Childhood Cancer India : कैंसर, यह देश में बच्चों की मौत का दसवां सबसे बड़ा कारण है। यह सामने आया है द लांसेट जर्नल में छपी ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023 स्टडी से। अंदाजा है कि भारत में कैंसर से लगभग 17,000 बच्चों की मौत साल 2023 में हुई थी।
अगर दुनिया की बात करें तो स्थिति और भी गंभीर है। ग्लोबली कैंसर बच्चों में मौत का आठवां सबसे बड़ा कारण है। इसने खसरा, टीबी, एचआईवी और एड्स को भी पीछे छोड़ दिया है।
देखा जाए तो स्टडी के मुताबिक 2023 में दुनिया भर में चाइल्डहुड कैंसर के लगभग 3,77,000 नए मामले सामने आए थे। वहीं करीब 1,44,000 मौतें भी हुई थीं। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी एक अनुमान लगाया है। इनके मुताबिक हर साल 4 लाख बच्चों और किशोरों को कैंसर होता है और इनमें से ज्यादातर बच्चों को बचाया जा सकता है। बशर्ते बच्चों में कैंसर के लक्षण पहचान कर जल्द से जल्द इलाज हो।
बच्चों में कैंसर क्यों हो जाता है?
डॉ. गौहर अहमद शिगान, सीनियर कंसल्टेंट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, पारस हेल्थ, गुरुग्राम बताते हैं कि बच्चों में कैंसर होने का मुख्य कारण है जेनेटिक म्यूटेशन। जिसमें जर्मलाइन म्यूटेशन जो कि पेरेंट्स से बच्चों में आ जाता है या DNA रिपेयर मैकेनिज्म में प्रॉब्लम हो जाती है।
प्रेगनेंसी के दौरान कोई इनफेक्शन लग गया या कोई रेडिएशन एक्सपोजर हो गया। यह सब कारण हो सकते हैं। जैसे कि बड़ों में एनवायरमेंटल फैक्टर होते हैं, वैसा बच्चों में बहुत कम पाया जाता है।
समझने वाली बात यह है कि बच्चों में कैंसर अचानक होता है। यह धूम्रपान, खराब खानपान जैसे लाइफस्टाइल कारणों से नहीं होता। इसलिए इसे रोकना मुश्किल है, लेकिन जल्दी पहचानकर इलाज करना संभव है।
कौन से कैंसर सबसे आम हैं?
बच्चों में सबसे आम कैंसर जैसे कि ब्लड कैंसर नंबर वन पर है। उसके बाद ब्रेन ट्यूमर्स, लिंफोमास और एब्डॉमिनल ट्यूमर्स हैं।
अगर गौर करें तो ब्लड कैंसर जिसे ल्यूकेमिया भी कहते हैं, बच्चों में सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसमें बच्चे के खून की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं।
ब्रेन ट्यूमर में बच्चे के दिमाग में गांठ बन जाती है। लिंफोमा में लिम्फ नोड्स प्रभावित होते हैं। एब्डॉमिनल ट्यूमर यानी पेट के अंदर के ट्यूमर।
बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षण
बच्चों में संकेत वैसे ही होते हैं जैसे बड़ों में हो जाते हैं। जैसे कि:
- रोज-रोज का बुखार होना
- पेट दर्द होना
- गर्दन या बगल में कोई गांठ दिख जाना
- बॉडी पर कोई ब्लू स्पॉट्स दिख जाना
- मसूड़ों की सूजन हो जाना
- सिर दर्द होना या आंखों के विजन में कोई चेंज आ जाना
अगर ऐसे संकेत हों तो आपको डॉक्टर के पास जल्द से जल्द जाना चाहिए। जरूरी नहीं कि यह कैंसर ही हो, बट आपको डॉक्टर के पास एक बार दिखाना जाना चाहिए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कई बार पेरेंट्स इन लक्षणों को सामान्य समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि बच्चे को बस बुखार या कमजोरी है। लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
कैसे होता है इलाज?
