Heatwave की दस्तक अब साफ सुनाई देने लगी है। पिछले कुछ दिनों तक जहां सुहाना मौसम था, ठंडी हवाएं चल रही थीं और बारिश भी हो रही थी, वहीं अब अचानक तेज धूप और बढ़ती गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मिड अप्रैल से देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में लू चलने जैसी स्थिति बन सकती है। नागपुर, भोपाल, अमरावती और भुवनेश्वर जैसे शहरों में तापमान 42 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।
देखा जाए तो यह सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। अचानक बढ़ी हुई गर्मी शरीर के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है क्योंकि शरीर को इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने का समय ही नहीं मिलता।
शरीर को समय नहीं मिलता एडजस्ट करने का
मणिपाल हॉस्पिटल्स द्वारका में इंटरनल मेडिसिन की चेयरमैन एंड कंसल्टेंट डॉ. चारु गोयल सचदेवा बताती हैं कि अचानक गर्मी बढ़ने से सबसे बड़ी समस्या यह है कि बॉडी को एडजस्ट करने का टाइम नहीं मिलता। इससे स्वेटिंग बहुत बढ़ जाती है जिससे पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का लॉस होता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ पसीना आने तक सीमित नहीं है। डिहाइड्रेशन होता है, थकावट होती है, चक्कर आ सकते हैं, मतली और उल्टी की शिकायत हो सकती है। और फिर अधिक कमजोरी भी हो सकती है। यह सब Heatwave के शुरुआती लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Heat Cramps से लेकर Heat Stroke तक का सफर
समझने वाली बात यह है कि गर्मी की वजह से होने वाली परेशानियां धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं। सबसे पहले हीट क्रैंप्स होते हैं जिसमें पैरों में दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन होती है।
अगर गौर करें तो इसके बाद आता है हीट एग्जॉशन का चरण। हीट एग्जॉशन में थकावट होती है, उल्टियां आ सकती हैं और शरीर बिल्कुल ढीला पड़ जाता है। लेकिन सबसे गंभीर और जानलेवा स्थिति है Heat Stroke.
Heat Stroke में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक चला जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तुरंत हॉस्पिटलाइज होना बहुत जरूरी है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस स्थिति में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
डॉ. चारु गोयल सचदेवा के अनुसार कुछ लोग Heatwave के ज्यादा जोखिम में होते हैं। सबसे पहले आते हैं बुजुर्ग और बच्चे क्योंकि उनके शरीर की तापमान नियंत्रण प्रणाली कमजोर होती है।
इसके अलावा जो लोग बाहर काम करते हैं जैसे मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस, डिलीवरी बॉय – इन सभी को बेहद सावधानी रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
और बस यहीं से शुरू होती है असली चिंता। जिन लोगों को डायबिटीज या किडनी डिजीज की बीमारी है, जो डायरेटिक्स यानी मूत्रवर्धक दवाइयां ले रहे हैं, उनमें डिहाइड्रेशन होने के चांसेस बहुत ज्यादा हैं। इन लोगों को बहुत सावधानी रखनी पड़ेगी।
12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें
डॉ. सचदेवा कहती हैं कि बहुत जरूरी है कि Heatwave से बचने के लिए कुछ प्रिकॉशंस लेकर चलें। सबसे पहले तो 12 बजे दोपहर से लेकर 4 बजे शाम तक बाहर निकलने से अवॉइड करें। यह समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि इस दौरान धूप सबसे तेज होती है।
अच्छे से हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है। पानी पिएं, नारियल पानी पिएं, ORS लें और बाहर जाएं। अगर जरूरी भी है इस टाइम पर निकलना तो अम्ब्रेला या कैप वगैरह लेकर जाएं।
शेड में रहें, घर के अंदर भी कूल एरिया में रहें और पानी पीते रहें। राहत की बात यह है कि थोड़ी सी सावधानी से आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
मेडिकेशन्स को भी करना पड़ सकता है एडजस्ट
