Census Duty Reels Ban: सोशल मीडिया पर रील्स बनाना आज के दौर में आम बात हो गई है। लेकिन जब बात देश की जनगणना जैसे संवेदनशील और गोपनीय काम की हो, तो मामला गंभीर हो जाता है। शिक्षा विभाग ने अब जनगणना ड्यूटी पर तैनात सरकारी स्कूलों के अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों द्वारा वीडियो और रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह फैसला उन वायरल वीडियोज के बाद आया है जो हाल के दिनों में काफी चर्चा में रहे।
देखा जाए तो यह कदम जरूरी था। जनगणना का काम पूरी तरह से गोपनीय होता है और इसमें नागरिकों की निजी जानकारियां शामिल होती हैं। ऐसे में इसे मनोरंजन का साधन बनाना किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता।
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व्हाट्सएप से भेजे गए विशेष निर्देश
शिक्षा विभाग ने प्रदेश के समस्त सरकारी स्कूलों के प्रमुखों को व्हाट्सएप के जरिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। इन हिदायतों में साफ तौर पर बताया गया है कि कुछ गणनाकारों द्वारा जनगणना के गुप्त दस्तावेज़ों और शेड्यूल्स का उपयोग करके फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म के लिए रील्स बनाई जा रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये वीडियो केवल मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज पाने के लिए बनाए जा रहे थे। विभाग के अनुसार यह ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ का सीधा उल्लंघन है।
अगर गौर करें तो यह केवल नियम तोड़ने की बात नहीं है। जनगणना में एकत्र की गई जानकारियां राष्ट्रीय महत्व की होती हैं और इन्हें सार्वजनिक करना कानूनन अपराध माना जाता है।
जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11(बी) के तहत कार्रवाई
विभाग ने सख्त चेतावनी जारी की है कि यदि भविष्य में कोई भी कर्मचारी जनगणना की गोपनीयता को भंग करता है या ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल पाया गया, तो उसके विरुद्ध जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11(बी) के तहत सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
समझने वाली बात है कि यह धारा विशेष रूप से जनगणना संबंधी जानकारी को गुप्त रखने के लिए बनाई गई है। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है।
उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन काम करने वाले सभी गणनाकारों और सुपरवाइजरों को इस मामले की संवेदनशीलता के बारे में तुरंत जागरूक करें। यह केवल एक सर्कुलर नहीं, बल्कि एक सख्त चेतावनी है।
वायरल हुए थे वीडियो, हुई थी आलोचना
पिछले दिनों के दौरान ड्यूटी पर तैनात कुछ अध्यापकों द्वारा बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। इन वीडियो में अध्यापक जनगणना के दस्तावेजों के साथ रील्स बना रहे थे, जो बाद में मजाक का पात्र बने।
ये वीडियो न केवल गोपनीयता का उल्लंघन थे, बल्कि इससे जनगणना जैसे वक़्क़ारी काम की गंभीरता पर भी सवाल उठे। लोगों ने सोशल मीडिया पर इन वीडियो की खूब आलोचना की और विभाग से सख्त कदम उठाने की मांग की।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जनगणना केवल एक औपचारिकता नहीं है। यह राष्ट्रीय नीति निर्माण, योजना बनाने और संसाधनों के आवंटन का आधार होती है। इसलिए इसकी गोपनीयता और सटीकता दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहने के आदेश
इसी के मद्देनज़र अब विभाग ने फील्ड स्टाफ को ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया की वर्तोन से पूरी तरह दूर रहने के हुक्म दिए हैं। यानी अब Census Duty के दौरान न तो वीडियो बनाए जा सकते हैं और न ही किसी प्रकार की पोस्ट शेयर की जा सकती है।
वहीं, यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्यूटी के समय मोबाइल का इस्तेमाल केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। मनोरंजन या व्यक्तिगत प्रचार के लिए जनगणना से जुड़ी किसी भी सामग्री का उपयोग सख्त वर्जित है।
राज्य सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। शिक्षा विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले में सतर्कता बरतें और किसी भी उल्लंघन की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएं।
क्यों जरूरी है जनगणना की गोपनीयता?
जनगणना में परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, व्यवसाय, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां एकत्र की जाती हैं। यह डेटा पूरी तरह से गोपनीय होता है और इसका उपयोग केवल सरकारी नीति निर्माण के लिए किया जाता है।
यदि इस जानकारी को सार्वजनिक किया जाए या इसका दुरुपयोग किया जाए, तो न केवल नागरिकों की निजता का उल्लंघन होता है, बल्कि पूरी जनगणना प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।
इसलिए जनगणना अधिनियम में गोपनीयता बनाए रखने को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। इसका पालन न करना कानूनी अपराध है।
विभागीय और कानूनी दोनों कार्रवाई संभव
अधिकारियों के अनुसार यदि कोई भी कर्मचारी इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ दोहरी कार्रवाई हो सकती है। पहली, विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबन, वेतन कटौती या सेवा समाप्ति जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। दूसरी, कानूनी कार्रवाई के तहत जुर्माना और सजा का प्रावधान है।
इससे साफ होता है कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की ढील देने को तैयार नहीं है। जनगणना की गरिमा और गोपनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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मुख्य बातें (Key Points)
- जनगणना ड्यूटी के दौरान रील्स और वीडियो बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू
- शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूल प्रमुखों को व्हाट्सएप से विशेष निर्देश भेजे
- जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11(बी) के तहत होगी सख्त कार्रवाई
- पिछले दिनों वायरल हुए वीडियो के बाद उठाया गया यह कदम
- फील्ड स्टाफ को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहने के आदेश जारी













