Punjab IAS Officers Training को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। पंजाब कैडर के कुल 22 IAS अधिकारियों को अनिवार्य Phase III Mid-Career Training Programme (MCTP) के लिए नामित किया गया है। यह ट्रेनिंग 11 मई से 5 जून 2026 तक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में आयोजित होगी। सबसे अहम बात यह है कि इन 22 अधिकारियों में से 15 फिलहाल राज्य के विभिन्न जिलों में Deputy Commissioners (DCs) के पद पर तैनात हैं।
चुनावी साल में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जिला प्रमुखों का गैरहाजिर रहना पंजाब प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
चुनावी साल में क्यों गहराई संकट
यह वह दौर है जब पंजाब सरकार से जनहित योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने की उम्मीद की जा रही है। चुनावी साल में सरकार आमतौर पर विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर देती है, और इसके लिए जिला प्रशासन की सबसे अहम भूमिका होती है। ऐसे में एक साथ 15 Deputy Commissioners का अपने जिलों से बाहर रहना प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर डाल सकता है।
इससे पहले ही करीब दो दर्जन अधिकारियों को पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले विधानसभा चुनावों में चुनाव पर्यवेक्षक (Election Observers) के रूप में प्रतिनियुक्त किया जा चुका है। यानी मार्च-अप्रैल में चुनाव ड्यूटी और उसके तुरंत बाद मई-जून में ट्रेनिंग: जिलों को लगातार तीन से चार महीने तक अपने स्थायी DC के बिना काम चलाना पड़ सकता है।
MCTP ट्रेनिंग क्या है और यह क्यों है अनिवार्य
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अनुसार, यह Punjab IAS Officers Training पूरी तरह अनिवार्य है और इसे टाला नहीं जा सकता। Mid-Career Training Programme दरअसल Junior Administrative Grade (Level 12) में empanelment के लिए एक अनिवार्य शर्त है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन अधिकारियों को अपने करियर में अगले पायदान पर चढ़ना है, उन्हें इस ट्रेनिंग में हिस्सा लेना ही होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, 2018 बैच के अधिकारियों के लिए यह पहला मौका है जब उन्हें MCTP ट्रेनिंग में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। 2017 बैच के अधिकारियों के लिए यह दूसरा अवसर है, जबकि 2016 बैच के लिए यह तीसरा और आखिरी मौका है। अगर इस बार ये अधिकारी ट्रेनिंग से चूक गए, तो उनके करियर में आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो सकता है। 2010 से 2015 बैच के अधिकारियों को केस-टू-केस आधार पर नामित किया गया है।
बैच-वार कितने अधिकारी हैं शामिल
आधिकारिक सूची के मुताबिक इन 22 अधिकारियों का बैच-वार ब्यौरा इस तरह है: एक अधिकारी 2013 बैच से, दो अधिकारी 2014 बैच से, एक 2015 बैच से, तीन 2016 बैच से, आठ 2017 बैच से और सात 2018 बैच से हैं। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि 2017 और 2018 बैच के अधिकारियों की संख्या सबसे ज्यादा है। ये वे अधिकारी हैं जो अभी अपने करियर के शुरुआती दौर में हैं और पंजाब के जिला प्रशासन की कमान संभाल रहे हैं।
ट्रेनिंग पर जाने वाले 22 IAS अधिकारियों की पूरी सूची
Punjab IAS Officers Training के लिए नामित 22 अधिकारियों की पूरी सूची इस प्रकार है, जिनमें से 15 वर्तमान में Deputy Commissioners के पद पर तैनात हैं:
- सैयद सेहरिश असगर : 2013 बैच
- हिमांशु अग्रवाल : 2014 बैच
- कोमल मित्तल : 2014 बैच
- आशिका जैन : 2015 बैच
- अमरप्रीत कौर संधू : 2016 बैच
- आदित्य डचलवाल : 2016 बैच
- अमित कुमार पांचाल : 2016 बैच
- हिमांशु जैन : 2017 बैच
- राहुल : 2017 बैच
- गौतम जैन : 2017 बैच
- सागर सेतिया : 2017 बैच
- अनुपम कालेर : 2017 बैच
- राहुल चाबा : 2017 बैच
- दलविंदरजीत सिंह : 2017 बैच
- सोना थिंद : 2017 बैच
- विम्मी भुल्लर : 2018 बैच
- टिडके विराज श्यामकर्ण : 2018 बैच
- टी बेनिथ : 2018 बैच
- नवजोत कौर : 2018 बैच
- सुखजीत पाल सिंह : 2018 बैच
- अंकुरजीत सिंह : 2018 बैच
- वरजीत वालिया : 2018 बैच
आम जनता पर क्या पड़ेगा सीधा असर
Deputy Commissioner किसी भी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होता है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर कानून-व्यवस्था, राजस्व मामले, भूमि विवाद, आपदा प्रबंधन और जनसुनवाई जैसे तमाम अहम काम DC के नेतृत्व में ही चलते हैं। जब एक साथ 15 जिलों से DCs गैरहाजिर हो जाएंगे, तो आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में देरी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां DC की भूमिका और भी निर्णायक होती है, वहां लोगों को भूमि संबंधी मामलों, प्रमाण पत्रों और सरकारी योजनाओं के लाभ में रुकावट आ सकती है।
पंजाब सरकार के सामने दोहरी चुनौती
यह स्थिति पंजाब सरकार के लिए एक गंभीर प्रशासनिक परीक्षा बनकर उभरी है। एक तरफ चुनावी साल में जनता के बीच अपनी साख मजबूत करने के लिए सरकारी योजनाओं को तेजी से लागू करना जरूरी है, और दूसरी तरफ जिलों में लंबे समय तक प्रशासनिक खालीपन से निपटने की चुनौती खड़ी है। MCTP ट्रेनिंग केंद्र सरकार की अनिवार्य व्यवस्था है, इसलिए राज्य सरकार के पास इसे टालने या रोकने का कोई विकल्प भी नहीं है।
अब यह देखना अहम होगा कि पंजाब सरकार इन 15 जिलों में किस तरह की अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था करती है। क्या अतिरिक्त उपायुक्तों (ADCs) को कार्यवाहक DC बनाया जाएगा, या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा: यह फैसला राज्य सरकार की प्रशासनिक क्षमता की असली कसौटी होगा।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
पंजाब कैडर के IAS अधिकारियों को पहले से ही इस साल कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्च-अप्रैल में पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों के लिए करीब दो दर्जन अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया। अब चुनाव ड्यूटी खत्म होते ही मई में ये अधिकारी सीधे मसूरी में Punjab IAS Officers Training के लिए रवाना हो जाएंगे। इस पूरे दौर में जिलों को अस्थायी व्यवस्था के भरोसे रहना पड़ेगा, जो चुनावी साल में प्रशासनिक निरंतरता और शासन की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब कैडर के 22 IAS अधिकारी 11 मई से 5 जून 2026 तक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में अनिवार्य MCTP ट्रेनिंग पर जाएंगे।
- इनमें से 15 अधिकारी फिलहाल पंजाब के विभिन्न जिलों में Deputy Commissioners के पद पर तैनात हैं।
- यह ट्रेनिंग Junior Administrative Grade (Level 12) में empanelment के लिए अनिवार्य शर्त है, इसे टाला नहीं जा सकता।
- चुनावी साल में DCs की लगातार गैरहाजिरी (चुनाव ड्यूटी + ट्रेनिंग) से जिला प्रशासन और जनहित योजनाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।








