Prateek Yadav Death: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव के आकस्मिक निधन के बाद मेडांता अस्पताल की डॉक्टर रुचिता शर्मा ने विस्तार से बताया कि उनकी मौत का असल कारण क्या था। डॉक्टर शर्मा ने पल्मोनरी एंबॉलिज्म नामक गंभीर बीमारी और शरीर पर लगी चोटों के बारे में साफ शब्दों में जानकारी दी।
देखा जाए तो यह एक बेहद गंभीर मेडिकल स्थिति थी जो धीरे-धीरे खतरनाक रूप लेती गई। डॉक्टर रुचिता शर्मा ने बताया कि वे प्रतीक यादव का इलाज पिछले 6 साल से कर रही थीं और उन्हें मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री का पता था।
पल्मोनरी एंबॉलिज्म: एक जानलेवा बीमारी
डॉक्टर रुचिता शर्मा ने बताया, “काफी गंभीर बीमारी थी सर को। पल्मोनरी एंबॉलिज्म डिटेक्ट हुआ था लगभग दो-तीन हफ्ते पहले, जिसकी वजह से ब्लड थिनर्स दिए गए। ब्लड थिनर्स पर होने के बावजूद 29 अप्रैल वाले एडमिशन में उनका हार्ट भी इनवॉल्व हो चुका था।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पल्मोनरी एंबॉलिज्म में रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जम जाता है जो फेफड़ों तक पहुंच जाता है। अगर यह थक्का नहीं घुलता तो यह हृदय को प्रभावित करने लगता है।
डॉक्टर ने कहा, “यह काफी गंभीर बीमारी थी और सर को इस बारे में पूरी जानकारी भी थी। जो मौत हुई है और खासकर जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आई है, वो भी इसी तरफ इशारा कर रही है।”
अचानक मौत कैसे हुई?
समझने वाली बात यह है कि इस तरह की बीमारी में अचानक किसी को पता नहीं चलता और मौत हो जाती है। डॉक्टर शर्मा ने बताया, “राइट वेंट्रिकुलर इनवॉल्वमेंट होना मतलब हार्ट का इनवॉल्वमेंट होना अपने आप में यह संकेत देता है कि यह गंभीर बीमारी का रूप ले चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा, “सर ब्लड थिनर पर होने के बावजूद भी जब बीमारी बढ़ रही थी तो उनको इस बारे में जानकारी दी गई थी कि उन्हें थ्रोम्बोलिसिस (एक प्रोसीजर) से गुजरना चाहिए। एक ब्लड थिनर भी स्टार्ट किया गया था लेकिन यह बीमारी ही इतनी खतरनाक है।”
दिलचस्प बात यह है कि जो अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली है, वह भी डॉक्टर के निदान से पूरी तरह मेल खाती है। डॉक्टर ने कहा, “जैसे मैं उनको इतने समय से देख रही हूं, डायग्नोसिस रीसेंट है, हार्ट का इनवॉल्वमेंट है तो बिल्कुल मैच कर रहा है कि यही कारण था।”
शरीर पर चोटें कैसे लगीं?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटीमॉर्टम इंजरीज (मृत्यु से पहले लगी चोटें) दिखाई गई हैं। कुछ पुरानी चोटें थीं और कुछ हाल की। इस पर डॉक्टर रुचिता शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रतीक यादव दो बार गिर चुके थे।
उन्होंने बताया, “एक दिन पहले बाथरूम में स्लिप होने की हिस्ट्री थी। शुरू में जब मुझसे पूछा तो मुझे एकदम याद नहीं आया, फिर मुझे याद आया कि वो एक दिन पहले गिरे थे और फिर सांस फूलते हुए एमरजेंसी में आए थे।”
यहां समझने वाली बात यह है कि दो बार गिरने के एपिसोड थे। डॉक्टर ने कहा, “और एक यह जो मिले हैं, वो भी गिरे हुए मिले हैं। तो दो एपिसोड फॉल के मुझे मालूम हैं।”
ब्लड थिनर के कारण चोटें ज्यादा दिखती हैं
अगर गौर करें तो ब्लड थिनर लेने वाले मरीजों में चोटें ज्यादा गंभीर दिखती हैं। डॉक्टर शर्मा ने समझाया, “ब्लड थिनर में खून पहले से पतला होता है। तो जो हम लोगों को छोटा सा घाव लगेगा और थोड़ा ब्लीड दिखेगा, ब्लड थिनर पर रहने वाले को बड़ा ब्लीड दिख सकता है। तो एग्रीवेशन के चांसेस डेफिनिटली हैं।”
इससे साफ होता है कि चोटें गिरने की वजह से लगी थीं और ब्लड थिनर की दवा के कारण वे ज्यादा गंभीर दिख रही थीं।
6 साल की मेडिकल हिस्ट्री
