World News 25 March 2026 में दुनिया की सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच चार सप्ताह से चल रही जंग में अमेरिका को करारी मात मिली है और अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी तरह अपनी इज्जत बचाने में जुटे हैं। ट्रंप ने पहले खुद ही ईरान को सीजफायर डील भेजी और फिर इसे अपनी जीत के तौर पर पेश कर दिया। लेकिन IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने साफ कहा है कि अमेरिका अपनी हार को डील बता रहा है। इधर ईरान के हमले रुके नहीं हैं: पिछले 24 घंटों में इजराइल पर 220 मिसाइलें दागी गई हैं और तेल अवीव सहित कई शहरों में भारी तबाही मची है। इसी बीच ट्रंप अपने होमटाउन मारेलागो में भी चुनाव हार गए हैं और अब क्यूबा पर हमले की तैयारी के संकेत दे रहे हैं।
ईरान बोला: हम तैयार बैठे हैं, अमेरिका आए और हम शिकार करें
World News 25 March 2026 की सबसे बड़ी कहानी ईरान-अमेरिका युद्ध में सीजफायर की संभावनाओं को लेकर है। ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान के कहने पर बातचीत शुरू हुई है और ईरान के नेताओं से उनकी बातचीत हो रही है। लेकिन जब पूछा जाता है कि किसके साथ बातचीत हो रही है, तो ट्रंप कोई जवाब नहीं दे पाते।
ईरान ने ट्रंप के हर दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का साफ कहना है कि वे तो जंग से ही फैसले के पक्ष में थे, लेकिन अमेरिका सरेंडर कर रहा है इसलिए बातचीत के लिए तैयार हैं। ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर सीजफायर होगा तो वह उसकी शर्तों पर होगा, अमेरिका की शर्तों पर नहीं।
IRGC ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के हमले से अमेरिका को करारी मात मिली है। अमेरिका की तरफ से अब समझौते की कोशिश हो रही है और वह इसे अपनी जीत बता रहा है। IRGC ने यहां तक कहा कि अब अमेरिका को इस क्षेत्र में अपने निवेश का कोई फायदा नहीं मिलेगा और न ही पहले जैसे तेल और ऊर्जा के दाम देखने को मिलेंगे।
अमेरिका की 15 शर्तें बनाम ईरान की कड़ी मांगें: जमीन-आसमान का अंतर
World News 25 March 2026 में सामने आया है कि अमेरिका ने ईरान को एक समझौते का प्रस्ताव भेजा है जिसमें 15 शर्तें रखी गई हैं। हालांकि पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी मीडिया के मुताबिक अमेरिका की प्रमुख शर्तों में शामिल है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपना यूरेनियम किसी परमाणु शक्ति संपन्न देश को सौंपना होगा। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में न्यूक्लियर कार्यक्रम जारी रख सकता है। ईरान को लंबी दूरी की मिसाइलें बनाने पर रोक लगानी होगी और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करना होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान किसी तरह की दखलअंदाजी नहीं करेगा और जहाजों की आवाजाही पर रुकावट नहीं डालेगा। बदले में ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे।
खास बात यह है कि अमेरिका का यह प्रस्ताव ईरान को सीधे नहीं बल्कि किसी तीसरे देश के जरिए भेजा गया है।
लेकिन ईरान ने इन शर्तों को सिरे से ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि परमाणु बम न बनाने की बात तो ईरान पहले ही कर चुका है। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई इसे लेकर फतवा भी जारी कर चुके हैं और ईरान अपनी इस नीति पर कायम है। यानी ट्रंप शायद ईरान की किसी पुरानी नीति को बाद में अपनी जीत के रूप में पेश कर सकते हैं।
ईरान की शर्तें: सैन्य अड्डे बंद करो, माफी मांगो, हर्जाना दो
द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने भी अपनी कड़ी शर्तें रख दी हैं। ईरान की पहली मांग है कि उस पर होने वाले सभी हमले तुरंत रोके जाएं। ईरान को यह भी डर है कि बातचीत की आड़ में अमेरिका और इजराइल कोई बड़ी साजिश कर सकते हैं, इसलिए वार्ता की मेज पर आने से पहले ईरान अपने नेताओं की सुरक्षा की ठोस गारंटी चाहता है।
