America Iran Tension एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं। इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल हो जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच धमकियों का नया दौर शुरू हो गया है। ट्रंप ने ईरान को पूरी तरह खत्म करने की चेतावनी दी है तो ईरान ने भी जंग की तैयारी पूरी कर ली है।
इस्लामाबाद में हुई बैठक में जब समझौता होने से बस कुछ इंच की दूरी रह गई थी, तभी अमेरिका ने अपनी मांगें बढ़ा दीं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराजची ने साफ कह दिया कि अगर अमेरिका ईरान का सम्मान नहीं करता तो समझौता नामुमकिन है। वहीं अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पश्चिम एशिया में फिर से जंग छिड़ने वाली है?
ट्रंप की धमकी: ईरान को खत्म कर देगी अमेरिकी सेना
America Iran Tension को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हुई असफल वार्ता के बाद भले ही दो सप्ताह का अस्थाई युद्ध विराम कायम है, लेकिन अमेरिकी सेना सही वक्त आने पर ईरान को पूरी तरह खत्म कर देगी।
ट्रंप ने इस्लामाबाद की बैठक के फेल होने पर कहा कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे वापस आते हैं या नहीं। अगर वे वापस नहीं आते हैं तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका यह कभी नहीं होने देगा।
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछली रात यह बात साफ कर दी थी कि वह अब भी परमाणु हथियार चाहता है। लेकिन ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। अमेरिका इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
अमेरिका ने शुरू की ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी
America Iran Tension को और बढ़ाते हुए अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। यूएस सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति की घोषणा के मुताबिक अमेरिकी सेनाएं 13 अप्रैल को अमेरिकी समय अनुसार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों में आने जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकेबंदी लागू करना शुरू कर देंगी।
यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों का इस्तेमाल करने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी। इसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित सुविधाएं भी शामिल हैं।
इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होगा। कई देशों के जहाज ईरानी बंदरगाहों का इस्तेमाल करते हैं। अब अमेरिकी नाकेबंदी से यह व्यापार रुक जाएगा। यह ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है।
ईरान का जवाब: अमेरिका को दी सीधी चेतावनी
लेकिन America Iran Tension में ईरान पीछे हटने वाला नहीं है। अमेरिका की धमकियों और नाकेबंदी का ईरान पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा। बल्कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराजची उल्टे अमेरिका को ही चेतावनी दे रहे हैं।
उन्होंने इस्लामाबाद की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि 47 सालों में उच्चतम स्तर पर हुई गहरी बातचीत में ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी तरह से बातचीत की। लेकिन जब हम इस्लामाबाद समझौते से बस कुछ ही इंच दूर थे तो हमें बहुत ज्यादा मांगों, बदलते लक्ष्यों और रुकावटों का सामना करना पड़ा।
अराजची ने कहा कि कोई सबक नहीं सीखा गया। अच्छाई से अच्छाई मिलती है और दुश्मनी से दुश्मनी का जन्म होता है। यह एक साफ संदेश था कि अगर अमेरिका दुश्मनी दिखाएगा तो ईरान भी पीछे नहीं रहेगा।
ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का भी कहना है कि वो अमेरिका के हर कदम के खिलाफ पूरी तरह तैयार है। ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं।
ईरान की शर्त: सम्मान के बिना नहीं होगा समझौता
America Iran Tension को कम करने के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान ने जरूर कहा कि अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे।
यानी ईरान अभी भी वार्ता के लिए तैयार है। बशर्ते अमेरिका अपनी मनमानी छोड़कर ईरान का पक्ष भी समझने को तैयार हो। ईरान की यह शर्त साफ है कि समझौता बराबरी के आधार पर होगा, अमेरिकी दबाव में नहीं।
इन सबके बीच ईरान तेजी से खुद को मजबूत भी करने में जुटा हुआ है। वो युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए ठिकानों को दुरुस्त कर रहा है। समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान और तबरीज के बीच और तबरीज और मशहद के बीच क्षतिग्रस्त रेलवे लाइनों की मरम्मत कर दी गई है।
जिससे 4 से 5 दिनों के निलंबन के बाद ट्रेनों की सेवा दोबारा शुरू हो गई है। यानी ईरान का रुख साफ है कि आप समझौता चाहते हैं तो समझौता होगा और अगर आप जंग चाहते हैं तो जंग होगी।
ट्रंप का गुस्सा अब पोप लियो पर भी फूटा
America Iran Tension में अपनी जीत सुनिश्चित न कर पाने के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी बढ़ती जा रही है। और अब उनका गुस्सा पोप लियो 14 पर भी फूट पड़ा है।
उन्होंने इस जंग को लेकर पोप लियो के रुख की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हमें ऐसा पोप पसंद नहीं है जो परमाणु हथियार रखने को जायज ठहराए। वह ऐसे व्यक्ति है जो यह नहीं मानते कि हमें ऐसे देश से खिलवाड़ करना चाहिए जो परमाणु हथियार चाहता है ताकि वो दुनिया को तबाह कर सके।
दरअसल पोप लियो ने पिछले हफ्ते ईरान के लोगों के खिलाफ ट्रंप की बयानबाजी और उनकी धमकियों की कड़ी निंदा की थी और उन्हें बिल्कुल अस्वीकार्य बताया था। अब इसे ही लेकर ट्रंप ने उन पर भी निशाना साधा है।
नाटो सहयोगियों पर भी बढ़ाया दबाव
America Iran Tension में अमेरिका को अपने सहयोगियों का भी साथ नहीं मिल रहा। इसे लेकर ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए बड़ा ऐलान भी किया है।
ट्रंप ने कहा है कि नाटो पर अमेरिकी खर्च की गंभीरता पूर्वक जांच की जाएगी। इससे पहले वह इस संगठन से बाहर निकलने के भी संकेत दे चुके हैं। क्योंकि ईरान के खिलाफ जंग में कोई भी नाटो सहयोगी अमेरिका के साथ नहीं आया।
अब जब ट्रंप को इस जंग में जीत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही तो उनके बयानों से उनकी बौखलाहट साफ जाहिर हो रही है। पूरा यूरोप अमेरिका की नीतियों के खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है।
इस्लामाबाद वार्ता में क्या हुआ था?
