AAP MLA Manjinder Singh: पंजाब के खडूर साहिब से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मनजिंदर सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तरनतारन की एडिशनल सेशन कोर्ट ने उन्हें 12 साल पुराने छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में 4 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन सजा हुए 5 महीने बीत जाने के बावजूद वह अपने पद पर बने हुए हैं। अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला दिया गया है, जिसके तहत दो साल से अधिक सजा पाने वाले विधायक की सदस्यता रद्द हो जाती है। अदालत ने इस मामले में विधायक और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर 30 मार्च को अगली सुनवाई तय की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 3 मार्च 2013 का है, जब पीड़िता अपनी मासी के बेटे की शादी में गई थी। उस समय मनजिंदर सिंह लालपुरा टैक्सी ड्राइवर थे। पीड़िता के मुताबिक, शादी के दौरान लालपुरा समेत हरविंदर सिंह और गुरदीप सिंह ने उसके साथ गलत हरकतें कीं, जातिसूचक शब्द कहे और अश्लील हरकतें कीं। पुलिस कर्मचारियों ने भी उसके परिवार के साथ मारपीट की थी।
10 सितंबर 2025 को तरनतारन की एडिशनल सेशन कोर्ट ने इस मामले में मनजिंदर सिंह को दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। सजा होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, लेकिन वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
पीड़िता ने क्या कहा?
सजा के बाद पीड़िता ने कहा था कि उसे इंसाफ मिला है। उसने अपने पति और परिवार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इस पूरे समय परिवार उसके साथ मजबूती से खड़ा रहा। उसने बताया, “इस लड़ाई के दौरान कई मुश्किल चरण आए। मैं अपने बेटे को दो-दो महीने तक स्कूल नहीं भेज पाती थी, क्योंकि आरोपी रास्ते में मारने की धमकियां देते थे और केस वापस लेने का दबाव डालते थे।”
पीड़िता ने आगे कहा, “मेरे जीवन के 13 साल इन्होंने बर्बाद किए हैं। मैं अदालत से मांग करती हूं कि इन्हें कठोर सजा दी जाए।”
कोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता जसवंत सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका में दलील दी है कि सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है कि जब किसी विधायक को दो साल से अधिक की सजा हो जाती है, तो वह अपने पद पर नहीं रह सकता। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धाराओं का हवाला दिया, जिसके तहत दोषी करार दिए गए विधायक की सदस्यता तुरंत समाप्त हो जानी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि फैसला आए हुए पांच महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अदालत ने याचिका को सुनने के बाद विधायक मनजिंदर सिंह और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्यों नहीं गई अब तक विधायकी?
दरअसल, दो साल से अधिक सजा होने के बावजूद मनजिंदर सिंह की विधायकी इसलिए बची हुई है क्योंकि उनके पास अपील का विकल्प है। वह पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर कर सकते हैं। अगर हाईकोर्ट उनकी सजा पर रोक लगा देता है, तो उनकी विधायकी बच सकती है। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी करके सरकार और विधायक से जवाब मांगा है, जिससे यह मामला अब गंभीर हो गया है।
यह पूरा मामला कानून के शासन और राजनीतिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जहां एक ओर पीड़िता 13 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रही है, वहीं दोषी करार दिए जा चुके विधायक का पद पर बने रहना आम आदमी के मन में सवाल पैदा करता है कि क्या सजा मिलने के बाद भी जनप्रतिनिधि बना रह सकता है? अब देखना होगा कि हाईकोर्ट 30 मार्च को इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
खडूर साहिब से AAP विधायक मनजिंदर सिंह को छेड़छाड़ मामले में 4 साल की सजा हुए 5 महीने बीते, फिर भी विधायकी बरकरार।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सदस्यता रद्द करने की मांग, सरकार को नोटिस जारी।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला, अगली सुनवाई 30 मार्च को।
2013 में हुई घटना की पीड़िता ने बताया- 13 साल बर्बाद किए, बेटे को स्कूल नहीं भेज पाई।