IRGC ने बातचीत को लेकर जो शर्तें रखी हैं वे अमेरिका के लिए मानना लगभग असंभव हैं। ईरान चाहता है कि खाड़ी देशों में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद किया जाए। ईरान पर हमले के लिए अमेरिका औपचारिक रूप से माफी मांगे और जो नुकसान ईरान को हुआ है उसका हर्जाना भी दे। ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं और ईरान को बिना किसी प्रतिबंध के अपना मिसाइल कार्यक्रम जारी रखने की इजाजत दी जाए।
इनमें से एक भी शर्त मानना ट्रंप के लिए आसान नहीं है। सैन्य अड्डे हटाना और हर्जाना देना तो अमेरिका के लिए अपनी हार का सार्वजनिक ऐलान करने जैसा होगा।
ईरान ने ट्रंप और रूबियो को बातचीत से किया खारिज, वेंस से बात करेगा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची ने साफ कह दिया है कि ईरान ने कभी युद्ध विराम की भीख नहीं मांगी है। ईरान अपनी रक्षा के लिए तब तक लड़ने को तैयार है जब तक जरूरी हो।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह बातचीत न तो ट्रंप से करेगा, न स्टीव विटकॉफ से और न ही विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ। ईरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस को बातचीत की टेबल पर देखना चाहता है। यह अपने आप में ट्रंप के लिए एक बड़ा अपमान है।
फिलहाल संभावनाएं बन रही हैं कि अगले 48 घंटों में बातचीत शुरू हो सकती है। ट्रंप की तरफ से एक महीने के युद्ध विराम का प्रस्ताव भी दिया गया है। लेकिन दोनों पक्षों की मांगों में जमीन-आसमान का अंतर है, जिससे किसी त्वरित शांति समझौते की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।
इधर बातचीत की बात, उधर 220 मिसाइलों की बारिश जारी
World News 25 March 2026 की हकीकत यह है कि सीजफायर की बातचीत भले ही शुरू होने वाली हो, लेकिन जमीन पर जंग रुकी नहीं है। ईरान हर घंटे 10 मिसाइलें इजराइल पर दाग रहा है। सिर्फ पिछले 24 घंटों में 220 मिसाइलें दागी गई हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से अधिकांश मिसाइलों को इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम रोकने में नाकाम साबित हुआ है। नतीजा: तेल अवीव सहित इजराइल के कई शहरों में जबरदस्त धमाके हुए हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। ईरान ने कतर और सऊदी अरब पर भी ड्रोन हमले किए हैं।
इसी बीच सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं। MBS ने कहा है कि जंग रोकना बड़ी गलती होगी और ईरान पर हमला जारी रखना चाहिए।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से बातचीत की और अपने देश पर हमलों की जानकारी दी। ईरान ने कहा कि वह नहीं झुकेगा।
ईरान ने पाकिस्तानी जहाज को होर्मुज से भेजा वापस
ईरान ने एक पाकिस्तानी जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत नहीं दी और उसे वापस भेज दिया। ईरान का कहना है कि इस जहाज के पास होर्मुज से गुजरने की परमिशन नहीं थी। पाकिस्तान इस जंग में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान ने साफ संकेत दे दिए हैं कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण सख्त रहेगा।
ट्रंप अपने होमटाउन मारेलागो में भी हारे, डेमोक्रेट्स ने छीनी सीट
World News 25 March 2026 में अमेरिका की घरेलू राजनीति से भी बड़ी खबर आई है। ईरान से जंग का असर अब अमेरिकी सियासत पर साफ दिखने लगा है। राष्ट्रपति ट्रंप अपने होमटाउन मारेलागो (Mar-a-Lago) में बुरी तरह चुनाव हार गए हैं। ट्रंप की सियासत में आने के बाद पहली बार मारेलागो में डेमोक्रेट्स को जीत मिली है।
मारेलागो वह जगह है जहां ट्रंप महीने में कम से कम एक बार पूरी टीम के साथ मीटिंग के लिए जाते हैं और वहां उनका निजी आवास भी है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद मारेलागो में ट्रंप के आवास की तरफ जाने वाली हर सड़क बंद कर दी गई है, जो बताता है कि युद्ध की आंच वहां तक पहुंच चुकी है।
यह चुनाव फ्लोरिडा की दो विधानसभा सीटों के लिए हुए थे। दोनों सीटें रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ मानी जाती थीं, लेकिन दोनों पर डेमोक्रेट्स ने कब्जा कर लिया। मारेलागो में डेमोक्रेट एमिली ग्रेगरी ने ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार को 2% से ज्यादा वोटों के अंतर से हरा दिया।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस चुनाव में खुद ट्रंप ने भी वोट डाला था। ट्रंप अपनी पत्नी मेलेनिया और बेटे बैरन के साथ मतपत्र के जरिए मतदान करने पहुंचे थे और जीत का दावा किया था। लेकिन नतीजे आने के बाद ट्रंप ने चुप्पी साध ली है।