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जो लोग नियमित दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें Heatwave के दौरान अपनी मेडिकेशन्स को एडजस्ट करने की जरूरत पड़ सकती है। खासतौर पर ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दवाइयों में बदलाव हो सकता है।
इसलिए अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई भी बदलाव करें। बहुत जरूरी है कि हम इन सब चीजों का ध्यान रखें और यह इंश्योर करें कि गर्मियों में हम अपना बचाव ठीक तरीके से कैसे कर सकते हैं ताकि इन बीमारियों से हमें जूझना ना पड़े।
जैसा कि डॉ. सचदेवा कहती हैं – प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर देन क्योर। यानी बचाव हमेशा इलाज से बेहतर है।
Skin Cancer के भी बढ़ रहे हैं मामले
अब तेज गर्मी का एक और पहलू है जो चिंताजनक है – स्किन कैंसर। एक वक्त था जब भारतीयों में स्किन कैंसर कम होता था। पश्चिमी देशों के मुकाबले हमारे यहां इसके मामले बहुत कम आते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है।
भारत में भी स्किन कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वैसे तो स्किन कैंसर कई तरह का होता है लेकिन तीन सबसे आम हैं – मेलेनोमा, बेसल सेल कार्सिनोमा और स्क्वामस सेल कार्सिनोमा।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें सबसे खतरनाक और जानलेवा है मेलेनोमा। यह स्किन को रंग देने वाले सेल्स मेलेनोसाइट्स में डेवलप होता है।
सिर्फ 2 मिनट में करें स्किन कैंसर का सेल्फ चेक
नारायण हॉस्पिटल जयपुर में मेडिकल ओन्कोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रीति अग्रवाल बताती हैं कि स्किन कैंसर के लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। इसलिए लोग अक्सर इन्हें पहचानने में देर कर देते हैं।
लेकिन अच्छी खबर यह है कि अगर थोड़ा ध्यान दें तो स्किन कैंसर के शुरुआती लक्षण आप घर पर ही चेक कर सकते हैं। और इसमें 2 मिनट से भी कम टाइम लगेगा।
अगर स्किन पर कोई नया तिल या धब्बा दिखाई दे रहा है जिसमें थोड़ा उभार है, जो साइज में बढ़ता ही जा रहा है या जिसमें से खून निकल रहा है तो यह स्किन कैंसर से जुड़ा हो सकता है।
तिल में बदलाव पर दें ध्यान
समझने वाली बात यह है कि अगर स्किन पर पहले से मौजूद किसी तिल का साइज अचानक बढ़ गया है, उसकी बनावट बदल गई है, उसका बॉर्डर जो पहले गोल था अब अनियमित हो गया है, उसका रंग एक जैसा ना होकर अलग-अलग शेड्स में दिख रहा है या उस तिल में से खून आ रहा है तो यह भी स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है।
इसके अलावा अगर स्किन में किसी जगह पर बार-बार खुजली, जलन होती है या दर्द रहता है तब भी यह स्किन कैंसर से जुड़ा हो सकता है।
डॉ. प्रीति अग्रवाल कहती हैं कि स्किन में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज ना करें। अगर किसी में ऐसे लक्षण हों तो वह तुरंत डॉक्टर से मिलें।
बायोप्सी से होती है पुष्टि
जरूरत पड़ी तो डॉक्टर आपकी बायोप्सी करेंगे। इससे पता चलता है कि कैंसर है या नहीं। अगर है तो किस टाइप का और किस ग्रेड का है। सारी जांचें होने के बाद शुरू होता है इलाज।
स्किन कैंसर के इलाज में सर्जरी सबसे आम और असरदार तरीका है। अगर गौर करें तो अगर किसी वजह से सर्जरी मुमकिन नहीं है तो रेडिएशन थेरेपी से इलाज होता है। जरूरत पड़ने पर इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, क्रायोथेरेपी और कीमोथेरेपी भी दी जा सकती है।
सनस्क्रीन है जरूरी, भारतीयों के लिए भी
जहां तक बात स्किन कैंसर से बचाव की है तो सबसे जरूरी है तेज धूप में जाने से बचना। क्योंकि सूरज की अल्ट्रावायलेट रेज स्किन को नुकसान पहुंचाती हैं।
अगर धूप में जा रहे हैं तो सिर पर टोपी लगाएं, ग्लव्स पहनें, छाता इस्तेमाल करें। साथ ही सनस्क्रीन भी बहुत जरूरी है। इससे स्किन कैंसर का रिस्क घटता है।
हैरान करने वाली बात यह है कि भारत में रहने वाले कई लोगों को लगता है कि हमारी स्किन को सनस्क्रीन की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। कम से कम 30-35 SPF वाली सनस्क्रीन इस्तेमाल करनी चाहिए।
घर पर बनाएं नेचुरल प्रोटीन पाउडर
