Ashok Bhasin IRS Reveal: भारतीय राजस्व सेवा यानी IRS के पूर्व अधिकारी अशोक भसीन ने कस्टम्स और एक्साइज विभाग के बारे में ऐसे खुलासे किए हैं जो आम जनता को शायद ही पता हों। एक विस्तृत साक्षात्कार में भसीन ने बताया कि कस्टम्स विभाग सिर्फ ड्यूटी कलेक्शन नहीं करता, बल्कि यह देश की पहली रक्षा पंक्ति है उन खतरों के खिलाफ जिनके बारे में जनता को जानकारी ही नहीं है। वीआईपी प्रोटोकॉल, ग्रीन चैनल की असलियत, एक डीएमके सांसद के सामान से सोने की बिस्किटें मिलने की सनसनीखेज घटना और एयरपोर्ट पर बैग स्कैनिंग की खामियां, सब कुछ उन्होंने बिना लाग-लपेट के सामने रखा।
‘कस्टम्स: राजस्व विभाग नहीं, देश की पहली रक्षा पंक्ति’
Ashok Bhasin IRS Reveal में सबसे पहली और बड़ी बात यह थी कि एयरपोर्ट पर कस्टम्स का जो काम होता है वह मुख्यतः राजस्व संग्रह नहीं है। भसीन ने साफ कहा कि एयरपोर्ट पोस्टिंग में यात्रियों पर जो टैक्स लगाया जाता है वह सरकार के लिए कोई बड़ा राजस्व स्रोत नहीं है। असली उद्देश्य यह है कि लोग महंगी चीजें बाहर से लाने से हतोत्साहित हों।
असली राजस्व आयातित माल पर लगने वाली कस्टम्स ड्यूटी से आता है। एयरपोर्ट पर कस्टम्स की भूमिका उन खतरों के खिलाफ देश की पहली सुरक्षा दीवार बनने की है जिनके बारे में आम जनता को पता ही नहीं है। इसके लिए बेल्ट पर एक्सरे मशीनें, हॉल के अंदर स्क्रीनिंग उपकरण और यात्री प्रोफाइलिंग का उपयोग होता है।
‘सिर्फ 2-3% यात्रियों की होती है प्रोफाइलिंग’
Ashok Bhasin IRS Reveal में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कस्टम्स अधिकारी सभी यात्रियों को नहीं रोकते। मुश्किल से 2 से 3 प्रतिशत यात्रियों को प्रोफाइलिंग के आधार पर इंटरसेप्ट किया जाता है।
यह प्रोफाइलिंग अफसरों के अनुभव, इंटेलिजेंस इनपुट और व्यक्तिगत अंतर्ज्ञान के आधार पर होती है। जिस यात्री के बारे में यह संदेह हो कि वह कोई प्रतिबंधित वस्तु ला रहा है, उसे ही रोका जाता है। बाकी 97-98% यात्री बिना किसी रुकावट के निकल जाते हैं।
‘कस्टम्स ड्यूटी कैसे तय होती है: HSN कोड और ट्रेड ट्रीटीज’
Ashok Bhasin IRS Reveal में कस्टम्स ड्यूटी की गणना के बारे में भी जानकारी दी गई। भसीन ने बताया कि कस्टम्स ड्यूटी एक टैरिफ पर आधारित है जो हार्मोनाइज्ड सिस्टम नोमेनक्लेचर यानी HSN कोड के आधार पर तैयार किया गया है।
यह कोड पूरी दुनिया में एक समान होता है। आपूर्तिकर्ता भी वही कोड लिखता है और जब माल यहां आयात होता है तो उस टैरिफ में देखा जाता है कि उस विशेष वस्तु पर कितना शुल्क लगेगा। कुछ वस्तुओं को अधिसूचना के जरिए छूट या रियायती दर दी जाती है। विभिन्न देशों के साथ व्यापार संधियों के तहत भी दरें बदलती हैं, जैसे अमेरिका के साथ हाल ही में एक ट्रेड डील हुई जिसमें कृषि वस्तुओं पर टैरिफ को लेकर विवाद भी हुआ।
‘मंत्रालय से फोन, VIP का एयरो ब्रिज से एस्कॉर्ट’
Ashok Bhasin IRS Reveal में वीआईपी प्रोटोकॉल की असलियत बेहद दिलचस्प तरीके से सामने आई। भसीन ने बताया कि जब कोई बड़ा अफसर या नेता आता है तो मंत्रालय या उच्च स्तर से सीधे फोन आते थे। ये फोन शिफ्ट इंचार्ज को मिलते थे जो आगे पास ऑन होते थे।
