AI Summit Delhi 2026: भारत में आज से इंडिया AI इम्पैक्ट समिट शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे। यह समिट भारत के लिए बेहद खास है क्योंकि इससे दुनिया में भारत का डंका बजने जा रहा है। 16 देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सरकार प्रमुख, 45 से ज्यादा देशों के मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और संयुक्त राष्ट्र महासचिव इस समिट में हिस्सा ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा है कि यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के लिए दुनिया भर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।
भारत के लिए क्यों खास है यह समिट?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक AI इम्पैक्ट समिट 2026 इस लिहाज से भारत के लिए बेहद खास है कि इससे दुनिया में भारत का डंका बजने जा रहा है। यह केवल एक प्रौद्योगिकी सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर है।
सरकार इसे आर्थिक कूटनीति, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने के व्यापक अभियान के रूप में देख रही है। यह समिट तकनीकी विमर्श के साथ-साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद का भी मंच बनेगा।
16 देशों के नेता कर रहे हैं शिरकत
पीएम मोदी के आमंत्रण पर 16 देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सरकार प्रमुख इस समिट में हिस्सा लेने आ रहे हैं। इनमें भूटान के प्रधानमंत्री, ब्राजील के राष्ट्रपति, फ्रांस के राष्ट्रपति, श्रीलंका के राष्ट्रपति, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री, फिनलैंड के प्रधानमंत्री और ग्रीस के प्रधानमंत्री शामिल हैं।
इसके साथ ही स्पेन के राष्ट्रपति, मॉरीशस के प्रधानमंत्री और UAE से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा 45 से ज्यादा देशों के मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, संयुक्त राष्ट्र महासचिव और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी विचार-विमर्श में हिस्सा लेंगे।
PM मोदी करेंगे द्विपक्षीय बैठकें
सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सभी नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठक करेंगे। जिससे यह सम्मेलन तकनीकी विमर्श के साथ-साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद का भी मंच बनेगा।
यह द्विपक्षीय बैठकें भारत के लिए अपने रिश्तों को मजबूत करने और नई साझेदारियां बनाने का सुनहरा मौका हैं। AI के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ व्यापार, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
UN महासचिव का बड़ा बयान: भारत सबसे उपयुक्त जगह
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि भारत एक बहुत सफल उभरती अर्थव्यवस्था है। उसका ना केवल ग्लोबल इकोनॉमी बल्कि वैश्विक मामलों में भी अहम रोल है। यह AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए एकदम उपयुक्त जगह है।
गुटेरेस ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ पूरी दुनिया को मिलना चाहिए, ना कि केवल विकसित देशों या दो सुपर पावर यानी महाशक्तियों को। उनका इशारा अमेरिका और चीन की ओर था।
उन्होंने भारत को इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि आवश्यक है कि AI का विकास सभी के लाभ के लिए हो। यह बयान भारत की भूमिका को वैश्विक मंच पर और मजबूत करता है।
भारत में AI सेक्टर की तेज रफ्तार वृद्धि
रिपोर्ट्स के मुताबिक देश का AI टैलेंट पूल 33% की दर से बढ़ रहा है और इंटरनेट उपयोगकर्ता 14.5 करोड़ हो चुके हैं। यह आंकड़े भारत में AI के भविष्य को लेकर बेहद उत्साहजनक हैं।
इस साल 69% कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने की तैयारियों में हैं। कंपनियों के रुझान भी AI को लेकर काफी सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं। 80% कंपनियां उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI को अपना रही हैं।
92% कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि 92% कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं या करने की योजना बना रही हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ना सिर्फ AI अपनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक औसत से आगे निकलने वाला है।
यह रुझान दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां AI की ताकत को समझ रही हैं और इसे अपने बिजनेस में शामिल कर रही हैं। यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
वैश्विक दक्षिण की आवाज बनेगा भारत
यह समिट भारत के लिए वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने का भी मौका है। AI जैसी तकनीक का फायदा सिर्फ अमीर देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विकासशील देशों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
भारत इस समिट के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि AI का विकास समावेशी होना चाहिए। हर देश को AI के फायदे मिलने चाहिए, चाहे वह विकसित हो या विकासशील।
आर्थिक कूटनीति का मजबूत मंच
सरकार इस समिट को आर्थिक कूटनीति के मजबूत मंच के रूप में देख रही है। AI के क्षेत्र में सहयोग से भारत नई साझेदारियां बना सकता है और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
विदेशी निवेश को आकर्षित करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और भारतीय AI स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच देने का यह सुनहरा अवसर है। यह समिट भारत को AI सुपरपावर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
युवाओं के लिए बड़ा अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समिट हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का प्रमाण है। भारत में युवा आबादी की बड़ी संख्या है और AI के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को निखारने का यह बेहतरीन मौका है।
इस समिट से युवाओं को वैश्विक विशेषज्ञों से सीखने, नेटवर्किंग करने और अपने आइडियाज को दुनिया के सामने रखने का मौका मिलेगा। यह भारत के युवाओं के लिए करियर के नए अवसर खोल सकता है।
विज्ञान और टेक्नोलॉजी में भारत की प्रगति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह अवसर इस बात का प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। भारत अब सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता भी बन रहा है।
AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा रही है। यह समिट इस प्रगति को और तेज करने का माध्यम बनेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- PM मोदी 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजे भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे
- 16 देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और 45 से ज्यादा देशों के मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हो रहे हैं
- UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि AI का फायदा सिर्फ अमेरिका-चीन को नहीं, पूरी दुनिया को मिलना चाहिए
- भारत का AI टैलेंट पूल 33% की दर से बढ़ रहा है, 92% कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं
- यह समिट आर्थिक कूटनीति और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने का मंच बनेगा








