Punjab Government Schools Enrollment Drop Mid-Day Meal: केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के Programme Approval Board (PAB) ने एक चिंताजनक खबर साझा की है। पंजाब के सरकारी स्कूलों में, जहां मिड-डे-मील (Mid-Day Meal) स्कीम चलती है, वहां बच्चों के दाखिले (Enrolment) में 9 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है।
देखा जाए तो यह पंजाब की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। सरकारी स्कूलों से बच्चों का पलायन तेज हो रहा है और यह चिंता का विषय है।
| शैक्षणिक वर्ष | बच्चों की संख्या | परिवर्तन |
|---|---|---|
| 2024-25 | 19.10 लाख | – |
| 2025-26 | 17.34 लाख | -9% (1.76 लाख कम) |
रोजाना खाना खाने वाले बच्चों में भी 10% की कमी
सिर्फ दाखिले में ही नहीं, बल्कि स्कूल में रोजाना मिड-डे-मील का फायदा लेने वाले बच्चों की औसत संख्या भी 10 फीसदी घटकर 13.66 लाख रह गई है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंकड़े बताते हैं कि न केवल बच्चों का दाखिला कम हो रहा है, बल्कि जो बच्चे दाखिल हैं वे भी नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे।
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प्री-प्राइमरी में सबसे बड़ा झटका: 30% से अधिक गिरावट
सबसे बड़ा झटका प्री-प्राइमरी (Pre-Primary) कक्षाओं में लगा है, जहां बच्चों की संख्या और खाना खाने वालों की कवरेज 30 फीसदी से भी अधिक घट गई है।
समझने वाली बात है कि प्री-प्राइमरी यानी बाल वाटिका कक्षाओं में बच्चों का आना शिक्षा की नींव है। अगर यहीं से बच्चे नहीं आएंगे तो आगे की कक्षाओं में भी संख्या कम होगी।
प्राइमरी और अपर-प्राइमरी कक्षाओं में भी 7 से 8 फीसदी की गिरावट देखी गई है।
| कक्षा स्तर | गिरावट प्रतिशत |
|---|---|
| प्री-प्राइमरी (बाल वाटिका) | 30%+ |
| प्राइमरी | 7-8% |
| अपर प्राइमरी | 7-8% |
केंद्र ने दिए सख्त निर्देश
केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को तुरंत इस गिरावट के कारणों का पता लगाने और इसे सुधारने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सिर्फ पैसा नहीं दे रहा, बल्कि परिणाम भी मांग रहा है। यह एक सकारात्मक बदलाव है।
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गिरावट के बावजूद 352 करोड़ का बजट मंजूर
इस गिरावट के बावजूद, बच्चों के पोषण के लिए केंद्र सरकार ने साल 2026-27 के लिए पंजाब को Rs 352.39 करोड़ के सालाना बजट (AWP&B) को मंजूरी दी है।
इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 220.49 करोड़ है और पंजाब सरकार को अपने पास से कम से कम 131.90 करोड़ डालने होंगे। (इसमें 31 मार्च 2026 तक का पुराना बचा हुआ 23 करोड़ का बजट भी शामिल है)।
अगर गौर करें तो केंद्र सरकार राज्यों पर दबाव बना रही है कि वे भी अपना हिस्सा समय पर डालें।
16 मई को हुई बैठक, 25 मई को जारी हुए मिनट्स
यह मंजूरी 16 मई को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सं जय कुमार (Sanjay Kumar) की अध्यक्षता में हुई एक वर्चुअल मीटिंग में दी गई थी, जिसके मिनट्स (Minutes) 25 मई को जारी किए गए हैं।
19,557 स्कूलों के 14.55 लाख बच्चों को मिलेगा खाना
इस योजना के तहत पंजाब के 19,557 स्कूलों के 14.55 लाख बच्चों को 245 वर्किंग दिनों (Working Days) के लिए खाना दिया जाएगा।
इसमें:
- बाल वाटिका: 86,120 बच्चे
- प्राइमरी: 8.52 लाख बच्चे
- अपर प्राइमरी: 5.17 लाख बच्चे
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंकड़े घटी हुई संख्या के आधार पर हैं। अगर यह गिरावट जारी रही तो अगले साल और कम बजट मिल सकता है।
45,200 कुक-कम-हेल्पर्स को मिली मंजूरी