एक रजिस्टर भी बनाए रखा जाता है जिसमें प्रोटोकॉल के सभी संदेश दर्ज होते हैं। वीआईपी यात्री को एयरो ब्रिज से लेकर, इमीग्रेशन जल्दी करवाकर, कस्टम्स जल्दी करवाकर और बैगेज भी जल्दी निकलवाकर बाहर तक एस्कॉर्ट किया जाता है ताकि उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह प्रतीक्षा न करनी पड़े।
‘DMK सांसद के यात्री के बैग से निकलीं सोने की बिस्किटें’
Ashok Bhasin IRS Reveal की सबसे सनसनीखेज बात थी एक घटना जो उन्होंने खुद देखी थी। एक बार एक डीएमके सांसद किसी को रिसीव करने एयरपोर्ट आए थे। वह एक प्रोटोकॉल वाला मामला बन गया और सभी की नजरें उस यात्री पर थीं।
लेकिन एक अधिकारी को अंतर्ज्ञान हुआ। उसने प्रोटोकॉल को दरकिनार किया और उस यात्री का सामान एक सामान्य यात्री की तरह स्कैन करवाया। नतीजा यह रहा कि सोने की बिस्किटें बरामद हो गईं। इसके बाद उस डीएमके सांसद को तुरंत एयरपोर्ट से चले जाने के लिए कहा गया, यह कहते हुए कि अगर वे रुके तो उनका नाम भी मामले में आ जाएगा। भसीन ने इसे एक सच्ची घटना बताते हुए कहा कि यह एक अफसर के अंतर्ज्ञान की ताकत का उदाहरण है।
‘1996 के बाद ग्रीन चैनल खुला: अब स्पेसिफिक इंटेलिजेंस जरूरी’
Ashok Bhasin IRS Reveal में 1996 की आर्थिक उदारीकरण के बाद के बदलावों का भी जिक्र हुआ। भसीन ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान काफी यात्रियों को रोका जाता था जो एक तरह की परेशानी का कारण भी था।
1996 में जब अर्थव्यवस्था खुली तो आधिकारिक निर्देश आए कि ग्रीन चैनल को पूरी तरह खुला रखा जाए। अब जो यात्री ग्रीन चैनल चुनता है उसे तब तक नहीं रोका जाएगा जब तक कि विशेष इंटेलिजेंस न हो कि वह कोई प्रतिबंधित वस्तु ले जा रहा है।
‘बड़ा सुरक्षा अंतराल: हॉल में घुसने के बाद कोई स्कैनिंग नहीं’
Ashok Bhasin IRS Reveal में सबसे चौंकाने वाला खुलासा था सुरक्षा प्रणाली में एक अंतराल के बारे में। भसीन ने बताया कि टर्बक्स से जब बैग बेल्ट पर डाले जाते हैं तो उस समय एक्सरे मशीन से सभी का बैग चेक होता है क्योंकि उस स्तर पर यह पता नहीं होता कि बैग किसका है।
लेकिन एक बार यात्री हॉल में प्रवेश कर अपना बैग उठा ले तो उसके बाद कोई स्कैनिंग नहीं होती। भसीन ने यह भी स्वीकार किया कि इससे बचकर निकलना बहुत आसान है। वीआईपी यात्रियों के बारे में उन्होंने कहा कि अक्सर उनके बैग हॉल में स्कैन नहीं होते, सिवाय बेल्ट वाली शुरुआती एक्सरे के।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- Ashok Bhasin IRS Reveal: कस्टम्स विभाग सिर्फ ड्यूटी कलेक्शन नहीं, देश की पहली सुरक्षा पंक्ति है; प्रोफाइलिंग के आधार पर सिर्फ 2-3% यात्री इंटरसेप्ट होते हैं।
- वीआईपी प्रोटोकॉल में मंत्रालय से फोन, शिफ्ट इंचार्ज को निर्देश, एयरो ब्रिज से एस्कॉर्ट; VIP बैग अक्सर हॉल में स्कैन नहीं होते।
- DMK सांसद के यात्री के बैग से सोने की बिस्किटें बरामद हुईं जब एक अफसर ने अंतर्ज्ञान के आधार पर प्रोटोकॉल तोड़कर जांच की।
- 1996 के बाद ग्रीन चैनल खुला; हॉल में बैग उठाने के बाद कोई स्कैनिंग नहीं होती; HSN कोड से कस्टम ड्यूटी तय होती है।








