Weather Update India : अप्रैल का महीना और मौसम का मिजाज हर दिन बदलता हुआ। कभी तेज धूप, कभी राहत भरी बारिश और अब एक नया मोड़ आ गया है। अगर आप सोच रहे थे कि गर्मी ने पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है, तो जरा रुकिए क्योंकि आसमान फिर करवट लेने वाला है। आने वाले दिनों में देश का मौसम दो अलग-अलग चेहरों के साथ नजर आएगा। कहीं लू के थपेड़े होंगे तो कहीं गरज-चमक के साथ बारिश।
देखा जाए तो इसकी वजह है एक सक्रिय होता पश्चिमी विक्षोभ, जो 15 अप्रैल से मौसम का पूरा खेल बदलने जा रहा है। दरअसल पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश ने थोड़ी राहत दी थी। लेकिन उसके बाद तापमान तेजी से बढ़ा और गर्मी ने फिर जोर पकड़ लिया।
अब भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने संकेत दिया है कि यह स्थिति ज्यादा समय तक एक जैसी नहीं रहने वाली। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होते ही मौसम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
15 अप्रैल से बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जून से पहले ही अप्रैल के मध्य में इस तरह का बदलाव असामान्य नहीं तो खास जरूर माना जा रहा है। 15 अप्रैल से लेकर अगले तीन से चार दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मौसम देखने को मिलेगा।
जहां एक ओर उत्तर-पश्चिमी और पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां बढ़ेंगी, तो वहीं दूसरी ओर मध्य और दक्षिण भारत में गर्मी और लू का असर रहेगा। समझने वाली बात यह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का व्यवहार बिल्कुल विपरीत होगा।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम पूरी तरह बदल सकता है। यहां हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में तो बर्फबारी भी होगी।
खासकर 17 और 18 अप्रैल के आसपास ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है। जिससे किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अगर गौर करें तो पहाड़ी इलाकों में इस समय गेहूं और अन्य रबी फसलें पक रही हैं। ऐसे में ओलावृष्टि से नुकसान का खतरा है।
पूर्वोत्तर भारत में भी सक्रिय रहेगा मौसम
पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी गरज-चमक के साथ बारिश देखने को मिल सकती है। दिलचस्प बात यह है कि पूर्वोत्तर में अप्रैल-मई में बारिश होना सामान्य है, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता ज्यादा हो सकती है।
महाराष्ट्र, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में लू का प्रकोप
वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे इलाकों में गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा। यहां हीट वेव यानी लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। अगले कुछ दिनों में तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। जिससे लोगों को दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मध्य भारत में पहले से ही तापमान 40-42 डिग्री के आसपास चल रहा है। अगर इसमें और 3-5 डिग्री की बढ़ोतरी हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
दिल्ली-NCR में भी बढ़ेगा तापमान
दिल्ली और आसपास के इलाकों की बात करें तो यहां भी गर्मी धीरे-धीरे अपने तेवर दिखा रही है। आने वाले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में 4 से 5 डिग्री तक की बढ़ोतरी होगी। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान करेंगी।
हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ का हल्का असर यहां दिखने लगेगा, जिससे तापमान में मामूली गिरावट संभव है। लेकिन बड़ी राहत की उम्मीद नहीं है। दिल्ली वालों को अभी कुछ दिन और गर्मी सहनी पड़ेगी।
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में भी गर्मी
उत्तर प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना रहेगा। तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा। खासतौर पर पश्चिमी यूपी में लू जैसे हालात बन सकते हैं। बिहार और झारखंड में भी गर्मी और उमस लोगों को परेशान करेगी।
हालांकि, कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बादल छाने से थोड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन दिन के समय तापमान ऊंचा ही रहेगा। अगर गौर करें तो बिहार और झारखंड में इस समय चैत्र-बैसाख की गर्मी शुरू हो जाती है, जो काफी तीखी होती है।
मौसम बदलाव के पीछे क्या है वजह?
मौसम के इस बदलाव के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। ऊपरी हवा में बन रहे चक्रवाती परिसंचरण, ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम मिलकर यह बदलाव ला रहे हैं। इसके साथ ही जेट स्ट्रीम की रफ्तार भी मौसम के मिजाज को प्रभावित कर रही है।
समझने वाली बात यह है कि पश्चिमी विक्षोभ एक extra-tropical storm है जो भूमध्य सागर से चलकर भारतीय उपमहाद्वीप तक आता है। यह उत्तरी भारत में बारिश और बर्फबारी लाता है। अप्रैल-मई में भी कभी-कभी यह सक्रिय हो जाता है।
किसानों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने किसानों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर जहां ओलावृष्टि की संभावना है, वहां रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे तैयार फसल को जल्दी काट लें।
पहाड़ी इलाकों में सेब, चेरी जैसे फलों के बाग भी प्रभावित हो सकते हैं। तेज हवाओं और ओलों से फलों के पेड़ों को नुकसान होने का खतरा है।
लोगों को क्या करना चाहिए?
देश का मौसम आने वाले दिनों में दो अलग-अलग तस्वीरें पेश करेगा। एक तरफ बारिश, ठंडक और तेज हवाएं तो दूसरी तरफ गर्मी, उमस और लू का असर। ऐसे में जरूरी है कि लोग मौसम के अनुसार खुद को ढालें और सतर्क रहें।
जहां गर्मी ज्यादा है, वहां दिन के समय बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त पानी पिएं। हल्के और सूती कपड़े पहनें। वहीं जहां बारिश की संभावना है, वहां छाता साथ रखें। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को मौसम अपडेट चेक करते रहना चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- 15 अप्रैल से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, मौसम में बड़ा बदलाव आएगा।
- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी, 17-18 अप्रैल को ओलावृष्टि की संभावना।
- पूर्वोत्तर भारत में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं, तेज बारिश होगी।
- महाराष्ट्र, विदर्भ, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में लू चलेगी, तापमान 2-5 डिग्री बढ़ेगा।
- दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान में 4-5 डिग्री की बढ़ोतरी होगी।
- किसानों को ओलावृष्टि से फसल बचाने की सलाह दी गई है।