डॉक्टर रुचिता शर्मा ने बताया कि वे प्रतीक यादव का इलाज पिछले 6 साल से कर रही थीं। उन्होंने कहा, “पहले से ब्लड प्रेशर था और छोटी भी समस्याओं के लिए वो आते थे, इसलिए मैं उन्हें देखती थी।”
दिलचस्प बात यह है कि डीप वेनस थ्रोम्बोसिस की पहली घटना 2 साल पहले हुई थी। डॉक्टर ने बताया, “वो बहुत लंबी सिटिंग ट्रैवल करके एयरक्राफ्ट से गए थे। लंबे समय तक बैठने की वजह से खून का थक्का पैर में जम जाता है। उसकी वजह से एक एपिसोड हुआ था। वो फिर क्लॉट रिजॉल्व हो गया था।”
लेकिन हाल ही में बहुत लंबी सिटिंग, मल्टीपल ट्रैवल्स और एक पैर की सर्जरी की वजह से वे प्रीडिस्पोज कंडीशन में आ गए। डॉक्टर ने कहा, “इसकी वजह से नया थ्रोम्बस बना और यह थ्रोम्बस जाकर फेफड़े में चला गया।”
फिटनेस फ्रीक थे प्रतीक यादव
यह जानकर हैरानी होती है कि प्रतीक यादव फिटनेस के प्रति बहुत जागरूक थे। डॉक्टर शर्मा ने बताया, “फिटनेस उनका पैशन था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बहुत सारी वजहों से जैसे रीसेंट सर्जरी, काम का प्रेशर और इतनी ज्यादा फ्रीक्वेंट विजिट्स के कारण वो फिटनेस नहीं कर पा रहे थे।”
उन्होंने कहा, “जितना मेरे ज्ञान में है, पिछले दो-तीन महीने से, शायद चार-पांच महीने से जिमिंग बिल्कुल नहीं कर पा रहे थे। करना बहुत चाहते थे, वो उनका पैशन था लेकिन वो नहीं कर पा रहे थे।”
समझने वाली बात यह है कि जब जिम करने वाले लोग एक्सरसाइज छोड़ते हैं तो उन्हें कठिनाई होती है। डॉक्टर ने बताया कि प्रतीक यादव का वजन बढ़ गया था, जो थ्रोम्बोसिस के लिए एक प्रीडिस्पोज कंडीशन भी है।
तनाव भी था लेकिन मौत से सीधा संबंध नहीं
डॉक्टर शर्मा ने बताया कि प्रतीक यादव तनाव में भी रहते थे। उन्हें एंग्जायटी होती थी और कभी दवा ले लेते थे, कभी नहीं लेते थे। लेकिन डॉक्टर ने साफ किया कि इसका मौत से सीधा संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है सारे बिजनेसमैन तनाव में होते हैं। लेकिन उसका डायरेक्ट कनेक्शन डेथ से बिल्कुल नहीं है।”
डॉक्टर का निष्कर्ष स्पष्ट
डॉक्टर रुचिता शर्मा ने अपने निष्कर्ष को स्पष्ट शब्दों में रखा। उन्होंने कहा, “एक डॉक्टर के रूप में, एक ट्रीटिंग कंसल्टेंट के रूप में जो 6 साल से उन्हें देख रही है, मुझे यही समझ में आ रहा है कि पल्मोनरी एंबॉलिज्म का दूसरा एपिसोड होना एक युवा मरीज में जिसमें सारे हाई रिस्क फैक्टर्स हैं, वो कारण यही लग रहा है।”
उन्होंने कहा, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट जो आई है, वो पूरी तरह से मेच कर रही है। बाकी सारी रिपोर्ट्स तो सरकार के पास हैं। लेकिन मुझे तो यही समझ में आ रहा है कि यही कारण था।”
सडन कार्डियक फेलियर का खतरा
यह समझना जरूरी है कि पल्मोनरी एंबॉलिज्म में सडन हार्ट इनवॉल्वमेंट होता है जिससे मरीज एकदम से हार्ट फेलियर में जा सकता है और गिर भी सकता है। यही प्रतीक यादव के साथ हुआ।
डॉक्टर ने कहा, “वो पहले से हाई रिस्क में थे। उनका ट्रीटमेंट चल रहा था। गिरे हैं, पहले भी एक बार गिर चुके थे तो पहले भी निशान थे उनके शरीर में। तो यह पूरी तरीके से मैच कर रहा है।”
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रतीक यादव को पल्मोनरी एंबॉलिज्म नामक गंभीर बीमारी थी
- 2-3 हफ्ते पहले यह बीमारी डिटेक्ट हुई और ब्लड थिनर्स दिए गए
- 29 अप्रैल के एडमिशन में हार्ट भी इनवॉल्व हो चुका था
- डॉक्टर रुचिता शर्मा 6 साल से इलाज कर रही थीं
- शरीर पर चोटें दो बार गिरने की वजह से लगी थीं
- 2 साल पहले डीप वेनस थ्रोम्बोसिस का पहला एपिसोड हुआ था
- फिटनेस फ्रीक थे लेकिन पिछले 4-5 महीने से जिम नहीं कर पा रहे थे
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट डॉक्टर के निदान से मैच कर रही है













