Varanasi court bomb threat email ने राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाराणसी में उस वक्त दहशत फैल गई जब जिला जज को एक धमकी भरा ईमेल मिला, जिसमें वाराणसी कचहरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के कई जनपदों के न्याय परिसरों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने दोपहर 1:00 बजे का समय निर्धारित करते हुए सिलसिलेवार 18 धमाके करने की बात कही है। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया और आनन-फानन में कचहरी परिसर को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
तमिलनाडु से आया ईमेल, 18 धमाकों की चेतावनी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह धमकी भरा ईमेल तमिलनाडु के रहने वाले सुनिया डासन नामक व्यक्ति की ओर से भेजा गया है। ईमेल में सिर्फ धमाके की धमकी ही नहीं दी गई है, बल्कि तमिलनाडु सरकार और मीडिया के गठजोड़ को लेकर बेहद चौंकाने वाले और गंभीर दावे भी किए गए हैं।
ईमेल में कहा गया है कि तमिलनाडु सरकार 2021 तक मीडिया को खत्म करना चाहती थी और इसके लिए उसने बड़े पत्रकारों को हायर कर लिया और उन्हें अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रही है। धमकी भरे मेल में मीडिया मैनेजमेंट को लेकर गहरी नाराजगी जताई गई है।
जब न्यायालय खुद असुरक्षित, तो न्याय की क्या गारंटी?
न्यायालय वह पवित्र स्थान है जहां आम आदमी को इंसाफ की उम्मीद लेकर जाता है। अगर वही न्यायालय असुरक्षित हो जाए, बम की धमकियों से दहल जाए, तो आम नागरिक का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठना लाजमी है। यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में देशभर की अदालतों, स्कूलों, हवाई अड्डों को इस तरह की धमकियां मिलती रही हैं। ज्यादातर मामलों में ये धमकियां फर्जी निकलती हैं, लेकिन इससे पैदा होने वाला आतंक और प्रशासनिक तंत्र का ठप होना बिल्कुल असली होता है। वकील, कर्मचारी, पक्षकार और आम नागरिक घंटों सड़क पर खड़े रह जाते हैं।
मीडिया और सरकार पर गंभीर आरोप, नाबालिग लड़कियों का जिक्र
ईमेल में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि सुनिया डासन ने आरोप लगाया है कि प्रमुख जर्नलिस्टों को सरकार के पक्ष में करने के लिए उन्हें निजी हाथों में बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं, इन पत्रकारों के लिए नाबालिग बच्चियों और लड़कियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
ईमेल में एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और वहां के स्थानीय बदमाशों की मिलीभगत का भी जिक्र किया गया है। मेल भेजने वाले ने बकायदा आठ चर्चित जर्नलिस्टों और उनके पास भेजी गई लड़कियों के नाम और उनकी उम्र का भी उल्लेख किया है। आरोपी ने दावा किया है कि व्यवस्था के खिलाफ उसके इस आक्रोश का परिणाम इन बम धमाकों के रूप में सामने आया है।
कचहरी परिसर में मिली लावारिस अटैची, जांच जारी
धमकी मिलने के बाद कचहरी परिसर को खाली कराने की प्रक्रिया के दौरान एक लावारिस अटैची मिलने से सनसनी और बढ़ गई। बम डिस्पोजल दस्ते की टीम उसकी जांच में जुटी हुई है। वहीं कचहरी के साथ ही कलेक्ट्रेट के सभी कार्यालय और रजिस्ट्री दफ्तर भी खाली कराए जा रहे हैं।
इस सूची में अयोध्या कचहरी का नाम भी शामिल है। वहां भी कचहरी खाली कराकर चेकिंग लगातार चल रही है।
पुलिस ने किया साफ- फिलहाल कोई संदिग्ध वस्तु नहीं, जांच जारी
जिला जज को धमकी भरा मेल मिलते ही पुलिस कमिश्नरेट और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। कचहरी परिसर में भारी पुलिस बल, डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) तैनात कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर यह किसी विद्वेषित या शरारती तत्व की हरकत लग रही है, लेकिन आरोपों की गंभीरता और 18 ब्लास्ट की धमकी को देखते हुए किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। साइबर सेल की मदद से ईमेल के मूल स्रोत और सुनिया डासन की लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है। तमिलनाडु पुलिस से भी इस संबंध में लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि आरोपी की सच्चाई और उसके इरादों का पता लगाया जा सके।
अजमेर कोर्ट को भी मिली धमकी
उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान के अजमेर कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है। अजमेर के सेशन कोर्ट को भी इसी तरह की धमकी भरा ईमेल मिला है, जहां पुलिस बल छानबीन में जुटी हुई है।
आम आदमी पर क्या असर?
इस तरह की धमकियों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिक पर पड़ता है। जो लोग अपने मुकदमे की पैरवी के लिए या जरूरी काम से कचहरी आते हैं, उन्हें घंटों बाहर खड़े रहना पड़ता है। वकीलों की पैरवी प्रभावित होती है, सुनवाई टल जाती है। एक धमकी भरे मेल से पूरी न्यायिक व्यवस्था ठप हो जाती है। सबसे बड़ी बात, इससे लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा कमजोर होता है कि जहां न्याय मिलना चाहिए, वहीं सुरक्षा का संकट हो।
‘जानें पूरा मामला’
दरअसल, पिछले कुछ समय में देशभर की अदालतों, स्कूलों, हवाई अड्डों और अस्पतालों को इस तरह की धमकियां मिलने का सिलसिला बढ़ा है। ज्यादातर मामलों में ये धमकियां फर्जी निकलती हैं और किशोरों या मानसिक रूप से परेशान लोगों द्वारा भेजी जाती हैं। लेकिन हर बार पुलिस और प्रशासन इन्हें गंभीरता से लेता है और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जाता है। इस बार वाराणसी कोर्ट को मिली धमकी में मीडिया और सरकार के गठजोड़ को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। साइबर सेल और तमिलनाडु पुलिस मिलकर इस मामले की जांच कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
वाराणसी जिला जज को धमकी भरा ईमेल, इलाहाबाद हाईकोर्ट और कई जनपदों की कचहरियों को बम से उड़ाने की चेतावनी।
ईमेल तमिलनाडु के सुनिया डासन नामक व्यक्ति ने भेजा, 18 धमाकों की बात कही।
मीडिया और सरकार के गठजोड़ को लेकर गंभीर आरोप, पत्रकारों को नाबालिग लड़कियां उपलब्ध कराने का दावा।
कचहरी परिसर खाली कराया गया, लावारिस अटैची मिली, बम डिस्पोजल टीम जांच में जुटी।
अयोध्या और अजमेर कोर्ट को भी इसी तरह की धमकी, पुलिस सतर्क।








