Chandra Grahan 2026 — इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं को एक विशेष सतर्कता बरतनी होगी। 2 और 3 मार्च को पड़ने वाली इस पवित्र तिथि पर साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि स्नान और दान किस समय करें, व्रत कब रखें और सूतक काल के नियमों का पालन कैसे हो। पंचांग और धर्मशास्त्र के अनुसार इन सभी सवालों के जवाब बेहद स्पष्ट हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि और चंद्र ग्रहण का समय
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी और 3 मार्च की शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के आधार पर स्नान और दान 3 मार्च को किया जाएगा, जबकि व्रत 2 मार्च को रखा जाएगा।
इसी 2 मार्च को Falgun Purnima Lunar Eclipse 2026 का आगमन होगा। चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा।
सूतक सुबह 9:39 से — इससे पहले पूरा करें स्नान-दान
Chandra Grahan Sutak Kaal ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू होता है। इस हिसाब से इस बार सूतक 2 मार्च की सुबह 9 बजकर 39 मिनट से प्रभावी हो जाएगा और ग्रहण समाप्त होने तक यानी शाम 6:46 तक बना रहेगा।
सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, दान, भोजन, सोना और किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इसलिए जो श्रद्धालु फाल्गुन पूर्णिमा का पुण्य स्नान और दान करना चाहते हैं, उन्हें यह सब सूतक शुरू होने से पहले यानी सुबह 9:39 से पहले ही पूरा करना होगा।
ब्रह्म मुहूर्त है स्नान का सबसे श्रेष्ठ समय
Falgun Purnima Snan Muhurat 2026 में स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस समय पवित्र नदी में या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना अत्यंत फलदाई होगा।
यदि कोई इस मुहूर्त में स्नान न कर पाए, तो सूर्योदय के समय या उसके बाद भी स्नान किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि यह प्रक्रिया सूतक लगने से पहले अर्थात 9:39 AM से पहले पूरी होनी चाहिए।
दान से मिलता है पुण्य फल — क्या और कहाँ दें
स्नान के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन, फल या अन्य ज़रूरी वस्तुओं का दान करना चाहिए। यह दान गरीबों, ज़रूरतमंदों या किसी धार्मिक स्थल पर किया जा सकता है।
मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा पर विधि-विधान से किया गया दान जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता लेकर आता है। पापों का क्षय होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसीलिए इस दिन दान का विशेष महत्व है।
इस बार का संयोग है दुर्लभ — समय का रखें पूरा ध्यान
फाल्गुन पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का एक साथ आना एक विशेष संयोग है। ऐसे में धर्मशास्त्र के अनुसार सही क्रम और सही समय का पालन करना बेहद ज़रूरी है। जो लोग इस दिन के नियमों को ध्यान में रखकर स्नान, दान और व्रत करेंगे, उन्हें पूर्ण फल की प्राप्ति होगी और धार्मिक परंपराओं का पालन भी विधिवत होगा।
क्या है पूरा संदर्भ
फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान और दान की परंपरा सदियों पुरानी है। इस वर्ष 2 और 3 मार्च को यह तिथि पड़ रही है और 2 मार्च को ही साल का पहला Chandra Grahan 2026 भी है। सूतक काल के कारण स्नान-दान का समय सीमित हो गया है — इसीलिए श्रद्धालुओं को सुबह 9:39 से पहले ही सारी धार्मिक क्रियाएं पूरी करनी होंगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- फाल्गुन पूर्णिमा: 2 मार्च शाम 5:55 से शुरू, 3 मार्च शाम 5:07 तक — उदया तिथि के अनुसार स्नान-दान 3 मार्च को।
- Chandra Grahan 2026: 2 मार्च को दोपहर 3:21 से शाम 6:46 तक रहेगा।
- सूतक काल: 2 मार्च सुबह 9:39 से प्रभावी — इससे पहले पूरा करें स्नान और दान।
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:05 से 5:55 — स्नान का सर्वश्रेष्ठ समय।








