Shaheed Bhagat Singh Martyrdom Day के मौके पर पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने 25 मार्च को चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में एक भव्य और भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पंजाब के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले, ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री सरदार तरुणप्रीत सिंह सोंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए युवा पीढ़ी से उनके बलिदान और राष्ट्र निर्माण की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने दिया युवाओं को संदेश
Shaheed Bhagat Singh Martyrdom Day के इस विशेष अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने कहा कि शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के आदर्श आज भी समाज को न्याय, समानता और निडर अभिव्यक्ति की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई पीढ़ी को बलिदान की भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण को अपने जीवन में उतारना होगा।
मंत्री सोंद ने सांस्कृतिक मंचों की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि ये मंच शहीदों की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और सामूहिक पहचान को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का संदेश युवा मस्तिष्कों को अन्याय पर सवाल उठाने, ज्ञान की खोज करने और राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। यही कारण है कि भगत सिंह पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रेरणा का एक कालजयी स्रोत बने हुए हैं।
खाद्य आयोग अध्यक्ष ने बताई पोषण सुरक्षा की पहल
इस अवसर पर पंजाब राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री बलमुकंद शर्मा ने आयोग की पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्यभर में खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पंजाब के 5723 स्कूलों में पोषण उद्यान (Nutrition Gardens) स्थापित किए गए हैं। इन उद्यानों के जरिए बच्चों को संतुलित आहार और टिकाऊ प्रथाओं के महत्व को समझने का अवसर मिल रहा है।
यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बल्कि उनके भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक कदम है। जब स्कूल स्तर पर ही बच्चे पोषण का महत्व समझेंगे, तो आने वाले समय में कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।
भगत सिंह की विरासत आज भी क्यों है प्रासंगिक
Shaheed Bhagat Singh Martyrdom Day कार्यक्रम में वक्ताओं ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, बौद्धिक शक्ति और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उनके लेखन और कार्यों ने आज भी युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने की जिम्मेदारी का भाव जगाया है।
वक्ताओं ने आगे कहा कि भगत सिंह का एक समतापूर्ण और प्रगतिशील समाज का सपना आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। उनका बलिदान केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर उस व्यक्ति के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहता है।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद
इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में आयोग के सदस्य जसवीर सिंह सेखों, विजय दत्त और चेतन प्रकाश ढिल्लों उपस्थित रहे। इसके अलावा पूर्व सदस्य प्रीति चावला और इंदिरा गुप्ता तथा सदस्य सचिव कनु थिंड भी इस अवसर पर मौजूद रहीं। सभी गणमान्य लोगों ने शहीद-ए-आज़म को नमन करते हुए उनकी विचारधारा को जीवित रखने का संकल्प लिया।
भगत सिंह का शहादत दिवस: एक राष्ट्र का कर्तव्य
हर साल 23 मार्च को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंजाब सरकार और उसके विभिन्न संस्थान इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां उन वीरों के बलिदान को याद रखें जिन्होंने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। पंजाब राज्य खाद्य आयोग द्वारा 25 मार्च को आयोजित यह कार्यक्रम इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसमें शहीदों की विरासत को सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर जीवित रखने का संदेश दिया गया।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने 25 मार्च को चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में Shaheed Bhagat Singh Martyrdom Day मनाया।
- मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने युवाओं से भगत सिंह के बलिदान और राष्ट्र निर्माण की विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की।
- खाद्य आयोग अध्यक्ष बलमुकंद शर्मा ने बताया कि पंजाब के 5723 स्कूलों में पोषण उद्यान स्थापित किए गए हैं।
- वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह का समतापूर्ण समाज का सपना आज भी उतना ही प्रासंगिक है।








