Punjab Census 2026 को लेकर अब इंतजार खत्म हो गया है। पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि 30 अप्रैल 2026 से राज्य में जनगणना की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। और बस यहीं से शुरू हो रही है एक ऐसी कवायद, जो पंजाब के हर घर, हर परिवार और हर शख्स को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली है।
लोकल बॉडी विभाग के सचिव मनजीत सिंह बराड़ और निदेशक जनगणना नवजोत खोसा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पूरी जानकारी दी। दिलचस्प बात यह है कि इस बार पहली बार लोगों को ऑनलाइन ‘स्व-गणना’ यानी Self Enumeration की सुविधा भी दी जा रही है… जो अपने आप में एक बड़ा बदलाव है।
पहला चरण: 30 अप्रैल से 14 मई तक ऑनलाइन भरें अपनी जानकारी
समझने वाली बात है कि Punjab Census 2026 को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण की शुरुआत 30 अप्रैल से होगी और 14 मई 2026 तक चलेगी। इस दौरान लोग खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने घर और परिवार से जुड़ी जानकारी भर सकेंगे। इसे ‘स्व-गणना’ नाम दिया गया है।
यह पूरी तरह ऑप्शनल है। कोई जबरदस्ती नहीं। जो लोग ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरना चाहते, उनके लिए पुराना तरीका वैसे का वैसा है — सरकारी कर्मचारी खुद आपके घर आएंगे और जानकारी लेंगे। लेकिन अगर गौर करें तो यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए राहत की बात है जो अपनी सुविधा से, बिना किसी जल्दबाजी के, घर बैठे फॉर्म भरना चाहते हैं।
पोर्टल पर फॉर्म 16 भाषाओं में उपलब्ध है। सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक ही पोर्टल एक्टिव रहेगा। रात 12 के बाद कोशिश मत कीजिए — सिस्टम काम नहीं करेगा।
दूसरा चरण: 15 मई से 13 जून तक घर-घर सर्वे, पूछे जाएंगे 33 सवाल
इसके बाद असली कवायद शुरू होगी। 15 मई 2026 से 13 जून 2026 तक मकान की सूची और आवास गणना (House Listing and Housing Census) होगी। इस दौरान सरकारी कर्मचारी सचमुच आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे। वो 33 सवाल पूछेंगे — और ये सवाल आपके मकान, सुविधाओं, पानी, बिजली, किचन और वाहनों से जुड़े होंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन लोगों ने पहले चरण में ऑनलाइन फॉर्म भर दिया होगा, उनके घर भी कर्मचारी जाएंगे। क्यों? क्योंकि डेटा वेरिफाई करना जरूरी है। ऑनलाइन भरा है तो सही भरा है या नहीं — यह चेक होगा।
वहीं, वास्तविक जनसंख्या की गिनती का दूसरा बड़ा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें हर व्यक्ति का अलग-अलग डेटा दर्ज किया जाएगा।
Punjab Census 2026 Self Enumeration: ऑनलाइन फॉर्म भरते वक्त इन गलतियों से बचें
ऑनलाइन स्व-गणना सुनने में जितनी आसान लगती है, उतनी सावधानी भी मांगती है। विभाग ने कुछ सख्त हिदायतें दी हैं और इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
सबसे पहली बात: किसी ऐसे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मत करें जो पहले से किसी दूसरे परिवार द्वारा रजिस्टर हो चुका हो। परिवार के मुखिया का नाम भरते वक्त नकली या अस्थायी नाम बिल्कुल न डालें, क्योंकि बाद में इसे बदलना संभव नहीं होगा। सुनने में छोटी बात लगती है, लेकिन एक गलत नाम पूरे परिवार के डेटा को गड़बड़ कर सकता है।
OTP किसी के साथ शेयर मत करें — चाहे सामने वाला खुद को सेंसस अफसर ही क्यों न बताए। आधार, पैन या बैंक डिटेल जैसे दस्तावेज की जनगणना में कोई जरूरत नहीं है, तो अपलोड या शेयर करने की गलती न करें।
एक और अहम बात: जो सदस्य स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं या पढ़ाई-नौकरी के लिए बाहर रह रहे हैं, उन्हें अपने फॉर्म में शामिल न करें। मैप पर लोकेशन चुनते वक्त सही जगह चुनें — यह आपकी असली रहने की जगह होनी चाहिए, कोई मनगढ़ंत पता नहीं।
