US Iran UK Tension: अमेरिका (USA) और ईरान (Iran) के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को उनके सबसे करीबी सहयोगी देशों में से एक ब्रिटेन (Britain) से एक तगड़ा झटका लगा है। यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) ने ईरान पर संभावित हमलों के लिए ब्रिटेन में स्थित रॉयल एयर फोर्स (RAF) के ठिकानों का इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले से मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में पहले से ही तनावपूर्ण हालात और गंभीर हो गए हैं और महायुद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं।
खबर है कि ट्रंप प्रशासन ने ब्रिटेन के इस रुख से नाराज होकर चागोस द्वीप समूह (Chagos Islands) से संबंधित एक डील से अपना समर्थन वापस ले लिया है। अमेरिका ने इसे “बड़ी गलती” बताते हुए डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) को मॉरीशस को सौंपे जाने के खिलाफ चेतावनी दी है। यह वही रणनीतिक द्वीप है जहां अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा स्थित है।
क्यों मना किया ब्रिटेन ने?
ब्रिटिश सरकार ने साफ किया है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में भाग लेने से पहले अंतरराष्ट्रीय कानून और अपनी नीतियों का कठोरता से पालन करेगी। उसने कहा है कि पिछले वर्षों में भी उसने ईरान पर सीधे हमलों में प्रत्यक्ष भागीदारी से इनकार किया था और केवल अपनी और सहयोगी बलों की रक्षा तक ही अपनी भूमिका सीमित रखेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने स्पष्ट कर दिया है कि RAF बेस के इस्तेमाल के लिए ब्रिटिश सरकार की अनुमति अनिवार्य है, जिसे फिलहाल नहीं दिया जाएगा।
चागोस द्वीप समूह का विवाद क्या है?
यह पूरा विवाद ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस (Mauritius) को सौंपने की योजना से जुड़ा हुआ है। ब्रिटेन इस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने और डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) को 99 साल के लिए पट्टे (लीज) पर वापस लेने की योजना बना रहा है, जिसके लिए करीब 35 बिलियन पाउंड की राशि पर चर्चा चल रही है। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक बेस है, जिसके माध्यम से अमेरिका और ब्रिटेन मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य संचालन में सहयोग करते हैं।
ट्रंप ने ब्रिटेन को चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को न सौंपने की सलाह दी है, जबकि स्टारमर का कहना है कि इस सौदे के तहत द्वीपों की संप्रभुता मॉरीशस को दी जानी है और सैन्य अड्डे को 99 वर्षों के लिए पट्टे पर वापस लिया जाएगा।
ट्रंप का पलटवार और बातचीत का दौर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सरकार के इस रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड जैसे ठिकानों की आवश्यकता हो सकती है ताकि ईरान से संभावित सुरक्षा खतरों का सामना किया जा सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर किसी समझौते पर नहीं आता है तो अमेरिका को इन ठिकानों तक पहुंच की जरूरत पड़ सकती है।
दूसरी ओर, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन मुख्य मुद्दों पर दोनों पक्ष अलग-अलग हैं। उन्होंने ईरान को सलाह दी कि ट्रंप प्रशासन के साथ डील करना उसके लिए समझदारी होगी। ट्रंप ने खुद भी संकेत दिए हैं कि अगले 10 दिनों में डील होने की संभावना है, लेकिन यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से आगे भी कदम उठा सकता है।
क्षेत्र में सैन्य तैयारियां जारी
इन सबके बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में बमवर्षक विमान (बॉम्बर), विमान वाहक पोत (कैरियर स्ट्राइक ग्रुप) और हवाई ईंधन भरने वाले विमान (रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट) तैनात कर दिए हैं। वहीं, ब्रिटेन ने भी क्षेत्र में अतिरिक्त टाइफून और F-35 लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। ईरान ने भी रूस (Russia) के साथ मिलकर ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और उत्तरी हिंद महासागर में नौसेना अभ्यास शुरू कर दिए हैं और बड़े शिपिंग मार्गों के पास लाइव फायर एक्सरसाइज कर रहा है।
विश्लेषण: क्या बिखर रहा है पश्चिमी गठबंधन?
अमेरिका और ब्रिटेन के बीच यह खुला मतभेद पश्चिमी गठबंधन में एक दुर्लभ घटना है। ईरान जैसे मुद्दे पर अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी का उसे असैन्य सहयोग देने से इनकार करना ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। चागोस द्वीप समूह का मुद्दा इसमें आग में घी का काम कर रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनके आक्रामक रुख ने उनके पारंपरिक सहयोगियों को भी असहज कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन ब्रिटेन के इस रुख के बावजूद ईरान पर एकतरफा हमला करता है, या फिर कूटनीति के जरिए इस संकट का हल निकाला जाता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बढ़ते तनाव पर टिकी हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर (Keir Starmer) ने ईरान पर हमले के लिए अमेरिका (USA) को RAF बेस इस्तेमाल करने से रोक दिया।
इस फैसले के बाद ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह डील से समर्थन वापस ले लिया, डिएगो गार्सिया को लेकर तनाव बढ़ा।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बॉम्बर, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट तैनात किए।
ईरान ने रूस (Russia) के साथ ओमान की खाड़ी में संयुक्त नौसेना अभ्यास शुरू किया।
व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है।








