SYL Canal यानी Sutlej Yamuna Link Canal का नाम आते ही पंजाब और हरियाणा में बहस गर्म हो जाती है। यह सिर्फ एक कैनाल नहीं, बल्कि भारत के सबसे पुराने और सबसे विवादित जल विवादों में से एक है। 1982 में शुरू हुई इस परियोजना की कहानी आज भी अधूरी है।
एसवाईएल दे। एसवाईएल डिस्प्यूट। एसवाईएल… यह शब्द ही दोनों राज्यों में विवाद का पर्याय बन चुका है। आखिरकार यह कैनाल है क्या? यह इतना विवादित क्यों रहा? और आज 2026 में इसकी स्थिति क्या है? आइए इस पूरी कहानी को समझते हैं।
1966: Punjab का विभाजन और समस्या की शुरुआत
साल 1966 में Punjab Reorganisation Act के तहत पंजाब और हरियाणा का विभाजन हुआ। इससे पहले यह एक ही क्षेत्र था। पंजाबी बोलने वाला इलाका पंजाब में गया और हरियाणवी और हिंदी बोलने वाला इलाका हरियाणा में चला गया।
अकाली दल ने पंजाबी सूबा मूवमेंट लीड किया था, जिसकी मांग थी कि पंजाबी भाषी क्षेत्रों को अलग राज्य मिले। लेकिन जब विभाजन हुआ तो कई शिकायतें सामने आईं। प्रोटेस्टर्स का मानना था कि कई पंजाबी भाषी क्षेत्र हरियाणा में चले गए। चंडीगढ़ को Union Territory बना दिया गया। पावर और इरीगेशन प्रोजेक्ट्स का नियंत्रण केंद्र सरकार के पास चला गया।
अब राज्यों का विभाजन तो हो गया, लेकिन नदियों का क्या? यहीं से शुरू होती है SYL Canal की कहानी।
1947-1960: Partition और Indus Water Treaty की पृष्ठभूमि
1947 में जब India-Pakistan Partition हुआ, तो नदियों का भी बंटवारा हुआ। एकीकृत भारत में बहने वाली नदियां थीं – Indus, Jhelum, Chenab, Ravi, Beas, Sutlej।
1955 में Ravi और Beas का allocation हुआ। राजस्थान को मिला 8 MAF (Million Acre Feet), अविभाजित पंजाब को 7.2 MAF, और जम्मू-कश्मीर को 0.65 MAF।
1960 में आई Indus Water Treaty। यह भारत और पाकिस्तान के बीच साइन हुई और इसे World Bank ने mediate किया। इस treaty के तहत Indus, Jhelum, Chenab पाकिस्तान के पास गईं। Ravi, Beas, Sutlej भारत के पास रहीं।
1976-1982: SYL का प्रस्ताव और विवाद की शुरुआत
1966 में विभाजन के बाद 1976 में केंद्र सरकार ने एक notification जारी की। अविभाजित पंजाब के हिस्से का 7.2 MAF पानी में से 3.5 MAF हरियाणा को allocate किया गया। यह पानी Sutlej और उसकी tributary Beas से आना था।
और इस पानी को पहुंचाने के लिए एक कैनाल बनाने का प्रस्ताव रखा गया – Sutlej Yamuna Link (SYL) Canal। यह 214 किलोमीटर लंबा कैनाल होना था, जिसमें से 122 किमी पंजाब में और 92 किमी हरियाणा में होता।
1981 में इंदिरा गांधी ने एक tripartite agreement किया – पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच। Beas और Ravi के पानी को recalculate किया गया। Total 17.17 MAF पानी था, जिसका allocation इस प्रकार हुआ:
• पंजाब: 4.22 MAF
• हरियाणा: 3.5 MAF
• राजस्थान: 8.6 MAF
• जम्मू-कश्मीर: 0.65 MAF
• दिल्ली: 0.2 MAF
8 अप्रैल 1982 को पटियाला के कपूरी गांव में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने SYL Canal का उद्घाटन किया। लेकिन यहीं से विरोध भी शुरू हुआ।
Kapuri Morcha: अकाली दल का विरोध
अकाली दल ने इस परियोजना का विरोध किया। उन्होंने Kapuri Morcha नाम से आंदोलन शुरू किया। उनका तर्क था कि पंजाब के पास खुद पर्याप्त पानी नहीं है, हम अपना पानी नहीं देंगे।
कैनाल का पहला phase जो हरियाणा के area में पड़ता था (करीब 75 किमी) पूरा हो गया। लेकिन पंजाब में काम रुक गया।
