Punjab Agri-Processing Units Expansion: पंजाब (Punjab) की भगवंत मान (Bhagwant Mann) सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां (Gurmeet Singh Khudian) ने गुरुवार को फाजिल्का जिले के गांव आलमगढ़ में तीन महत्वपूर्ण कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों का उद्घाटन किया। ये इकाइयां पंजाब एग्री एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PAGREXCO) द्वारा स्थापित की गई हैं और इनके विस्तार से क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेंगी, बल्कि पंजाब को उच्च-मूल्य वाले प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भी स्थापित करेंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार किसानों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) बना रही है।
मिर्च प्रसंस्करण यूनिट की क्षमता चार गुना बढ़ी
इस क्षेत्र के मिर्च उत्पादकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। पी.ए.जी.आर.ई.एक्स.सी.ओ. ने आलमगढ़ में अपने मौजूदा फल एवं सब्जी प्रसंस्करण संयंत्र में एक नई अत्याधुनिक मिर्च प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। 3 मीट्रिक टन प्रति घंटा की अतिरिक्त क्षमता के साथ, अब कुल मिर्च प्रसंस्करण क्षमता 1 मीट्रिक टन प्रति घंटा से बढ़कर 4 मीट्रिक टन प्रति घंटा हो जाएगी।
इस यूनिट में लाल और हरी मिर्च दोनों को प्रसंस्कृत किया जाएगा, खासतौर पर निर्यात के लिए उच्च-गुणवत्ता वाला मिर्च पेस्ट तैयार किया जाएगा। इस पहल से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक समर्पित खरीद चैनल मिलेगा और उन्हें मिर्चों को धूप में सुखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हर सीजन में करीब 6,500 मीट्रिक टन मिर्चों के प्रसंस्करण का लक्ष्य है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और कटाई के बाद होने वाले नुकसान में भारी कमी आएगी।
सिट्रस प्रसंस्करण यूनिट का आधुनिकीकरण, बढ़ेगा किन्नू का स्वाद
पंजाब अपने प्रसिद्ध किन्नू (सिट्रस फल) उत्पादन के लिए जाना जाता है। अब इसका अधिकतम लाभ उठाने के लिए पी.ए.जी.आर.ई.एक्स.सी.ओ. ने अपनी सिट्रस प्रसंस्करण यूनिट में बड़ा तकनीकी उन्नयन (अपग्रेड) किया है। इसमें एक डी-एसिडिफिकेशन यूनिट, एक विशेष सिट्रस पील ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट और एक डी-बिटरिंग यूनिट शामिल की गई है।
कृषि मंत्री ने बताया कि इस अपग्रेड से किन्नू के जूस में लिमोनिन जैसे प्राकृतिक तत्वों के कारण होने वाली देरी से कड़वाहट की समस्या का समाधान होगा। कड़वाहट हटाकर और एसिडिटी (अम्लता) को नियंत्रित करके, पंजाब का सिट्रस अब वैश्विक स्वाद मानकों पर खरा उतरेगा। पील ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट बचे हुए अवशेषों (छिलकों) से उच्च-मूल्य वाला आवश्यक तेल (एसेंशियल ऑयल) निकालेगी, जिसकी खाद्य स्वाद, कॉस्मेटिक और फार्मास्युटिकल उद्योगों में भारी मांग है। इससे किसानों को दोगुना फायदा होगा।
हाई-टेक नर्सरी से सब्जियों की खेती में क्रांति
किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली बुवाई सामग्री उपलब्ध कराने के लिए आलमगढ़ में एक नई हाई-टेक प्रोटेक्टेड कल्टिवेशन नर्सरी स्थापित की गई है। इस नर्सरी से पी.ए.जी.आर.ई.एक्स.सी.ओ. की वार्षिक बीज उत्पादन क्षमता 16 लाख से बढ़कर 40 लाख पौधों (सीडलिंग्स) तक पहुंच जाएगी।
यह नर्सरी जलवायु-नियंत्रित पॉलीहाउसों में सब्जियों के एकसमान और स्वस्थ पौधे तैयार करेगी। यह तकनीक पारंपरिक प्रणालियों में महंगे हाइब्रिड बीजों से जुड़ी पौध मृत्यु दर को कम करती है। मंत्री ने कहा, “हम किसानों को किफायती दरों पर उच्च-गुणवत्ता वाली बुवाई सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। इससे उनकी लागत कम होगी, फसल बेहतर होगी और सब्जियों की खेती में अधिक उत्पादकता और मुनाफा सुनिश्चित होगा।”
किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी ये परियोजनाएं
पंजाब सरकार की ये तीनों परियोजनाएं राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती हैं। पारंपरिक रूप से गेहूं-धान के चक्र में फंसे पंजाब के किसानों के लिए ये इकाइयां फसल विविधीकरण को बढ़ावा देंगी। मिर्च और किन्नू जैसी नकदी फसलों के प्रसंस्करण से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनेगी। वहीं, हाई-टेक नर्सरी से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे मिलने से सब्जियों का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ेगी। ये सभी कदम मिलकर किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
पंजाब सरकार (Punjab Government) ने फाजिल्का में 3 कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार किया।
मिर्च प्रसंस्करण क्षमता 1 मीट्रिक टन से बढ़कर 4 मीट्रिक टन प्रति घंटा हुई।
सिट्रस यूनिट में अपग्रेड से किन्नू के जूस की कड़वाहट दूर होगी और पील ऑयल निकाला जाएगा।
नई हाई-टेक नर्सरी से सालाना पौध उत्पादन क्षमता 16 लाख से बढ़कर 40 लाख हुई।
इन परियोजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद।