14 राज्यों की 28 सीटें छिनीं, मिडटर्म इलेक्शन बना सबसे बड़ी चिंता
मारेलागो कोई इकलौती सीट नहीं है जो डेमोक्रेट्स ने ट्रंप की पार्टी से छीनी है। 2024 में ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से अब तक 14 राज्यों की 28 सीटें डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी से छीन ली हैं। ये सभी सीटें एक समय रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ मानी जाती थीं।
ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चिंता इस साल नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन को लेकर है। अगर इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हार मिलती है तो ट्रंप गंभीर मुसीबत में फंस सकते हैं, क्योंकि उन्हें हर फैसले के लिए अमेरिकी कांग्रेस और सीनेट की मंजूरी लेनी होगी।
ईरान से हार की खीझ में क्यूबा पर हमले की तैयारी
World News 25 March 2026 में एक और खतरनाक खबर सामने आई है। ईरान से मिली हार के बाद अमेरिका ने अपना नया निशाना क्यूबा को बनाया है। पहले वेनेजुला, फिर ईरान और अब क्यूबा: ट्रंप लगातार नए-नए टारगेट तलाश रहे हैं।
ट्रंप की तरफ से क्यूबा के नेतृत्व में बदलाव की बात कही गई है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कानेल की सत्ता खतरे में है। वैसे तो कानेल का कार्यकाल अभी दो साल बाकी है, लेकिन ट्रंप के बयान के बाद दावे किए जा रहे हैं कि शायद वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे।
ट्रंप को लगता है कि ईरान के मुकाबले क्यूबा सैन्य रूप से बहुत कमजोर है और भौगोलिक स्थिति भी ऐसी नहीं कि वह अमेरिका को नुकसान पहुंचा सके। ईरान में मिली हार की खीझ मिटाने के लिए ट्रंप क्यूबा पर आसान जीत चाहते हैं।
क्यूबा में कास्त्रो परिवार की पकड़, अमेरिका के लिए बड़ी मुश्किल
लेकिन क्यूबा इतना आसान भी नहीं है। 1959 की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो ने सत्ता संभाली और क्यूबा को समाजवादी देश बना दिया था। तभी से क्यूबा और अमेरिका में टकराव जारी है। 1962 में सोवियत संघ ने क्यूबा में मिसाइलें तैनात कर दी थीं, जिससे अमेरिका खतरे में दिखने लगा था।
अगर कानेल को सत्ता छोड़नी भी पड़ी तो सत्ता की दौड़ में दो नाम सामने आ रहे हैं: ऑस्कर पेरिस ओल्वा फ्रागा जो राउल कास्त्रो के रिश्तेदार हैं, और खुद 94 साल के राउल कास्त्रो। भले ही कानेल इस वक्त राष्ट्रपति हैं, लेकिन असली ताकत सेना के पास है और सेना में राउल कास्त्रो का प्रभाव कायम है।
यानी अगर अमेरिका सत्ता परिवर्तन की कोशिश भी करता है तो कास्त्रो परिवार ही सत्ता में आएगा, जिसे अमेरिका कभी मंजूर नहीं करेगा। ऐसे में क्यूबा पर हमला करना ट्रंप के लिए एक और बड़ी मुसीबत बन सकता है।
बांग्लादेश के नए PM तारिक रहमान ने पाकिस्तान को जमकर सुनाया
World News 25 March 2026 में दक्षिण एशिया से भी बड़ी खबर आई है। बांग्लादेश आज यानी 25 मार्च को नरसंहार दिवस मना रहा है। इसी दिन 1971 में पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट के नाम पर निहत्थे बांग्लादेशी नागरिकों का कत्लेआम किया था।
बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस मौके पर पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने उस काली रात को याद करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी और इसे बांग्लादेश के इतिहास का शर्मनाक और क्रूर दिन बताया।
तारिक रहमान ने कहा कि इसी दिन पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट के नाम पर निहत्थे लोगों पर अत्याचार किया। ढाका यूनिवर्सिटी, पिलखाना और राजारबाग पुलिस लाइन सहित अलग-अलग जगहों पर शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और निर्दोष नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं जिसमें अनगिनत लोगों की जान चली गई।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 25 मार्च की रात ही चटगांव में आठवीं ईस्ट बंगाल रेजीमेंट ने विद्रोह का ऐलान करते हुए इस नरसंहार के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध शुरू किया, जिसने आगे चलकर 9 महीने लंबे मुक्ति संग्राम का रूप ले लिया।
