• सरकारी पक्ष के लिए प्रॉसिक्यूशन विभाग ने वकीलों की ड्यूटी लगाई
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