Punjab AI Hackathon के जरिए पंजाब सरकार ने स्कूली शिक्षा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बुधवार 25 मार्च को पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा आयोजित इस AI Hackathon का ग्रैंड फिनाले एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में हुआ, जिसमें पंजाब भर के 22 सरकारी स्कूलों के 1,000 से अधिक विद्यार्थियों और 22 शिक्षकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अत्याधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण हासिल किया। स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस पहल को भविष्य के उद्यमी तैयार करने का महत्वपूर्ण अभियान करार दिया।
पंजाब का पहला पायलट प्रोजेक्ट: AI सीख रहे सरकारी स्कूलों के बच्चे
Punjab AI Hackathon अपनी तरह का पहला पायलट प्रोजेक्ट रहा, जिसका मकसद सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कौशल को बढ़ावा देना था। यह प्रोजेक्ट फर्स्ट एकेडमी ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (FAAI) और स्किलियरियम के सहयोग से शुरू किया गया था।
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को कोई एक-दो दिन की वर्कशॉप नहीं बल्कि पूरे 12 सप्ताह की लाइव, इंटरैक्टिव ऑनलाइन कक्षाएं दी गईं। ये कक्षाएं AI विशेषज्ञों द्वारा संचालित की गईं, जिसमें बच्चों को AI आधारित एप्लिकेशनों के प्रभावी उपयोग के लिए तकनीकी कौशल प्रदान किया गया। यानी सरकारी स्कूलों के बच्चों को वही ट्रेनिंग मिली जो आमतौर पर महंगे प्राइवेट संस्थानों में दी जाती है।
मंत्री बैंस बोले: AI अब भविष्य नहीं, वर्तमान की भाषा है
Punjab AI Hackathon और PSEB की इस पहल को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने का संकल्प है। उनका साफ कहना था कि AI अब कोई भविष्य का विषय नहीं रहा, बल्कि यह वर्तमान की भाषा है।
मंत्री बैंस ने जोर देकर कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट और हैकाथॉन के माध्यम से पंजाब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी तकनीकी क्रांति में किसी भी रूप में पीछे न रहें। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिलते हैं, तो वे उच्च स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि अक्सर यह माना जाता है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे तकनीकी क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले पिछड़ जाते हैं। लेकिन Punjab AI Hackathon ने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया।
अगले सत्र में और स्कूलों तक पहुंचेगी AI शिक्षा
Punjab AI Hackathon की सफलता को देखते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि शिक्षा विभाग आगामी शैक्षणिक सत्र में AI कौशल विकास कार्यक्रम के तहत राज्य के अन्य स्कूलों को भी शामिल करने की योजना बना रहा है। यानी जो पायलट प्रोजेक्ट अभी 22 स्कूलों तक सीमित था, वह जल्द ही पंजाब के कई और सरकारी स्कूलों तक पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की तकनीकी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। इसका सीधा असर उन लाखों बच्चों पर पड़ेगा जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और जिनके परिवारों के पास महंगी AI ट्रेनिंग का खर्च उठाने की हैसियत नहीं है। सरकार की यह पहल उन बच्चों के लिए एक बड़ा मौका बन सकती है।
20 स्कूलों के 60 छात्रों ने दिखाया दमदार प्रदर्शन
Punjab AI Hackathon के ग्रैंड फिनाले के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए PSEB के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि इस हैकाथॉन में 20 स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कुल 60 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिसमें प्रत्येक स्कूल से तीन छात्रों की टीम थी।
हर टीम को अपने नवाचारी प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने के लिए एक घंटे का समय दिया गया और इन प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन AI विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा किया गया। प्रतिभागी टीमों ने तकनीकी नवाचार, वीडियो निर्माण, व्यवसायिक योजना और वेब डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में अपनी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों ने इन सभी क्षेत्रों के लिए AI टूल्स का प्रभावी उपयोग करके दिखाया कि सरकारी स्कूलों के छात्र किसी से कम नहीं हैं।
खटकड़ कलां के स्कूल ने जीता पहला पुरस्कार
Punjab AI Hackathon में शीर्ष तीन टीमों को प्रमाण पत्रों के साथ नकद पुरस्कार दिए गए। प्रतियोगिता के नतीजे इस प्रकार रहे:
प्रथम पुरस्कार (₹11,000): पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खटकड़ कलां (शहीद भगत सिंह नगर) ने पहला स्थान हासिल किया। यह स्कूल शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जन्मभूमि खटकड़ कलां में स्थित है, जिसने इस जीत को और भी खास बना दिया।
द्वितीय पुरस्कार (₹5,100): रविंदर खुल्लर मेमोरियल जी.एम. मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मॉडल टाउन, जालंधर को दूसरा स्थान मिला।
तृतीय पुरस्कार (₹3,100): शहीद ऊधम सिंह वाला सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लड़के), सुनाम ऊधम सिंह वाला, संगरूर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
दो स्कूलों को मिला सांत्वना पुरस्कार
Punjab AI Hackathon में मुख्य पुरस्कारों के अलावा दो स्कूलों को सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए गए। जी.टी.बी. खालसा सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल, दसूहा (होशियारपुर) को ₹3,100 का सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
वहीं लड़कियों की श्रेणी में सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मंडी गोबिंदगढ़ (फतेहगढ़ साहिब) को भी ₹3,100 का सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। लड़कियों के स्कूल को यह पुरस्कार मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि तकनीकी क्षेत्र में लड़कियां भी बराबरी से आगे आ रही हैं।
सरकारी स्कूलों में AI शिक्षा: पंजाब की दूरदर्शी पहल
Punjab AI Hackathon जैसी पहल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह उन बच्चों तक अत्याधुनिक तकनीक पहुंचा रही है जिनके पास संसाधनों की कमी है। जब दुनियाभर में AI रोजगार की तस्वीर बदल रहा है, तब सरकारी स्कूलों के बच्चों को इससे दूर रखना उन्हें भविष्य के जॉब मार्केट से बाहर करने जैसा होता।
पंजाब सरकार ने यह समझ लिया है कि अगर आज बच्चों को AI की ट्रेनिंग नहीं दी गई, तो कल वे तकनीकी दुनिया में पिछड़ जाएंगे। 12 हफ्ते की गहन ट्रेनिंग और फिर हैकाथॉन के जरिए प्रैक्टिकल अनुभव देना, यह मॉडल अगर पूरे राज्य में लागू हो गया तो पंजाब के सरकारी स्कूलों से निकलने वाले बच्चे भविष्य में तकनीकी उद्यमी, AI डेवलपर और इनोवेटर बन सकते हैं। यही वह बदलाव है जो शिक्षा को वाकई में भविष्य उन्मुख बनाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Punjab AI Hackathon में 22 सरकारी स्कूलों के 1,000 से अधिक विद्यार्थियों और 22 शिक्षकों को AI विशेषज्ञों द्वारा 12 सप्ताह की लाइव ट्रेनिंग दी गई।
- मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि AI वर्तमान की भाषा है और अगले शैक्षणिक सत्र में यह कार्यक्रम और स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा।
- ग्रैंड फिनाले में 20 स्कूलों के 60 छात्रों ने हिस्सा लिया, खटकड़ कलां (SBS नगर) के स्कूल ने ₹11,000 का प्रथम पुरस्कार जीता।
- FAAI और स्किलियरियम के सहयोग से चलाए गए इस पायलट प्रोजेक्ट में तकनीकी नवाचार, वीडियो निर्माण, बिजनेस प्लानिंग और वेब डेवलपमेंट पर फोकस रहा।








