Punjab Stubble Burning के मामलों में 90 प्रतिशत से ज्यादा कमी की पुष्टि अब खुद केंद्र सरकार ने लोकसभा में कर दी है। पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने सोमवार 17 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में कहा कि केंद्र ने आखिरकार सच्चाई स्वीकार कर ली है, लेकिन सिर्फ तारीफ करना काफी नहीं है, अब केंद्र सरकार को ग्रामीण विकास फंड (RDF) के 8800 करोड़ रुपये के बकाये को तुरंत जारी कर पंजाब के किसानों को सम्मान देना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री के संसद में पेश आंकड़ों ने आलोचकों को किया चुप
केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में जो आंकड़े पेश किए, उन्होंने वर्ष 2022 से पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक की सामूहिक कमी की पुष्टि की। यह आंकड़े सैटेलाइट डेटा पर आधारित हैं और संसद में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किए गए हैं।
कृषि मंत्री खुड्डियां ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस डेटा ने उन सभी आलोचकों को पूरी तरह शांत कर दिया है जो सालों से पंजाब के किसानों को निशाना बनाते थे और उत्तर भारत के वायु प्रदूषण संकट, खासकर दिल्ली की बिगड़ती हवा के लिए अकेले पंजाब को जिम्मेदार ठहराते थे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पंजाब के खिलाफ बदनाम करने का अभियान चलाया और दावा किया कि पराली जलाना कभी खत्म नहीं होगा, उन्हें अब अपने शब्द वापस लेने चाहिए।
सालों से अन्नदाता को बदनाम किया गया, अब सैटेलाइट डेटा ने सच दिखा दिया
कृषि मंत्री ने भावुक होकर कहा कि सालों से पंजाब के किसानों, जो देश के सच्चे अन्नदाता हैं, को बदनाम किया जाता रहा। दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए अकेले पंजाब को कटघरे में खड़ा किया गया। लेकिन अब केंद्र सरकार के अपने सैटेलाइट डेटा ने सभी झूठे दावों को खारिज कर दिया है। 90 प्रतिशत से अधिक कमी की पुष्टि वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है, यह कोई राजनीतिक बयान नहीं बल्कि तथ्यों की बात है।
यह बात आम लोगों के लिए भी बेहद अहम है क्योंकि हर साल सर्दियों में उत्तर भारत, खासकर दिल्ली-एनसीआर में जहरीली धुंध छा जाती है और बिना सोचे-समझे सारा दोष पंजाब के किसानों पर मढ़ दिया जाता है। अब संसद में पेश हुए आधिकारिक आंकड़े साबित करते हैं कि पंजाब ने अपने स्तर पर जबरदस्त काम किया है।
कृषि मशीनीकरण पर 416 करोड़ खर्च, अगले साल 600 करोड़ का प्रावधान
Punjab Stubble Burning पर काबू पाने में कृषि मशीनीकरण की अहम भूमिका रही है। कृषि मंत्री खुड्डियां ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यभर के किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी की खरीद पर 416 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। इसका मतलब है कि किसानों ने पराली को जलाने की बजाय आधुनिक मशीनों से प्रबंधित करने का रास्ता अपनाया और सरकार ने इसमें उनकी आर्थिक मदद की।
आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस मद में 600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने भरोसा दिलाया है कि यह निवेश सुनिश्चित करेगा कि किसानों को दोबारा कभी पराली जलाने की जरूरत न पड़े। यह एक टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में बड़ा कदम है।
8800 करोड़ RDF रोकना अन्याय: खुड्डियां ने केंद्र को घेरा
कृषि मंत्री ने सबसे तीखा हमला ग्रामीण विकास फंड (RDF) के बकाये को लेकर किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कई खरीद सीजनों से 8800 करोड़ रुपये का RDF रोक रखा है, जो पंजाब के किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ घोर अन्याय है। RDF एक 3 प्रतिशत उपकर है जो कृषि उपज की खरीद पर लगाया जाता है और इसका इस्तेमाल ग्रामीण सड़कों, मंडियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव के लिए होता है।
खुड्डियां ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट तक गए हैं, हर दरवाजा खटखटाया है, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं किए गए हैं। यह विडंबना है कि पंजाब के किसान एक तरफ पराली जलाने पर काबू पाकर देश की सेवा कर रहे हैं, दूसरी तरफ केंद्र उनके जायज बकाये का भुगतान करने से इनकार कर रहा है।
किसानों की जीत: असंभव को संभव कर दिखाया
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ी जीत पंजाब के किसानों की है। जिस पराली जलाने को रोकना कभी असंभव माना जाता था, उसे किसानों ने अपनी मेहनत और आधुनिक मशीनरी अपनाने की इच्छाशक्ति से संभव कर दिखाया। सरकारी सब्सिडी और किसानों के सहयोग का यह गठजोड़ एक मिसाल है कि अगर नीतियां सही हों और उन्हें जमीन पर ईमानदारी से लागू किया जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकल सकता है।
हालांकि असली इम्तिहान अभी बाकी है। जब तक केंद्र सरकार RDF जैसे वित्तीय बकाये जारी नहीं करती, तब तक राज्य स्तर पर ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार प्रभावित होती रहेगी। 8800 करोड़ रुपये की यह रकम पंजाब की मंडियों, ग्रामीण सड़कों और कृषि बुनियादी ढांचे के लिए बेहद जरूरी है।
जानें पूरा मामला
RDF यानी ग्रामीण विकास फंड, पंजाब सरकार द्वारा कृषि उपज की खरीद पर लगाया जाने वाला 3 प्रतिशत उपकर है। इसका उपयोग ग्रामीण सड़कों, मंडियों और बुनियादी ढांचे के लिए होता है। केंद्र सरकार ने 2020 में इसे 3 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया और पंजाब ग्रामीण विकास अधिनियम में संशोधन की मांग की। पंजाब ने 2022 में संशोधन कर लिया, लेकिन इसके बावजूद फंड जारी नहीं किए गए। बकाया राशि बढ़ते-बढ़ते 8800 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पंजाब सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है। वहीं पराली जलाने पर पंजाब ने 2022 के बाद से 90 प्रतिशत से ज्यादा कमी हासिल की, जिसकी पुष्टि केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में की।
मुख्य बातें (Key Points)
- केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में पुष्टि की कि 2022 से पंजाब-हरियाणा में Punjab Stubble Burning में 90% से ज्यादा कमी आई है।
- कृषि मंत्री खुड्डियां ने 8800 करोड़ RDF तुरंत जारी करने की मांग की, कहा कि सिर्फ तारीफ काफी नहीं।
- 2025-26 में CRM मशीनरी पर 416 करोड़ की सब्सिडी दी गई, 2026-27 के लिए 600 करोड़ आवंटित।
- पंजाब सरकार RDF के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गई है, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं हुआ।