फॉर्म भरते हुए कोई भी सवाल खाली न छोड़ें, वरना सिस्टम आगे बढ़ने ही नहीं देगा। और सबसे जरूरी… जब तक आपको SE ID के साथ सफलता वाली स्क्रीन न दिख जाए, तब तक यह न मानें कि प्रक्रिया पूरी हो गई है।
सावधान! कर्मचारी ये 3 सवाल पूछें तो जवाब देने से मना करें
हैरान करने वाली बात यह है कि कई बार जनगणना के नाम पर कुछ ऐसे सवाल भी पूछ लिए जाते हैं जो इस प्रक्रिया का हिस्सा ही नहीं हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि तीन तरह के सवालों का जवाब देने की कोई जरूरत नहीं:
पहला: आमदनी से जुड़े सवाल। महीने की कमाई कितनी है, बैंक बैलेंस क्या है — ये सब जनगणना का हिस्सा नहीं है।
दूसरा: दस्तावेज दिखाने का दबाव। आधार कार्ड, पैन कार्ड या कोई भी पहचान पत्र दिखाने की मांग हो तो सतर्क हो जाएं।
तीसरा: बैंक डिटेल या OTP। अगर कोई बैंक खाता नंबर या वन टाइम पासवर्ड मांगे तो समझ लीजिए कुछ गड़बड़ है। यह जानकारी जनगणना में कभी नहीं मांगी जाती।
मोबाइल में FM है तो ‘रेडियो’, लिव-इन में हैं तो ‘विवाहित’: जानें दिलचस्प नियम
Punjab Census 2026 के कुछ नियम ऐसे हैं जो पहली नजर में थोड़े अजीब लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे एक ठोस तर्क है।
अगर आप किसी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में काफी समय से रह रहे हैं, तो जनगणना में आपको ‘विवाहित युगल’ माना जाएगा। कोई अलग कैटेगरी नहीं है इसके लिए।
आपके मोबाइल में FM रेडियो है? तो आपके घर में ‘रेडियो’ दर्ज होगा। लेकिन… अगर आप मोबाइल पर YouTube देखते हैं तो इसे ‘टीवी’ नहीं गिना जाएगा। टीवी तभी काउंट होगा जब घर में सचमुच टेलीविजन सेट हो।
वाहनों के मामले में: ट्रैक्टर को कार या जीप की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। ई-रिक्शा या ऑटो को भी कार या बाइक नहीं माना जाएगा।
पानी का भी एक दिलचस्प नियम है। घर में नल का कनेक्शन है, लेकिन पीने के लिए बोतल या कैन का पानी मंगाते हैं? तो ‘बोटल्ड वॉटर’ लिखा जाएगा, नल का पानी नहीं।
और किचन? अगर एक ही कमरे में खाना भी बनता है और सोते भी हैं, तो उसे ‘रसोई’ नहीं माना जाएगा। रसोई तभी दर्ज होगी जब घर में अलग से बना हुआ किचन हो। इसका मतलब है कि बहुत सारे छोटे घरों में ‘रसोई नहीं’ दर्ज होगा — और यह डेटा सरकार की नीतियों को सीधे प्रभावित करेगा।
67,000 कर्मचारी तैनात, हर एक को 700-800 लोगों का डेटा जुटाना होगा
इस पूरी कवायद के लिए पंजाब में लगभग 51,561 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) बनाए जा चुके हैं। चिंता का विषय यह होता कि इतने बड़े काम के लिए कर्मचारी कहां से आएंगे, लेकिन सरकार ने इसका भी इंतजाम कर लिया है।
कुल मिलाकर करीब 67,000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। इनमें से 56,544 एन्यूमरेटर हैं और 10,368 सुपरवाइजर। इन नियुक्तियों में स्कूल शिक्षक, क्लर्क और राज्य सरकार तथा स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल हैं।
हर एक एन्यूमरेटर को लगभग 700 से 800 लोगों का डेटा इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी बीच, एक सुपरवाइजर करीब 6 एन्यूमरेटर की निगरानी करेगा। इससे साफ होता है कि सरकार इस बार जनगणना को लेकर काफी गंभीर है और किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
30 अप्रैल से शुरू होगी हेल्पलाइन, 1855 पर करें कॉल
दूसरी ओर, सरकार ने आम लोगों की मदद के लिए एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन भी शुरू करने का ऐलान किया है। 30 अप्रैल 2026 से 1855 नंबर पर कॉल करके कोई भी व्यक्ति जनगणना से जुड़ा सवाल पूछ सकता है, शिकायत दर्ज करा सकता है या सीधे अधिकारी से बात कर सकता है।