1980s: हिंसा, Militancy और Punjab Accord
1980 का दशक पंजाब में militancy और violence का दौर था। 1984 में Operation Blue Star हुआ, जब Indian Army ने Golden Temple में प्रवेश किया। यह Sikhs के लिए बेहद sensitive मामला था। इसी साल इंदिरा गांधी की हत्या हुई।
1985 में नए प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने Punjab Accord पर हस्ताक्षर किए। यह accord Harchand Singh Longowal के साथ साइन हुआ, जो अकाली दल के लीडर थे।
इस accord में कई provisions थे:
• All India Gurdwara Act का provision
• पानी के मुद्दे पर एक tribunal बनाना, जिसे Supreme Court के एक judge head करेंगे
• SYL की construction जारी रहेगी और यह 15 अगस्त 1986 तक complete हो जाएगी
लेकिन अकाली दल के कुछ लीडर्स ने इसे reject कर दिया। उन्होंने इसे “sell out” कहा। अगस्त 1985 में Longowal की हत्या कर दी गई।
1987-1990: Eradi Tribunal और खून-खराबा
1987 में Eradi Tribunal ने अपनी सिफारिशें दीं। Supreme Court के Justice V. Balakrishna Eradi ने राज्यों के shares को बढ़ाया:
• पंजाब: 5 MAF
• हरियाणा: 3.83 MAF
यह utilizable surplus water को ध्यान में रखकर किया गया था। लेकिन इस tribunal के decision को पंजाब में notify नहीं किया जा सका। कारण थी militancy और अकाली दल लीडर्स का विरोध।
1990 वह साल था जब SYL के लिए खून बहा। चंडीगढ़ के पास project site पर 30 laborers की हत्या कर दी गई। Balwinder Jattana ने SYL के Chief Engineer ML Sekhri और Superintending Engineer Avtar Singh Aulakh की हत्या कर दी।
सिद्धू मूसेवाला की मौत के बाद जो पहला गाना release हुआ वह “SYL” था। इसमें Sikhs के खिलाफ हुई unfair चीजों का जिक्र था और Balwinder Singh Jattana की praise भी थी। YouTube ने यह गाना take down कर दिया था।
1991 में Jattana को encounter में मार दिया गया।
1996-2016: Supreme Court की लड़ाई
1990 के नवंबर में ही हरियाणा ने दिल्ली से कहा कि इस काम को किसी central agency को हैंडओवर किया जाए। साल बीतते गए और 1996 में हरियाणा Supreme Court चला गया। मांग थी कि पंजाब को direct किया जाए कि SYL का काम पूरा करे।
2002 में Supreme Court ने पंजाब को SYL का काम complete करने का निर्देश दिया।
2004 में Supreme Court ने फिर से यही directive दिया। लेकिन इसी साल जून में पंजाब ने एक controversial act pass किया – Punjab Termination of Agreements Act 2004।
इस act के तहत पंजाब ने water sharing agreements को terminate कर दिया और SYL की construction को cancel कर दिया। हालांकि यह law दूसरे states के existing water utilization को protect करता था।
2016 में Supreme Court ने इस act को unconstitutional करार दिया। Supreme Court ने कहा कि पंजाब original agreement से bound है। इस judgment के जवाब में Congress के सभी MLAs ने resign कर दिया।
जो जमीन SYL construction के लिए ली गई थी, उसे Punjab Sutlej Yamuna Link Canal Land Bill 2016 के तहत original owners को वापस कर दिया गया। 2017 में Supreme Court ने कहा कि यह valid नहीं है और state को status quo maintain करने को कहा।
BBMB: भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की भूमिका
1976 में Bhakra Beas Management Board (BBMB) का गठन किया गया। यह board सुनिश्चित करता है कि पानी सही से supply हो – पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ को।