बांग्लादेश में सत्ता बदली तो पाकिस्तान की मुसीबत बढ़ी
तारिक रहमान के इस बयान को पाकिस्तान के लिए बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है। इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार पाकिस्तान परस्त नजर आ रही थी। लेकिन बांग्लादेश में सत्ता बदलते ही वहां की फिजा पूरी तरह बदल गई है।
जानकारों का मानना है कि तारिक रहमान का यह बयान पाकिस्तान के लिए रेड फ्लैग है। पाकिस्तानी सेना के मंसूबों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश ने साफ संकेत दे दिया है कि 1971 का इतिहास न तो भुलाया जाएगा और न ही माफ किया जाएगा।
रूस ने यूक्रेन पर दागे 1000 से ज्यादा ड्रोन, 30 से अधिक घायल
World News 25 March 2026 में रूस ने यूक्रेन पर एक और बड़ा हमला किया है। रूस ने 1000 से ज्यादा ड्रोन दागे, जिससे 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही है और यह हमला इस बात का संकेत है कि यह संघर्ष अभी और लंबा चलने वाला है।
टोक्यो में चीनी दूतावास में घुसा जापानी सैनिक, चीन ने मांगा जवाब
टोक्यो में एक जापानी सैनिक को चीनी दूतावास में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। चीन ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया है और जापान से जवाब मांगा है। यह घटना दोनों एशियाई शक्तियों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ सकती है।
ब्रह्मांड में मिला पानी का महासागर: पृथ्वी के सारे समुद्र एक बूंद जैसे
World News 25 March 2026 की सबसे रोमांचक खबर विज्ञान की दुनिया से आई है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक ऐसा कॉस्मिक वॉटर क्लाउड खोजा है जो हमारी कल्पना से परे है। यह पानी का बादल पृथ्वी से 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर है। इतनी दूर कि आज का कोई भी स्पेसक्राफ्ट या इंसान वहां पहुंचने का सिर्फ सपना ही देख सकता है।
वैज्ञानिकों ने इसे APM 08279+5255 नाम दिया है। यह उस दौर का है जब ब्रह्मांड अपने शुरुआती काल में था और आकाशगंगाएं बन रही थीं। यह कोई शांत बादल नहीं है बल्कि यह एक क्वासर (Quasar) के चारों तरफ लिपटा हुआ है। क्वासर एक ऐसा तारा होता है जो शक्तिशाली रेडियो संकेत भेजता है।
इस क्वासर के केंद्र में एक विशालकाय ब्लैक होल है जो सूरज से 20 अरब गुना ज्यादा भारी है। इस ब्लैक होल के चारों ओर गर्म गैसों का बवंडर है और इसी गर्म माहौल में पानी की भाप भरी हुई है।
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि इस बादल में पृथ्वी के सभी महासागरों के कुल पानी से 140 लाख करोड़ गुना ज्यादा पानी मौजूद है। नासा (NASA) की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) के वैज्ञानिक मैट ब्रैडफोर्ड और उनकी टीम ने जब इसे देखा तो दंग रह गए।
इस खोज ने विज्ञान की पुरानी धारणाओं को हिला दिया है। अगर ब्रह्मांड के शुरुआती समय में ही इतना पानी मौजूद था तो इसका मतलब है कि जीवन की शुरुआत वैसी नहीं हुई जैसा हम सोचते थे। शायद जीवन के बीज हमारी कल्पना से बहुत पहले ही बो दिए गए थे। यह खोज इस संभावना को और मजबूत करती है कि हम इस ब्रह्मांड में शायद अकेले नहीं हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिका ने ईरान को 15 शर्तों वाला सीजफायर प्रस्ताव भेजा, ईरान ने ठुकराया। ईरान की शर्तें: सैन्य अड्डे बंद करो, माफी मांगो, हर्जाना दो, प्रतिबंध हटाओ। ईरान ने बातचीत के लिए ट्रंप की जगह JD वेंस को चुना।
- ईरान ने 24 घंटे में इजराइल पर 220 मिसाइलें दागीं, इजराइल का एयर डिफेंस नाकाम; तेल अवीव सहित कई शहरों में तबाही। कतर और सऊदी अरब पर भी ड्रोन हमले।
- ट्रंप अपने होमटाउन मारेलागो में चुनाव हारे, डेमोक्रेट एमिली ग्रेगरी ने रिपब्लिकन को हराया; 2024 के बाद से 14 राज्यों की 28 सीटें रिपब्लिकन से छिनीं। नवंबर के मिडटर्म इलेक्शन ट्रंप की सबसे बड़ी चिंता।
- बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने 1971 नरसंहार पर पाकिस्तान को जमकर सुनाया; वैज्ञानिकों ने 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर पृथ्वी के पानी से 140 लाख करोड़ गुना ज्यादा पानी का बादल खोजा।








