Vikramshila Bridge Collapse की खबर ने बिहार को हिला दिया है। भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु का एक बड़ा हिस्सा 3-4 मई की दरमियानी रात अचानक धंसकर गंगा नदी में गिर गया। पिलर नंबर 133 के पास करीब 30-40 मीटर लंबा स्लैब पूरी तरह से नदी में समा गया। प्रशासन ने तुरंत पुल के दोनों तरफ से रास्ता सील कर दिया है और सभी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2001 में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल महज 24 साल में ही गिरने लगा।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर
देखा जाए तो यह हादसा बड़ी त्रासदी बनते-बनते बचा। 3-4 मई की मध्यरात्रि करीब 12:35 बजे जब ज्यादातर लोग सो रहे थे, तभी विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 133 के पास का स्लैब धंसना शुरू हुआ।
स्थानीय अधिकारियों और SAO (सब डिविजनल ऑफिसर) की सूझबूझ ने बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। जैसे ही उन्हें पुल में दरार की भनक लगी, तुरंत वहां मौजूद लोगों और गाड़ियों को बाहर निकाला गया।
समझने वाली बात यह है कि अधिकारियों ने लोगों को बाहर निकालने के ठीक 15 मिनट के अंदर ही पूरा स्लैब गंगा नदी में गिर गया। अगर थोड़ी भी देरी होती तो उस पर खड़े वाहनों और लोगों के साथ बड़ा हादसा हो सकता था।
4.5 किमी लंबे पुल की अहमियत
विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि पूरे बिहार की लाइफलाइन है। यह 4.5 किलोमीटर लंबा पुल गंगा नदी पर बना है और उत्तरी बिहार, पूर्वांचल, सीमांचल और बंगाल के कई हिस्सों को जोड़ता है।
रोज हजारों की संख्या में वाहन और लाखों की संख्या में लोग इस पुल का इस्तेमाल करते हैं। झारखंड के देवघर से होकर बंगाल और पूर्वी बिहार जाने वाले लोगों के लिए यह पुल सबसे छोटा और सुगम रास्ता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह बिहार का दूसरा सबसे लंबा पुल है। इसके टूटने से पूरे क्षेत्र का आवागमन ठप हो गया है। व्यापार, यात्रा और आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
ग्राउंड रिपोर्ट: आज तक के पत्रकार की आंखों देखी
आज तक के पत्रकार राजीव सिद्धार्थ हादसे की जगह पहुंचे और उन्होंने जमीनी हकीकत बताई। उनके मुताबिक, “हम विक्रमशिला सेतु पर ठीक उसी जगह पे हैं जहां करीब 30-40 मीटर लंबा स्लैब पूरा का पूरा पानी में गिर गया है।”
उन्होंने बताया कि इस हिस्से के गिरने के बाद उत्तरी बिहार, पूर्वांचल, सीमांचल और बंगाल के कई हिस्सों से जो संपर्क था, वो पूरा का पूरा टूट गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह पुल कितनी बड़ी आबादी के लिए महत्वपूर्ण था। अब इसके बंद होने से लोगों को घंटों का चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ेगा।
डीएम ने बताई पूरी स्थिति
भागलपुर के डीएम (जिलाधिकारी) नवल किशोर ने इस हादसे पर बयान दिया। राहत की बात यह है कि उन्होंने बताया कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। कोई घायल नहीं है। सब सुरक्षित हैं।
डीएम ने कहा, “रात के लगभग 12:35 बजे पिलर नंबर 133 के पास जो एक स्लैब है वो धंसना शुरू किया। हमारे स्थानीय अधिकारी और SAO ने अपनी सूझबूझ से लोगों को वहां से बाहर निकाला।”
उन्होंने आगे बताया, “जैसे ही लोगों को बाहर निकाला गया, ठीक 15 मिनट के अंदर पिलर नंबर 133 के पास एक मेजर स्लैब गंगा नदी में गिर गया। लेकिन अधिकारी पहले से सतर्क थे इसलिए लोग वहां से बाहर थे और कोई गाड़ी उस स्लैब पर नहीं थी।”
इसका मतलब है कि अधिकारियों की तत्परता ने बड़ी जान-माल की हानि से बचाया। डीएम ने आगे कहा कि दोनों तरफ से – भागलपुर की तरफ से और नवगछिया की तरफ से – विक्रमशिला सेतु को सील कर दिया गया है और आवागमन पूरी तरह बंद है।
2001 में बना था यह पुल
रिपोर्ट के मुताबिक, यह पुल साल 2001 में बनाया गया था। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस पुल को यूपी पुल निगम ने बनाया था। यह अपने समय की एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जाती थी।
अगर गौर करें तो 24 साल पुराने इस पुल का टूटना कई सवाल खड़े करता है। क्या नियमित रखरखाव हो रहा था? क्या समय-समय पर सेफ्टी ऑडिट किया गया? क्या मैटेरियल क्वालिटी में कोई कमी थी?
चिंता का विषय यह है कि अगर इतनी बड़ी लागत से बना पुल इतनी जल्दी गिरने लगे, तो बाकी पुरानी संरचनाओं का क्या हाल होगा।
जनजीवन पर पड़ा गहरा असर
पुल बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को हो रही है। जो लोग रोज इस पुल से होकर अपने काम पर जाते थे, अब उन्हें घंटों का अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा।
व्यापारियों का भी नुकसान हो रहा है। माल ढुलाई के लिए अब लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे लागत बढ़ेगी। आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सर्विस भी प्रभावित होंगी।
सवाल उठता है कि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था कब तक करेगा? क्या अस्थायी ब्रिज या नाव सेवा शुरू की जाएगी?
जांच शुरू, कारणों का पता लगाया जा रहा है
प्रशासन ने पुल गिरने की वजहों की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है।
इससे साफ होता है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। लेकिन जनता चाहती है कि सिर्फ जांच नहीं, बल्कि जल्द से जल्द पुल की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
उम्मीद की किरण यह है कि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इसका श्रेय प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता को जाता है।
मुख्य बातें (Key Points):
• Vikramshila Bridge Collapse में पिलर 133 के पास 30-40 मीटर लंबा स्लैब गंगा में गिरा
• मध्यरात्रि 12:35 बजे हुआ हादसा, अधिकारियों की सूझबूझ से बड़ी त्रासदी टली
• 2001 में 200 करोड़ रुपये से बना 4.5 किमी लंबा पुल बिहार की लाइफलाइन
• उत्तरी बिहार, पूर्वांचल, सीमांचल और बंगाल का संपर्क टूटा, हजारों वाहनों का रास्ता बंद
• किसी के हताहत होने की खबर नहीं, पुल दोनों तरफ से सील, जांच जारी