Bhakra Dam (नांगल के पास Sutlej पर), Pong Dam (कांगड़ा के पास Beas पर), और Ranjit Sagar Dam (Ravi पर) – ये सभी इसी board के अंतर्गत हैं।
2025-26: ताजा विवाद और नई मांगें
मई 2025 में हरियाणा सरकार ने पंजाब से 8500 cusecs पानी की मांग की।
Cusecs क्या होता है? यह water flow को measure करने की एक unit है। नदियां और canals लगातार बहते रहते हैं, इसलिए उनकी total quantity के बजाय rate of flow measure किया जाता है।
MAF vs Cusecs का अंतर: MAF (Million Acre Feet) जब actual पानी की division की बात होती है – यह annual package की तरह है। Cusecs यह है कि उस package में से आपको monthly basis पर क्या मिल रहा है।
पंजाब ने जवाब दिया कि हरियाणा अपना allocated share already use कर चुका है। BBMB states को दो periods में water allocate करती है – Depletion Period और Filling Period।
15 मई 2025 को BBMB ने decide किया:
• पंजाब: 17,000 cusecs
• हरियाणा: 10,300 cusecs
• राजस्थान: 12,400 cusecs
यह allocation 20 मई 2026 तक effective रहेगा।
इसी महीने Supreme Court ने direct किया कि पंजाब और हरियाणा दोनों cooperate करें इस मामले को सुलझाने के लिए। Jal Shakti Minister CR Patil को chief arbiter बनाया गया।
CR Patil की leadership में bilateral talks के 5 rounds हुए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 2026 में फिर से दोनों states के leaders मिले, लेकिन फिर भी कोई solution नहीं।
Punjab का पक्ष: हमारे पास देने को पानी ही नहीं
पंजाब का तर्क है कि वे Riparian Principle मानते हैं, जिसके मुताबिक जिस state में river है, उसी का उस पर पहला हक है।
पंजाब यह भी कहता है कि original allocation surplus water के assumption पर based था, जो अब weakened हो गया है। Ravi-Beas की levels lower हो गई हैं। Agricultural needs बढ़ गई हैं। अगर हम पानी share करें तो यह economic suicide होगा।
Central Ground Water Board की assessment के हिसाब से पंजाब में India में सबसे ज्यादा groundwater extraction rate है – 156.36%। यह national average 60.63% से बहुत ज्यादा है।
पंजाब की नदियां कैसे बहती हैं? Sutlej तिब्बत के मानसरोवर के पास Rakshastal Lake से निकलती है। हिमाचल के Shipkila से भारत में enter करती है और पंजाब में Ropar district से। फिर यह Ludhiana, Jalandhar, Kapurthala, Ferozepur, Fazilka होते हुए Tarn Taran में Beas से मिलने के बाद पाकिस्तान में Chenab से मिल जाती है।
Beas हिमाचल में Rohtang Pass के पास Beas Kund से originate होती है। पंजाब में Hoshiarpur के Mukerian से enter होती है। Hoshiarpur, Gurdaspur, Kapurthala, Tarn Taran, Amritsar में बहती है।
Ravi भी हिमाचल में Rohtang Pass के पास Bara Bangal से originate होती है। पंजाब में Pathankot से enter होती है और Pathankot व Gurdaspur में बहती है।
Haryana का पक्ष: हमारा कानूनी हक
हरियाणा का कहना है कि SYL Canal उनकी agricultural needs के लिए crucial है। वे कहते हैं कि हम यह पानी एक legally binding agreement के तहत मांग रहे हैं।
Supreme Court ने भी हरियाणा के पक्ष में कई बार फैसला दिया है। 2016 में Punjab Termination of Agreements Act को unconstitutional करार दिया गया था।
संभावित समाधान: क्या हो सकता है रास्ता?