अब बात करते हैं एक और हेल्थ टिप की। जिम जाने वाले कई लोग प्रोटीन पाउडर लेते हैं। इससे मसल्स बनाने में मदद मिलती है। लेकिन अक्सर यह बहुत महंगे आते हैं।
उम्मीद की किरण यह है कि प्रोटीन पाउडर आप घर पर भी बना सकते हैं। यह ज्यादा नेचुरल होगा, बिना केमिकल वाला होगा और सस्ता भी होगा।
मधुकर रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल में डाइटिशियन डॉ. समीक्षा कालरा बताती हैं कि घर पर प्रोटीन पाउडर बनाना बेहद आसान है।
ये हैं जरूरी सामग्री
इसके लिए चाहिए – एक कप बादाम, एक कप मूंगफली, आधा कप कद्दू के बीज, आधा कप सूरजमुखी के बीज, आधा कप अलसी, आधा कप तिल, आधा कप चना और आधा कप ओट्स।
अब इन सभी को अलग-अलग धीमी आंच पर भून लें जब तक कि वो कुरकुरे ना हो जाएं। इसके बाद इन्हें ठंडा होने दें और फिर पीसकर पाउडर बना लें। अब एक चम्मच इलायची पाउडर भी डाल सकते हैं।
हर इंग्रीडिएंट के अपने फायदे
बादाम और मूंगफली प्रोटीन व हेल्दी फैट से भरपूर होते हैं। यह मांसपेशियों की मरम्मत करते हैं और शरीर को एनर्जी भी देते हैं।
वहीं कद्दू और सूरजमुखी के बीज में प्रोटीन के साथ-साथ जिंक और मैग्नीशियम होता है। यह दोनों इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म के लिए अच्छे हैं।
भुना चना प्रोटीन और फाइबर का बढ़िया सोर्स होता है। यानी यह मांसपेशियों और पाचन तंत्र दोनों के लिए फायदेमंद है। अलसी यानी फ्लैक्ससीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर होता है जो दिल और हाजमे के लिए अच्छा है।
और ओट्स धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं। साथ ही पेट को देर तक भरा भी रखते हैं। जिससे आप ओवर ईटिंग नहीं करते और अपने खाने पर कंट्रोल रखते हैं।
मार्केट वाले से कहीं बेहतर
घर पर बना प्रोटीन पाउडर ज्यादा हेल्दी है क्योंकि इसमें प्रिजर्वेटिव्स, एडेड शुगर और आर्टिफिशियल फ्लेवर्स नहीं हैं जो मार्केट में मिलने वाले कई प्रोटीन पाउडर्स में होते हैं।
घर पर बने इस पाउडर से आपको सिर्फ प्रोटीन ही नहीं बल्कि फाइबर, हेल्दी फैट्स, विटामिन्स और मिनरल्स भी मिलते हैं। यानी यह एक तरह से ज्यादा बैलेंस्ड न्यूट्रिशन देता है।
कितनी मात्रा में लें?
एक दिन में कितना प्रोटीन पाउडर लेना चाहिए? यह व्यक्ति की उम्र, वजन और एक्टिविटी लेवल पर डिपेंड करता है। आमतौर पर एक से दो चम्मच यानी लगभग 10 से 20 ग्राम घर का बना प्रोटीन पाउडर रोज लेना सेफ और फायदेमंद है।
आप इसे दूध या पानी दोनों के साथ ले सकते हैं। अगर दूध के साथ लेते हैं तो आपको ज्यादा प्रोटीन और कैल्शियम मिलेगा। यह वजन बढ़ाने और हड्डियों के लिए अच्छा है।
वहीं पानी के साथ लेने से यह हल्का रहता है और जल्दी पचता है जो वेट मैनेजमेंट या कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए बेहतर है।
स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है
देखा जाए तो ये तीनों मुद्दे – Heatwave से बचाव, स्किन कैंसर की जागरूकता और सही पोषण – सभी एक ही सूत्र से जुड़े हैं। और वह है स्वास्थ्य के प्रति सजगता।
चिंता का विषय यह है कि हम अक्सर छोटे-छोटे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। तेज गर्मी में भी बिना सावधानी के बाहर निकल जाते हैं, स्किन पर होने वाले बदलावों को गंभीरता से नहीं लेते और अपनी डाइट को लेकर लापरवाह रहते हैं।
लेकिन थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से आप गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। जैसा कि डॉक्टरों ने कहा – प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर देन क्योर।
मुख्य बातें (Key Points)
• Heatwave के कारण Heat Stroke का खतरा बढ़ गया है, IMD ने मिड अप्रैल से लू चलने की चेतावनी दी है
• 12 बजे दोपहर से 4 बजे शाम तक बाहर निकलने से बचें, खूब पानी और तरल पदार्थ पिएं
• स्किन कैंसर के लक्षण घर पर 2 मिनट में चेक किए जा सकते हैं, तिल में बदलाव पर ध्यान दें
• घर पर प्रोटीन पाउडर बनाया जा सकता है जो मार्केट वाले से ज्यादा हेल्दी और सस्ता है
• बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज के मरीजों को Heatwave से विशेष सावधानी रखनी चाहिए













