USA Iran Deal : अमेरिका और ईरान के बीच अब जंग नहीं होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इसे लेकर बड़ा संदेश दिया गया है। अमेरिका का रुख नरम पड़ने के बाद अब ईरान भी समझौते को तैयार दिखाई दे रहा है।
दरअसल अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान जंग से निकलना चाहता है क्योंकि ट्रंप को यह डर लग रहा है कि अगर जंग लंबी चली तो अमेरिका को भारी नुकसान होगा और खुद ट्रंप को भी इसका नुकसान नवंबर में होने वाले चुनावों में होगा। इसलिए ट्रंप अब नहीं चाहते कि ईरान से फिर जंग हो क्योंकि 40 दिन की जंग में उन्हें समझ में आ गया है कि ईरान को हराना अमेरिका के बस की बात नहीं है।
देखा जाए तो यह एक बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव है। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से तनाव रहा है। लेकिन अब लगता है कि दोनों देश एक समझौते की तरफ बढ़ रहे हैं।
48 घंटे में इस्लामाबाद में बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच डील तय हो गई है। 48 घंटों के अंदर ही समझौता हो जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच एक और दौर की बातचीत की तैयारी हो गई है। और इस बार भी बातचीत इस्लामाबाद में होनी तय मानी जा रही है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनती है, तब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस्लामाबाद जा सकते हैं और वहीं डील का ऐलान करेंगे।
वहीं यह भी कहा जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी इस दौरान इस्लामाबाद में ही रहेंगे। यानी अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपति के बीच सीधी बात हो सकती है।
ट्रंप ने खुद यह बात कही है कि 2 दिन बाद पाकिस्तान में एक और दौर की शांति वार्ता हो सकती है। पाकिस्तान ने भी कहा है कि इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के साथ बातचीत के दूसरे दौर का प्रस्ताव रखा है।
पहले दौर में यूरेनियम संवर्धन पर अटकी बात
फिलहाल इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत को लेकर कोई ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन ट्रंप के बयान से यह साफ हो गया है कि वह चाहते हैं कि बातचीत पाकिस्तान में ही हो, और कोई डील हो जाए।
पाकिस्तान में 11 अप्रैल को जो बातचीत हुई थी, उसमें ईरान के यूरेनियम संवर्धन के मामले को लेकर बात बिगड़ गई थी। ईरान की तरफ से प्रस्ताव रखा गया था कि वह 5 सालों तक यूरेनियम का संवर्धन नहीं करेगा। जबकि अमेरिका 20 साल तक इस पर रोक चाहता था।
अमेरिकी उप-राष्ट्रपति JD वेंस चाहते थे कि ईरान यह भी कबूल करे कि वह कभी भी परमाणु बम नहीं बनाएगा। लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं था।
समझने वाली बात यह है कि यूरेनियम संवर्धन ही परमाणु बम बनाने की मुख्य प्रक्रिया है। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार बनाए। लेकिन ईरान अपनी संप्रभुता के नाम पर इस पर रोक मानने को तैयार नहीं था।
अमेरिका ने नरम किया रुख
लेकिन अब कहा जा रहा है कि अमेरिका इस जंग से निकलना चाहता है। इसलिए उसने अपना रुख नरम कर लिया है। अब बात 20 साल से घटकर 10 या 15 साल के बीच हो सकती है। और यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया है कि अब जंग नहीं होगी।
उन्होंने न्यूज़ से बात करते हुए कहा है- “जंग अब पुरानी बात हो गई है। वैसे अभी सब कुछ पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और हालात पर नजर रखी जा रही है। अब स्थिति नियंत्रण में है। ईरान अब समझौता करने के लिए काफी इच्छुक नजर आ रहा है।”
अगर गौर करें तो अगर अमेरिका इस वक्त अपनी सैन्य मौजूदगी हटा ले, तब भी ईरान को दोबारा खड़ा होने में 20 साल तक का समय लग सकता है। ट्रंप भले ही यह दावा कर रहे हैं कि जंग की जरूरत अब नहीं है।