1. Chenab का पानी: Chenab नदी का पानी utilize किया जा सकता है। इसे Ranjit Sagar, Pong और Bhakra जैसे dams की ओर divert किया जा सकता है। कहीं न कहीं दोनों states इस पर agreement में हैं।
PM Modi ने Parliament में कहा था कि चूंकि अब India ने Indus Water Treaty suspend कर दी है, इसलिए Chenab का पानी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए use किया जा सकता है।
Chief Minister Bhagwant Mann ने कहा कि Chenab के पानी से पंजाब में 24 MAF पानी आ सकता है।
(नोट: Indus Water Treaty suspend करने का मतलब यह नहीं कि पानी पाकिस्तान नहीं जा रहा। Rivers का natural flow रोकना आसान नहीं। इसके लिए बहुत infrastructure चाहिए जो अभी बना नहीं है।)
2. Sharda Yamuna Link और Yamuna Sukri Link: 2022 में इन दोनों की feasibility reports बनाई गईं। इसके तहत 8,657 million cubic meters पानी Sharda Basin से उत्तराखंड के Purnagiri में divert करने की योजना है। CM Bhagwant Mann ने भी bilateral talks में इस solution को रखा था।
3. Crop Diversification: दोनों states को crop diversification follow करने को कहा जा सकता है ताकि पानी की demand कम हो।
4. Infrastructure Strengthening: Drains और rivers को regularly clean करना, infrastructure को मजबूत करना।
राजनीतिक आयाम: चुनाव और वादे
जैसे-जैसे पंजाब 2027 elections के करीब आ रहा है, यह मुद्दा parties के manifestos में आएगा या नहीं, यह देखना होगा। क्या elections से पहले Aam Aadmi Party सरकार कोई solution लाएगी, यह भी देखने वाली बात है।
अगर 1982 से गिनना शुरू करें तो आज इस मामले को 44 साल हो चुके हैं। दोनों states को अभी भी एक solution की जरूरत है।
निष्कर्ष: कब मिलेगा हल?
SYL Canal का मुद्दा सिर्फ पानी का नहीं है। यह भावनाओं, राजनीति, इतिहास और survival का मुद्दा है। पंजाब को लगता है कि उनका पानी छीना जा रहा है। हरियाणा को लगता है कि उन्हें उनका कानूनी हक नहीं मिल रहा।
जब तक दोनों पक्ष बैठकर एक sustainable और fair solution नहीं निकालेंगे, यह विवाद चलता रहेगा। Chenab के पानी का उपयोग, alternative link canals, crop diversification – ये सभी विकल्प हैं।
लेकिन सबसे जरूरी है dialogue और diplomacy। Fighting नहीं, बल्कि बातचीत से ही रास्ता निकलेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• SYL Canal 1982 में शुरू हुआ 214 किमी का canal, जिसमें 122 किमी पंजाब और 92 किमी हरियाणा में होना था
• 1966 में Punjab Reorganisation Act से पंजाब-हरियाणा बने, पानी के बंटवारे का सवाल उठा
• 1981 में Indira Gandhi ने tripartite agreement किया, हरियाणा को 3.5 MAF allocation
• 1985 में Rajiv-Longowal Punjab Accord, लेकिन Longowal की हत्या से समझौता कमजोर पड़ा
• 1990 में SYL engineers की हत्या, Balwinder Jattana द्वारा violence
• 2004 में पंजाब ने water agreements terminate करने का act pass किया, 2016 में SC ने unconstitutional करार दिया
• 2025-26 में bilateral talks, लेकिन कोई समाधान नहीं
• Chenab का पानी, Sharda-Yamuna Link जैसे alternative solutions पर विचार