उम्मीद की किरण यह है कि यह हेल्पलाइन 24 घंटे चालू रहेगी और 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर कॉल सीधे जनगणना विभाग के अधिकारी तक भी पहुंचाई जा सकती है। हालांकि, अधिकारी से सीधी बात सोमवार से शनिवार, सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही हो पाएगी।
एन्यूमरेटर और आम लोगों की जिम्मेदारी तय
सवाल उठता है कि जब कर्मचारी घर आए तो क्या करना है और क्या नहीं? विभाग ने दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां साफ तौर पर बता दी हैं।
एन्यूमरेटर — यानी वो व्यक्ति जो घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करेगा — उसकी जिम्मेदारी है कि वो आराम से, साफ तरीके से सवाल पूछे। फॉर्म जमा करने से पहले सब कुछ दोबारा चेक करे। और सबसे अहम बात — आपकी दी गई जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखे।
वहीं, जिस व्यक्ति के घर जनगणना टीम आए, उसकी भी जिम्मेदारी बनती है कि वो सही और पूरी जानकारी दे। अगर कोई बात समझ न आए तो बेझिझक पूछ ले — इसमें कोई शर्म नहीं, कोई जुर्माना नहीं।
पंजाब में पहली बार हो रही ड्रग जनगणना: 65 लाख परिवारों का सर्वे
देखा जाए तो Punjab Census 2026 के साथ-साथ एक और बड़ा कदम उठाया गया है जो पूरे देश में पहली बार हो रहा है। पंजाब सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से भारत की पहली व्यापक ‘ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना’ शुरू की है।
इसका मकसद राज्य के 65 लाख परिवारों का सर्वेक्षण करना है ताकि नशे के खिलाफ डेटा-आधारित पुनर्वास नीतियां बनाई जा सकें। करीब 28,000 सरकारी कर्मचारी इस काम में लगाए गए हैं और तीन महीने में यह पूरी होगी। इस पहल पर लगभग ₹150 करोड़ खर्च हो रहे हैं।
यह दर्शाता है कि पंजाब सरकार नशे की समस्या को अब सिर्फ भाषणों और वादों से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक डेटा और ठोस रणनीति से निपटना चाहती है। अगर यह सर्वे सही तरीके से हुआ, तो इसके नतीजे नशा मुक्ति अभियान की दिशा बदल सकते हैं।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
अगर आप पंजाब में रहते हैं, तो अगले कुछ हफ्तों में या तो आप खुद ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे या फिर मई-जून में सरकारी कर्मचारी आपके घर जरूर आएंगे। यह कोई टैक्स वसूली नहीं है, कोई जांच नहीं है — बस एक गिनती है, जो देश की नीतियों का आधार बनेगी। आपका सही डेटा सरकार को बेहतर योजनाएं बनाने में मदद करेगा — चाहे वो बिजली हो, पानी हो, सड़क हो या शिक्षा।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक कारणों से लगातार टलती रही। अब लगभग 15 साल बाद यह प्रक्रिया फिर से शुरू हो रही है। यह भारत की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना है और पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जा रही है। इस बार 1931 के बाद पहली बार जाति गणना भी शामिल की गई है, जो राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद अहम है। पंजाब में इस पूरी प्रक्रिया की कमान लोकल बॉडी विभाग के हाथ में है, और राज्य सरकार ने 67,000 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती कर इसे सफल बनाने का संकल्प लिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Punjab Census 2026 का पहला चरण 30 अप्रैल से शुरू, ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा 14 मई तक
- 15 मई से 13 जून तक 67,000 कर्मचारी घर-घर जाकर 33 सवाल पूछेंगे — मकान, सुविधाएं, वाहन, पानी, किचन सब शामिल
- आमदनी, बैंक डिटेल या दस्तावेज दिखाने के सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं — ये जनगणना का हिस्सा नहीं
- हेल्पलाइन नंबर 1855 पर 24 घंटे, 16 भाषाओं में मदद उपलब्ध होगी