स्कूलों में खाना बनाने के लिए 45,200 कुक-कम-हेल्पर्स (Cook-cum-Helpers) को भी मंजूरी दी गई है। इन्हें 45.20 करोड़ रुपये का मानभत्ता दिया जाएगा।
समझने वाली बात है कि यह महिलाओं के लिए रोजगार का भी एक बड़ा स्रोत है।
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बजट की विस्तृत वंड
सामान का खर्चा (Material Cost): 284.61 करोड़ रुपये (सबसे बड़ा हिस्सा)
यह खाने की सामग्री, सब्जियां, दालें आदि के लिए है।
कुक-कम-हेल्पर्स का मानभत्ता: 45.20 करोड़ रुपये
अनाज (Foodgrains): 10.49 करोड़ रुपये (41,977 मीट्रिक टन अनाज के लिए)
ट्रांसपोर्टेशन सहायता: 6.30 करोड़ रुपये
(बोर्ड ने चिंता जताई कि पिछली बार इस फंड का सिर्फ 50 फीसदी ही इस्तेमाल किया गया था, इसलिए समय पर भुगतान करने को कहा गया है)
मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग (MME): 5.80 करोड़ रुपये
फ्लेक्सी फंड (Flexi Component): 17.62 करोड़ रुपये
(इस पैसे से बच्चों को बाजरे की बार (Millets Bars) या केले जैसी अतिरिक्त पोषण दी जाएगी)
2025-26 में सिर्फ 218 दिन दिया जा सका खाना
साल 2025-26 में पंजाब के स्कूलों में तय किए गए 245 दिनों के मुकाबले सिर्फ 218 दिन ही खाना दिया जा सका।
पंजाब सरकार ने इसका कारण मई महीने में पड़ने वाली भयंकर गर्मी (Heatwave) और अगस्त में आए भारी बाढ़ (Floods) के कारण स्कूल बंद होना बताया।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्र ने यह बहाना स्वीकार नहीं किया।
केंद्र का सख्त आदेश: किसी भी हालत में खाना बंद नहीं
केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि भले ही फंड या अनाज की सप्लाई में देरी हो, लेकिन बच्चों का गर्म पकाया हुआ खाना (Hot Cooked Meals) किसी भी हालत में बंद नहीं होना चाहिए।
जेकर लोड़ पड़े तो पंजाब सरकार अपने पास से अतिरिक्त फंड लगाकर भी इसे जारी रखे।
कहने का मतलब साफ है कि बच्चों का पोषण सर्वोपरि है।
100% बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी
केंद्र ने निर्देश दिया है कि विद्यार्थियों की 100 फीसदी पहचान बायोमेट्रिक मोड (Biometric Mode) के जरिए पूरी की जाए (जो कि इस समय सिर्फ 87 फीसदी है) और हर महीने डाटा को MIS पोर्टल पर अपडेट किया जाए।
यह पारदर्शिता बढ़ाने का एक अच्छा कदम है।
स्कूल न्यूट्रिशन गार्डन की अनिवार्यता
सभी स्कूलों में सब्जियां और फल उगाने वाले गार्डन बनाने के प्रयासों को तेज किया जाए। यह बच्चों को पोषण के साथ-साथ कृषि की शिक्षा भी देगा।
तिथि भोजन को प्रोत्साहन
सामाजिक सहयोग को बढ़ाने के लिए ‘तिथि भोजन’ को उत्साहित किया जाए ताकि लोग खुशी के मौकों पर बच्चों को अतिरिक्त पोषण वाला खाना दे सकें।
अच्छी बात: अन्य इंडिकेटर्स संतोषजनक
बोर्ड ने यह भी नोट किया कि पंजाब में बच्चों के 100 फीसदी हेल्थ चेक-अप, पेट के कीड़ों की दवाई (Deworming), स्कूलों में LPG गैस सिलिंडर और किचन के सामान जैसे बाकी सभी इंडिकेटर्स का प्रदर्शन संतोषजनक (Satisfactory) है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब के सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील लेने वाले बच्चों की संख्या 9% घटी
- 2024-25 में 19.10 लाख से 2025-26 में 17.34 लाख रह गई
- प्री-प्राइमरी में सबसे बड़ा झटका, 30% से अधिक गिरावट
- रोजाना खाना खाने वाले बच्चों की संख्या 10% घटकर 13.66 लाख
- केंद्र ने 2026-27 के लिए 352.39 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया
- 19,557 स्कूलों के 14.55 लाख बच्चों को 245 दिन खाना मिलेगा
- 45,200 कुक-कम-हेल्पर्स को मंजूरी, 45.20 करोड़ मानभत्ता
- केंद्र का सख्त निर्देश: किसी भी हालत में बच्चों का खाना बंद नहीं होना चाहिए
- 100% बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य, MIS पोर्टल पर मासिक अपडेट जरूरी













