Gold Silver Rate Today : बाजार में इन दिनों अजीब सी बेचैनी है। एक तरफ शादियों का सीजन दस्तक दे रहा है, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने निवेशकों की रातों की नींद उड़ा रखी है। आलम यह है कि बाजार अब किसी आर्थिक डेटा से ज्यादा ‘ट्वीट्स’ पर नाच रहा है। कभी सीजफायर की खबर आती है तो बाजार झूम उठता है, और अगले ही पल युद्ध की धमकी उसे धड़ाम कर देती है।
पिछले एक महीने में हमने सोने-चांदी की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। जहां एक महीने पहले सोना आसमान छू रहा था, वहीं अब यह कुछ सस्ता हुआ है। लेकिन पिछले एक हफ्ते में फिर से इसमें बढ़त दिखी है। ऐसे में आम आदमी से लेकर बड़े निवेशक तक सब उलझन में हैं कि आखिर करें तो क्या करें? क्या ये खरीदारी का सही मौका है या अभी और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
पिछले एक महीने में सोने-चांदी की चाल
इसे लेकर एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने खास बातचीत में कई सवालों के जवाब दिए। जैसे कि उनसे पूछा गया कि पिछले एक महीने और एक हफ्ते में सोने-चांदी की चाल कैसी रही है? क्या यह वाकई सस्ते हुए हैं?
तो इस पर अनुज गुप्ता ने कहा है कि अगर हम लंबी अवधि यानी कि एक महीने का डेटा देखें तो गिरावट है। लेकिन शॉर्ट टर्म यानी कि एक हफ्ते में रिकवरी आई है और सोने में उतार-चढ़ाव देखा गया है।
देखा जाए तो जनवरी के ऊंचे स्तरों से तुलना करें तो सोना करीब 30% और चांदी 50% से ज्यादा टूट चुकी है। ₹1,90,000 वाला सोना अब ₹1,45,000 के भाव में मिल रहा है।
युद्ध की वजह से बाजार अनिश्चित
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि युद्ध की वजह से बाजार बहुत अनसर्टेन यानी कि अनिश्चित हो गया। मार्केट अब सिर्फ ट्वीट्स पर रिएक्ट कर रहा है। 15 मिनट पहले कोई खबर आती है तो बाजार ऊपर जाता है और वहीं कुछ ही पल में वह खबर बदल जाती है तो बाजार धड़ाम हो जाता है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी डगमगा गया है।
समझने वाली बात यह है कि भू-राजनीतिक तनाव हमेशा सोने की कीमतों को प्रभावित करता है। सोना एक सेफ हेवन एसेट माना जाता है। जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन इस बार मामला अलग है। तनाव तो है, लेकिन कभी बढ़ता है तो कभी घटता है।
फिजिकल गोल्ड खरीदना है तो बेहतरीन मौका
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि फिजिकल गोल्ड यानी कि गहने खरीदना चाहते हैं तो यह बेहतरीन मौका है। शादी-ब्याह में आप देरी नहीं कर सकते, इसलिए मौजूदा गिरावट का फायदा उठाना ही समझदारी है।
इसी के साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अभी मार्केट थोड़ा ठंडा है। लोग अनिश्चितता की वजह से डरे हुए हैं और कैश बचाकर रखना चाहते हैं। ऐसे में कई ज्वेलर डिस्काउंट ऑफर दे रहे हैं। अगर आप मार्केट जाकर एक्सप्लोर करेंगे तो आपको अच्छे रेट्स और मेकिंग चार्जेस में छूट मिल सकती है।
अगर गौर करें तो यह शादी के सीजन में गहने खरीदने वालों के लिए सुनहरा मौका है। सोना सस्ता है और ज्वेलर्स भी डिस्काउंट दे रहे हैं।
आगे क्या होगा? बड़ी गिरावट या उछाल?
फिलहाल किसी बड़े बूम की उम्मीद नहीं है, क्योंकि महंगाई और क्रूड ऑयल की कीमतें पहले ही बढ़ी हुई हैं। लेकिन बड़ी गिरावट भी नहीं दिखेगी। मार्केट एक दायरे में रहेगा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था का डेटा यानी कि जीडीपी और बेरोजगारी खराब आए हैं, जो सोने के लिए सपोर्ट का काम करेंगे। जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था कमजोर होती है, तो डॉलर कमजोर होता है और सोना मजबूत होता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सोने की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं- डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ब्याज दरें, भू-राजनीतिक तनाव, मांग-आपूर्ति आदि।
सोना बेहतर, चांदी पर दबाव
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोना इस साल ज्यादा बेहतर परफॉर्म करेगा। चांदी एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है और युद्ध की वजह से औद्योगिक गतिविधियां धीमी पड़ी हैं। गैस सप्लाई की कमी से मेटल कटिंग जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं, जिससे चांदी की डिमांड पर असर पड़ सकता है।
इसलिए निवेशकों के लिए सोना फिलहाल ज्यादा सुरक्षित है। चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अक्षय तृतीया पर क्या होगा?
कहा यह भी जा रहा है कि अक्षय तृतीया के मौके पर सोने-चांदी में एक बार फिर से उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट साफ तौर पर कह रहे हैं कि जिनके घर में शादी है, उन्हें खरीदारी के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। उनके लिए यह बहुत अच्छा मौका है।
अक्षय तृतीया पर भारत में सोने की खरीदारी परंपरागत रूप से बढ़ जाती है। इस दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे में मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ सकती हैं।
क्या सोना ₹1 लाख के नीचे जाएगा?
तो अब सवाल यह है कि क्या वाकई में सोने की कीमत कभी ₹1 लाख के नीचे जा पाएगी? तो इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सब वैश्विक अनिश्चितता पर निर्भर करता है।
तो अब देखना होगा कि आने वाले वक्त के अंदर माहौल किस तरीके से बदलता है। क्या सीजफायर वाकई ही होता है और सोने-चांदी का इस पर क्या असर होता है।
दिलचस्प बात यह है कि सोने की कीमतें लंबी अवधि में हमेशा ऊपर की तरफ ही गई हैं। भले ही बीच-बीच में गिरावट आती हो, लेकिन 10-15 साल के पीरियड में सोना हमेशा महंगा ही हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो?
अगर आप निवेशक हैं और सोने में पैसा लगाना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट्स की सलाह है:
- लंबी अवधि के लिए सोचें। शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव होगा।
- SIP के जरिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ETF में निवेश करें।
- फिजिकल गोल्ड केवल जरूरत के हिसाब से खरीदें, निवेश के लिए नहीं।
- पोर्टफोलियो में 10-15% सोने का हिस्सा रखें, ज्यादा नहीं।
मुख्य बातें (Key Points)
- पिछले एक महीने में सोना 30% और चांदी 50% से ज्यादा गिरी, लेकिन एक हफ्ते में रिकवरी दिखी।
- मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से बाजार अनिश्चित, ट्वीट्स पर रिएक्ट कर रहा मार्केट।
- ₹1,90,000 से गिरकर ₹1,45,000 पर सोना, शादी के लिए बेहतरीन मौका।
- ज्वेलर्स डिस्काउंट और मेकिंग चार्जेस में छूट दे रहे हैं।
- सोना चांदी से बेहतर परफॉर्म करेगा, इंडस्ट्रियल डिमांड कम होने से चांदी पर दबाव।
- लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ETF बेहतर विकल्प।