हॉर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी
इस बीच अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया है। ईरान के बंदरगाह से आने वाले हर जहाज को अमेरिकी नेवी रोक रही है। अमेरिका ने 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 100 से ज्यादा फाइटर जेट और सर्विलांस एयरक्राफ्ट की तैनाती की है। जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर, एम्फीबियस असॉल्ट शिप, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, लिटोरल कॉम्बैट शिप शामिल है।
अमेरिका की यह कोशिश ईरान पर समझौते के लिए दबाव बनाने का हिस्सा बताई जा रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति होती है। इसे बंद करने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच सकती है। कीमतें बढ़ सकती हैं।
चीन और रूस का विरोध
इस बीच रूस और चीन भी अब खुलकर ईरान के साथ आ गए हैं और अमेरिका के हॉर्मुज को बंद करने की कारवाई की निंदा कर रहे हैं। अमेरिका ने चीन के आधा दर्जन से भी ज्यादा तेल टैंकरों को रोककर तनाव को और बढ़ा दिया है।
चीन ने इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखाया है। उसकी तरफ से अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंध और व्यापारिक रिश्ते हैं जो जारी रहेंगे। उसके जहाज पहले की तरह ही हॉर्मुज से गुजरेंगे।
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा है कि बीजिंग के ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका हमारे मामलों में दखल नहीं देगा।
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। हॉर्मुज पर ईरान का अधिकार है।
यूरोप भी अमेरिका से अलग रुख
दूसरी तरफ हॉर्मुज को लेकर यूरोप में भी चिंता दिखाई दे रही है और अब यूरोप ने इस मुद्दे पर अमेरिका को झटका देने की तैयारी कर ली है। यूरोप के देश हॉर्मुज की सुरक्षा के लिए एक नया समूह बनाने की योजना पर गुपचुप तरीके से काम कर रहे हैं और ट्रंप को इससे दूर रखने का ही प्लान है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि इस मिशन में वो देश शामिल नहीं होंगे जो इस संघर्ष का हिस्सा हैं। सिर्फ ईरान को इसका हिस्सा बनाया जाएगा। जर्मनी ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है।
अब इस योजना को लागू करने के लिए इस हफ्ते मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर 40 देशों के साथ एक बैठक भी कर सकते हैं। इस बैठक में अमेरिका को शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं चीन और भारत को बुलावा भेजा जाएगा।
क्यों अमेरिका जंग से निकलना चाहता है?
दिलचस्प बात यह है कि 40 दिन की जंग में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है। सैकड़ों सैनिक मारे गए। अरबों डॉलर का खर्चा हुआ। ईरान की मिसाइलों ने अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया।
सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका में नवंबर में चुनाव होने हैं। ट्रंप नहीं चाहते कि जंग का मुद्दा उनके खिलाफ जाए। अमेरिकी जनता युद्ध से थक चुकी है।
इसलिए ट्रंप अब किसी भी कीमत पर डील करना चाहते हैं। भले ही उन्हें अपनी कुछ शर्तों में छूट देनी पड़े।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिका और ईरान के बीच 48 घंटे में इस्लामाबाद में दूसरे दौर की शांति वार्ता होगी।
- ट्रंप ने कहा- अब जंग नहीं होगी, ईरान समझौते के लिए तैयार दिख रहा।
- यूरेनियम संवर्धन पर अमेरिका ने नरम किया रुख, 20 साल से घटकर 10-15 साल हो सकती है अवधि।
- हॉर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी, 10,000 सैनिक और 100 फाइटर जेट तैनात।
- चीन और रूस ने अमेरिकी नाकाबंदी की निंदा की, चीनी टैंकर रोके गए।
- यूरोप ने अमेरिका को दूर रखकर हॉर्मुज सुरक्षा के लिए नया समूह बनाने की योजना बनाई।