America Iran Tension को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 47 सालों में सबसे उच्च स्तर की बातचीत हुई थी। दोनों देशों के प्रतिनिधि मंडल आमने-सामने बैठे थे।
शुरुआती बैठकों में माहौल सकारात्मक था। समझौते की उम्मीद बंध रही थी। ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अच्छी तरह से बातचीत की। लेकिन जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, अमेरिकी पक्ष ने अपनी मांगें बढ़ानी शुरू कर दीं।
जब समझौता होने से बस कुछ इंच की दूरी रह गई थी, तभी अमेरिका ने अपने लक्ष्य बदल दिए। नई शर्तें रख दीं। यह ईरान को स्वीकार नहीं था। ईरानी प्रतिनिधि मंडल ने साफ कह दिया कि वे अपने सम्मान से समझौता नहीं कर सकते।
आखिरकार बातचीत विफल हो गई। दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराजची ने इसका दोष अमेरिका पर मढ़ा। कहा कि अमेरिका ने कोई सबक नहीं सीखा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता संकट
America Iran Tension का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। एक तरफ इजरायल लेबनान के साथ जंग लड़ रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।
हालांकि ईरान और इजरायल के बीच दो हफ्तों का सीजफायर चल रहा है, लेकिन यह अस्थाई है। कभी भी टूट सकता है। अमेरिका की नाकेबंदी और ट्रंप की धमकियों से स्थिति और खराब हो रही है।
पूरा क्षेत्र एक बारूद के ढेर पर बैठा है। एक छोटी सी चिंगारी से बड़ी जंग भड़क सकती है। दुनिया के कई देश इस संकट को लेकर चिंतित हैं। लेकिन कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।
क्या अमेरिका झुकेगा ईरान के आगे?
America Iran Tension में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान के आगे झुकेगा? क्योंकि ईरान की शर्तें नहीं मानी गई तो समझौता नामुमकिन है।
ईरान ने साफ कह दिया है कि सम्मान के बिना कोई समझौता नहीं होगा। अमेरिका को अपनी तानाशाही छोड़नी होगी। ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को मानना होगा। तभी बातचीत आगे बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप अपने सख्त रुख पर कायम हैं। वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं हासिल करने देना चाहते। वे ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति अपना रहे हैं। नाकेबंदी इसी का हिस्सा है।
लेकिन ईरान पर इसका कोई असर नहीं हो रहा। बल्कि ईरान और मजबूती से खड़ा हो रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने जंग की पूरी तैयारी कर ली है। ईरान की जनता भी अपनी सरकार के साथ खड़ी है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
America Iran Tension का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ेगा। खासकर तेल की कीमतों पर।
ईरान खाड़ी क्षेत्र में एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है। अमेरिकी नाकेबंदी से तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
अगर जंग छिड़ती है तो हरमुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की आपूर्ति रुक सकती है। यह दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा।
भारत जैसे देश जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। महंगाई बढ़ेगी। आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा।
क्या होगा आगे?
America Iran Tension में आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। समझौते की संभावना फिलहाल कम दिख रही है।
अगर ट्रंप अपना रुख नरम करते हैं और ईरान के सम्मान को स्वीकार करते हैं तो बातचीत फिर से शुरू हो सकती है। लेकिन अभी तक इसके कोई संकेत नहीं मिल रहे।
दूसरी तरफ अगर अमेरिका दबाव बढ़ाता रहा तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। दोनों देशों के बीच सीधी टकराव की संभावना बढ़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस संकट को हल करने के लिए आगे आना होगा। मध्यस्थता की कोशिश करनी होगी। वरना पश्चिम एशिया एक बार फिर जंग की आग में जल सकता है।
मौजूदा वक्त में पश्चिम एशिया में हालात बेहद नाजुक दौर में पहुंच गए हैं। दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या दोनों देश समझदारी दिखाएंगे या फिर दुनिया को एक और बड़े युद्ध का सामना करना पड़ेगा, यह समय ही बताएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• इस्लामाबाद में 47 सालों में उच्चतम स्तर की अमेरिका-ईरान वार्ता विफल हो गई
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खत्म करने की दी धमकी
• अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू की
• ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराजची ने कहा सम्मान के बिना कोई समझौता नहीं
• ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान ने वार्ता के लिए तैयारी जताई लेकिन शर्तों के साथ
• इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने जंग की पूरी तैयारी की
• ट्रंप का गुस्सा पोप लियो और नाटो सहयोगियों पर भी फूटा
• पश्चिम एशिया में फिर से जंग छिड़ने की आशंका