अगर हम बात करें जो सबसे कॉमनेस्ट कैंसर है- ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया- उसमें कीमोथेरेपी का ट्रीटमेंट मेन होता है। इसके अलावा अगर ब्रेन ट्यूमर्स की बात करें, उसमें सर्जरी फॉलोड बाय रेडियोथेरेपी या ओनली रेडियोथेरेपी का ट्रीटमेंट होता है। लिंफोमा में भी कीमोथेरेपी का रोल हो जाता है।
कोई भी कैंसर का ट्रीटमेंट मल्टीमॉडलिटी होता है। इसमें कीमोथेरेपी, सर्जरी एज वेल एज रेडियोथेरेपी का इलाज होता है।
दिलचस्प बात यह है कि बच्चों में कैंसर का इलाज बड़ों की तुलना में बेहतर रिजल्ट देता है। बच्चों का शरीर इलाज को बेहतर तरीके से झेल लेता है।
70-80% बच्चे पूरी तरह ठीक हो सकते हैं
और बच्चों को इलाज के बाद वो सामान्य जिंदगी गुजार सकते हैं। वो स्कूल जा सकते हैं। वो खेल सकते हैं, वो कूद सकते हैं।
एक बात यहां मैं बताना चाहता हूं कि हमारे देश में जो छोटे शहरों से बच्चे आ जाते हैं हमारे पास, या तो वो लेट स्टेज में आ जाते हैं या वो ट्रीटमेंट स्टार्ट करने के बाद ट्रीटमेंट छोड़ देते हैं।
जो लोग, जो बच्चे पूरा इलाज कर लेते हैं उनमें से 70 से 80% क्योर रेट पाई गई है।
समझने वाली बात यह है कि अगर समय पर इलाज शुरू हो जाए और पूरा इलाज किया जाए तो ज्यादातर बच्चों को बचाया जा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि गरीबी, जागरूकता की कमी और इलाज का खर्च बीच में आ जाते हैं।
देर से पहचान और इलाज छोड़ना- बड़ी समस्या
भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कैंसर की पहचान बहुत देर से होती है। जब तक पेरेंट्स डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है।
दूसरी बड़ी समस्या यह है कि इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है। कई परिवार शुरू में तो इलाज करवाते हैं, लेकिन पैसे खत्म होने पर इलाज बीच में छोड़ देते हैं। इससे बच्चे की जान चली जाती है।
अगर गौर करें तो सरकार ने आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं शुरू की हैं जिसमें कैंसर का इलाज कवर होता है। लेकिन अभी भी जागरूकता की कमी है।
पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?
- अगर बच्चे में लगातार बुखार, कमजोरी, वजन घटना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- किसी भी गांठ या सूजन को नजरअंदाज न करें।
- अगर कैंसर की पुष्टि हो जाए तो हिम्मत न हारें। पूरा इलाज करवाएं।
- इलाज बीच में न छोड़ें। सरकारी योजनाओं की मदद लें।
- बच्चे को भावनात्मक सपोर्ट दें। उसे बताएं कि वह ठीक हो जाएगा।
जागरूकता ही बचाव
बच्चों में कैंसर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि लक्षणों को पहचान कर जल्दी से जल्दी ट्रीटमेंट शुरू करें। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। समय पर इलाज से हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत में कैंसर बच्चों की मौत का 10वां सबसे बड़ा कारण, 2023 में 17,000 मौतें हुईं।
- ग्लोबली कैंसर बच्चों में मौत का 8वां सबसे बड़ा कारण, खसरा-टीबी-एड्स से भी खतरनाक।
- ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) सबसे आम, इसके बाद ब्रेन ट्यूमर और लिंफोमा।
- लक्षण: लगातार बुखार, गांठ, पेट दर्द, मसूड़ों की सूजन, ब्लू स्पॉट्स, सिर दर्द।
- इलाज: कीमोथेरेपी, सर्जरी, रेडियोथेरेपी- 70-80% बच्चे पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
- समस्या: देर से पहचान और इलाज बीच में छोड़ना, जागरूकता की कमी।













